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दूसरे दौर का प्रचार समाप्त | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण की 141 सीटों के लिए चुनाव प्रचार समाप्त हो गया है. इस दौर में राहुल गांधी, शरद पवार, कमलनाथ, सुषमा स्वराज के अलावा बिहार के कई दिग्गजों का भाग्य तय होना है. 23 अप्रैल को आंध्र प्रदेश की 20, असम की 11, बिहार की 13, कर्नाटक की 17, मध्य प्रदेश की 13, महाराष्ट्र की 25, उड़ीसा की 11, उत्तर प्रदेश की 17, झारखंड की आठ, गोवा की दो, जम्मू-कश्मीर की एक और मणिपुर की एक सीट पर मतदान होगा. पहले दौर में 16 अप्रैल को 124 सीटों के लिए चुनाव हुआ था. दूसरे चरण में आंध्र प्रदेश और उड़ीसा की विधानसभा सीटों के लिए भी मतदान पूरा हो जाएगा. बिहार बिहार में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह, इस्पात मंत्री राम विलास पासवान, मानव संसाधन राज्य मंत्री मोहम्मद अशरफ़ फ़ातमी, गृह राज्य मंत्री शकील अहमद, जॉर्ज फ़र्नांडिस जैसे दिग्गज नेताओं के भाग्य का फ़ैसला होना है. इस चरण में 11 लोकसभा क्षेत्रों के लिए मंगलवार शाम को चुनाव प्रचार ख़त्म हो गया. ये क्षेत्र हैं, हाजीपुर, वैशाली, मुज़फ्फ़रपुर, उजियारपुर, समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, बाल्मीकिनगर, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा और मधुबनी. लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा)- राष्ट्रीय जनता दल (राजद) गठबंधन से अलग होकर अकेले दम पर चुनाव लड़ रही कांग्रेस पार्टी कई सीटों पर कांटे की टक्कर देती नज़र आ रही है तो कुछ सीटों पर वो दूसरों का खेल बिगाड़ने की स्थिति में नज़र आ रही है. रघुवंश प्रसाद सिंह वैशाली संसदीय क्षेत्र से लगातार पांचवी बार जीत हासिल करने का दावा कर रहे हैं. लेकिन पिछले चुनाव में निर्दलीय लड़ते हुए कड़ी टक्कर देने वाले बाहुबली छवि के विधायक विजय कुमार शुक्ला उर्फ़ मुन्ना शुक्ला को इस बार जनता दल यूनाइटेड ने टिकट थमा दिया है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रत्याशी रघुवंश प्रसाद सिंह की मुश्किलें कांग्रेस प्रत्याशी हिंद केशरी यादव ने और बढ़ा दी है. कांग्रेस उम्मीदवार के कारण वैशाली में राजद के रिम (राजपूत, यादव, मुसलमान) समीकरण को धक्का लगा है. रघुवंश प्रसाद जहां विकास को मुख्य मुद्दा बना रहे हैं, वहीं मुन्ना शुक्ला का कहना है, "रघुवंश जी का घर हाजीपुर क्षेत्र में है. वो यहां के बाहरी हैं और जनता उन्हें नकार देगी." वजूद की लड़ाई
बगल की मुज़फ्फ़रपुर सीट पर टिकट से वंचित किए गए जॉर्ज फ़र्नांडिस बतौर निर्दलीय किस्मत आज़मा रहे हैं. लेकिन लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के भगवान लाल साहनी, जनता दल यूनाइटेड (यू) के जय नारायण निषाद और कांग्रेस प्रत्याशी विनीता विजय के बीच ही मुख्य लड़ाई दिखाई देती है. बोलने में असमर्थ जॉर्ज के लिए अपनी सीट बचा पाना मुश्किल नज़र आ रहा है और समीक्षकों की राय में वो तीसरे- चौथे स्थान के लिए संघर्ष कर रहे हैं. लेकिन वो जदयू प्रत्याशी को नुकसान पहुंचाने की मक़सद में ज़रुर कामयाब होते दिख रहे हैं. राम विलास पासवान, वर्ष 1984 को छोड़ दें तो वर्ष 1977 से ही हाजीपुर सीट का प्रतिनिधित्व करते आए हैं. इस बार जदयू की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री और वयोवृद्ध नेता रामसुंदर दास उन्हें चुनौती दे रहे हैं. लेकिन क्षेत्र के लिए किए गए विकास कार्यों को देखते हुए राम विलास पासवान का पलड़ा भारी दिखता है. उजियारपुर संसदीय क्षेत्र से राजद के आलोक मेहता और जदयू की अश्वमेघ देवी के बीच सीधा मुक़ाबला है. यह क्षेत्र परिसीमन की उपज है जो रोसड़ा संसदीय क्षेत्र के ख़त्म होने से बना है. वहीं रोसड़ा से सांसद रहे राम विलास पासवान के भाई रामचंद्र पासवान इस बार समस्तीपुर से किस्मत आज़मा रहे हैं और उनकी लड़ाई जदयू के महेश्वर हजारी और कांग्रेस के अशोक राम से है. रामचंद्र पासवान का कहना है, "मैं जनता को हाजीपुर की तरह ही समस्तीपुर का विकास करने का भरोसा दिलाता हूं." अल्पसंख्यकों का रुझान इस चरण में दरभंगा और मधुबनी की सीट पर दिलचस्प मुक़ाबला है. दरभंगा से एमए फ़ातमी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कीर्ति आज़ाद आमने-सामने हैं. इस सीट पर 17 फ़ीसदी मतदाता अल्पसंख्यक वर्ग के हैं जो इस बार राजद से नाराज़ नज़र आ रहे हैं और इनका रुझान कांग्रेस प्रत्याशी अजय जलान के प्रति दिखाई देता है. इस सीट पर लगभग 18 फ़ीसदी मतदाता यादव समुदाय से हैं और लालू का माई समीकरण यहां निर्णायक साबित होता रहा है लेकिन इस बार यह ध्वस्त हो चुका है.
इसके बावजूद फ़ातमी कहते हैं, "मुसलमानों का सारा वोट हमें मिलेगा क्योंकि लालू-मुलायम ही इस देश के मुसलमानों के सच्चे लीडर हैं." विकास के नारे के साथ शुरु हुआ चुनावी समर मतदान की तारीख़ नज़दीक आते-आते फिर जातीय समीकरण की ओर झुकता नज़र आ रहा है. मधुबनी में शकील अहमद का मुक़ाबला राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी और भाजपा के हुकुम देव नारायण से है. शकील अहमद बेहतर छवि और विकास कार्यों के कारण लोकप्रिय हैं. इस सीट पर मुसलमानों और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर यानी साढ़े तीन लाख है. हुकुमदेव नारायण की मुश्किल ये है कि राजद में रहते हुए उन्होंने कथित तौर पर अगड़ी जातियों के लिए अपमानजनक टिप्पणियां की थी उसे यहां के ब्राह्मण मतदाता भूल नहीं पा रहे हैं. फ़िल्मी मुक़ाबला पश्चिम चंपारण से गंगाजल, दामुल जैसी फ़िल्मे बना चुके प्रकाश झा लोजपा के टिकट पर कांग्रेस प्रत्याशी साधु यादव और भाजपा के संजय जायसवाल से लोहा ले रहे हैं. इस सीट पर तीनों उम्मीदवारों में कांटे की टक्कर है. पूरे क्षेत्र का दौरा करने के बाद ये अंदाज़ भी लगा पाना मुश्किल है कि कौन से दो प्रत्याशी सबसे आगे चल रहे हैं. प्रकाश झा बेतिया के अस्पतालों, किसानों के लिए किए व्यक्तिगत प्रयासों को मुख्य मुद्दा बना रहे हैं जबकि संजय जायसवाल इस क्षेत्र के विकास के लिए अपने पिता और यहीं से दो बार सांसद रहे मदन जायसवाल के प्रयासों की दुहाई देकर वोट मांग रहे हैं. पूर्वी चंपारण यानी मोतिहारी से राजद के अखिलेश सिंह सीट बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं और उनका मुक़ाबला भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह से है. पिछले चुनाव में बेतिया से जीते रघुनाथ झा इस बार बाल्मीकिनगर सीट से लड़ रहे हैं जहां उनका मुक़ाबला जदयू के वैद्यनाथ महतो से है. लेकिन कांग्रेस के शमीम अख़्तर ने दोनों का गणित बिगाड़ दिया है. |
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