दलित मामले पर एसआईटी में भरोसा नहीं: मेवाणी

    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

गुजरात में दलित आंदोलन के नेता जिग्नेश मेवाणी का कहना है कि उन्हें जुलाई में दलितों की पिटाई के मामले में पुलिस की जांच में कोई भरोसा नहीं है.

दिल्ली से बीबीसी हिंदी के फेसबुक पन्ने पर लाइव बोलते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा इसलिए नहीं है क्योंकि वर्ष 2012 में चार दलितों की मौत के मामले में पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन इतने सालों बाद करने की घोषणा हुई है.

उन्होंने पूछा कि जब चार साल से मामला लंबित पड़ा है तो अब क्या उम्मीद की जा सकती है?

रविवार को गांधीनगर में दलितों की एक बड़ी रैली हुई लेकिन जिग्नेश मेवाणी उस रैली में नहीं थे, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर दलित नेताओं के बीच कथित मनमुटाव पर काफी अटकलें लगाई गईं. बीबीसी हिंदी से बातचीत में उन्होंने इन्हें ख़ारिज किया.

जिग्नेश कहते हैं कि जिस तरह उनके संगठन यानी उना दलित अत्याचार लड़ाई समिति का साथ और भी कई संगठनों ने दिया, उसी तरह उनका संगठन भी रविवार की रैली में शामिल था.

उनका कहना था, "चूँकि मुझे दिल्ली और दूसरी जगहों पर कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेना था इस लिए मैं बाहर हूँ. मगर हमारे संगठन के दूसरे लोग तो उसमे शामिल हुए हैं."

गुजरात में दलितों के आंदोलन के बाद जिग्नेश मेवाणी की राजनीतिक मंशा पर भी सवाल उठाए गए हैं.

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उनके विरोधियों का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह राजनीतिक है जो गुजरात में होने वाले चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी की सरकार को निशाना बनाने के लिए चलाया गया है.

जिग्नेश मेवाणी आम आदमी पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं.

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मगर जिग्नेश मेवाणी कहते हैं कि उन्होंने आम आदमी पार्टी से अपना नाता तोड़ लिया है और उन्होंने औपचारिक रूप से इस्तीफा भी दे दिया है.

उना दलित अत्याचार लड़ाई समिति ने आंदोलन के दौरान एक नारा दिया था- "गाय की पूँछ आप (भाजपा सरकार) रख लो और दलितों को ज़मीन दे दो."

संगठन ने गुजरात की सरकार से मांग की थी कि वो 15 सितंबर से पहले उन दलितों को पांच-पांच एकड़ ज़मीन आवंटित करे जो मरे हुए पशुओं का चमड़ा निकालने जैसे काम बंद कर रहे हैं.

ऐसा न होने की सूरत में उन्होंने रेल रोको आंदोलन की धमकी भी दी है.

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यह पूछे जाने पर कि पांच-पांच एकड़ ज़मीन आवंटित करना कितना व्यावहारिक है, जिग्नेश कहते हैं कि संविधान में भूमिहीनों को ज़मीन देने की बात कही गई है.

उनका कहना है, "सरकार के पास ख़ाली ज़मीन तो है ही, और अगर वो चाहे तो ज़मीन ख़रीद कर भी दलितों को दे सकती है, क्योंकि वो कंपनी लगाने वालों को भी तो ज़मीन देती आई है."

दिल्ली में मौजूद जिग्नेश मेवाणी का कहना है कि वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलना चाहते हैं और उनके गुजरात आने और दलितों के वैकल्पिक रोज़गार के बारे में भी पूछना चाहते हैं.

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