गोरक्षा पर संघ नाराज़ हुआ पीएम से

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आरएसएस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को अतिश्योक्ति बताया है जिसमें कहा गया था कि गौ रक्षकों में से 80 फ़ीसद फ़र्ज़ी हैं.
दिल्ली और फिर दक्षिणी राज्य हैदराबाद में बोलते हुए मोदी ने कहा "कुछ लोग गौरक्षक के नाम पर दुकान खोलकर बैठ गए हैं. मुझे इस पर बहुत ग़ुस्सा आता है."
मोदी ने आगे कहा कि रात में गोरख धंधे में लगे कुछ असमाजिक तत्व दिन में गौ रक्षक बन जाते हैं और इनमें से 80 फ़ीसदी फ़र्ज़ी हैं.
मोदी के बयान के दूसरे दिन संघ के जनरल सेक्रेटरी भैयाजी जोशी ने भी मोदी की बात का समर्थन किया.
आरएसएस ने कहा है कि नरेंद्र मोदी को 80 फ़ीसद की तादाद का ज़िक्र नहीं करना चाहिए था.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ संघ के प्रवक्ता मनमोहन वैद्य ने उनसे कहा है कि, "80 फ़ीसद वाला बयान देने से बचा जाना चाहिए. लेकिन बाद में प्रधानमंत्री ने इसे हैदराबाद में दुरुस्त कर लिया. उन्होंने कहा कि मुठ्ठी भर गौ रक्षक फ़र्ज़ी हैं. और ये बयान दलितों पर हुए हमले के बाद क्यों दिया जाए. आरएसएस तो हमेशा से गौ रक्षा की बात करता रहा है."
जब वैद्य से ये पूछा गया कि वीएचपी का इस मामले में क्या कहना है तो उन्होंने कहा कि आरएसएस से प्रेरित सभी संस्थाएं स्वतंत्र है और अपने विचार व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र हैं.
मोदी के गौ रक्षकों के फर्ज़ी और ग़ुस्से वाले बयान को आनेवाले चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है.
गुजरात में गौ रक्षकों के ज़रिये दलितों पर हमलों के बाद दलित समुदाय नाराज़ है और हिंदूत्व की राजनीति करनेवालों में हिंदू वोटों के बच जाने की डर से चिंता जड़ कर रही है.
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