आग से बचकर मुड़े तो मां-बाप के शव थे

- Author, दिव्या आर्य
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कोल्लम से
बारह साल का किशोर और उनकी बहन 14 साल की कृष्णा के माता-पिता पुत्तिंगल देवी मंदिर के पीछे एक छोटी सी दुकान चलाते थे. दोनों दुकान पर अपने मां-बाप का हाथ बंटाने के लिए गए थे.
दोनों अपने नाना की दुकान से प्लास्टिक के कप लाने गए हुए थे. अचानक उन्होंने धमाके की आवाज़ सुनी और देखा की मंदिर में आग लग गई है. यह देख कर वो भागते हुए अपनी दुकान के पास पहुंचे.
वहां उनके पिता बंसी (43) और माँ बेबी गिरिजा (41) का शरीर पड़ा हुआ था. यह देखकर वो और उनके नाना बेहोश गए. आसपास के लोग उन्हें ऑटो से अस्पताल लेकर गए.
कृष्णा और किशोर की मौसी सुचिता ने बताया कि घटना के बाद से दोनों चुपचाप हैं, एक शब्द भी नहीं बोला है.
बच्चों को दिलासा देते हुए सुचिता बार-बार ख़ुद रो पड़ती हैं. वो कहती हैं, "नाना के ठेले तक ही गए थे और जब वापस मुड़े तो सब ख़त्म हो चुका था."

ग़रीब परिवार के ये दोनों बच्चे खेल में बहुत होशियार हैं. कृष्णा स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया की टीम से खेलती भी हैं.
सुचिता कहती हैं कि उनका परिवार इनकी देखभाल तो करेगा. लेकिन उनके भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है.
मंदिर में आग लगने के 24 घंटे बाद भी दर्जनों शवों की पहचान नहीं हो सकी है. अनीता का भाई उदय कुमार भी उन्हीं में से एक था.
हर साल की तरह इस साल भी वो मंदिर पर होने वाली आतिशबाज़ी देखने पत्नी के साथ गए थे. घायल पत्नी का तो पता चल गया, पर उदय लापता थे.
रविवार को अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद आख़िर सोमवार तड़के पुलिस थाने में उनका फ़ोटो मिला.

अनीता ने बताया, ''भाई बिलकुल पहचान में नहीं आ रहे थे. फिर मैंने उनके पेट पर अपेंडिक्स के ऑपरेशन का निशान देखा, तब समझ गई.''

कोल्लम के एक निजी अस्पताल से शव लाकर स्थानीय रीतियों के मुताबिक़ घर के पिछवाड़े पांच साल के उनके बेटे ने अपने पिता को आग दी.
उदय की तीन साल की बेटी अब भी अपनी घायल मां के साथ अस्पताल में है. जलने के अलावा उनके दोनों हाथ टूट गए हैं.

इन ग़रीब परिवारों के घरों से दूर काशीनाथ की मौत के बाद उनके पोस्टर छापकर मोहल्ले में लगाए गए हैं.
स्थानीय कांग्रेस नेता काशीनाथ अपने कुछ पुलिसिया दोस्तों के साथ आतिशबाज़ी देखने मंदिर गए थे.
आग लगने के बाद जब उनके भाई परफ़ाश मंदिर पहुंचे तो उन्हें काशीनाथ नहीं मिले, चारों और धुआं और जलने की बदबू थी, बत्ती चली गई और शवों के बीच भाई को ढूंढना बहुत मुश्किल था.
आख़िरकार एक पुलिसकर्मी ने बताया कि मंदिर का हिस्सा ढहने से काशीनाथ उसके मलबे के नीचे दब गए थे और उनके शव को सरकारी अस्पताल से घर ले जाया गया है.
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