प्रदूषण पर दिल्ली में रेड अलर्ट क्यों नहीं?

- Author, जस्टिन रॉलैट
- पदनाम, दक्षिण एशिया संवाददाता, बीबीसी
बीते सोमवार को बीजिंग ने वायु प्रदूषण को लेकर रेड अलर्ट जारी किया.
वायु प्रदूषण के लिए कुख्यात इस शहर में यह अब तक का सबसे कड़ा क़दम है और इसका मतलब है कि व्यावहारिक रूप से चीन की राजधानी बंद होना.
कुछ स्कूलों और व्यावसायिक संस्थानों को बंद करने के आदेश दिए गए हैं. निर्माण कार्य सीमित कर दिए गए हैं और कार के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी गई है क्योंकि बीजिंग की हवा बहुत ज़हरीली हो गई है.

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मुझे हैरानी नहीं कि ये क़दम चीन ने उठाए बल्कि हैरान इस बात से हूँ कि दिल्ली में प्रदूषण स्तर बहुत ज़्यादा है. अपने परिवार के साथ मैं इस साल की शुरुआत में यहां आया था.
बीजिंग में सबसे ख़तरनाक़ पीएम2.5 प्रदूषण का स्तर प्रति घन मीटर 237 माइक्रोग्राम था.
अमरीकी दूतावास एयर पॉल्युशन मॉनिटर के मुताबिक़ बीजिंग में इसका सर्वाधिक स्तर 317 था.

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प्रदूषण का यह बहुत अधिक स्तर है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे कैंसर पैदा करने वाले तत्वों के ग्रुप एक में रखा है. यह कैंसर के अलावा दिल की बीमारियां और अन्य घातक बीमारियां पैदा करता है.
आधिकारिक सलाह है कि इतने उच्च स्तरीय प्रदूषण में कोई भी शारीरिक गतिविधि नहीं करनी चाहिए.
जब मैंने यह सुना तो मैंने पिछले हफ़्ते ख़रीदे छोटे प्रदूषण डिटेक्टर को ऑन किया. दिल्ली के मेरे घर में इसके स्क्रीन की रीडिंग थी 378.
इसके बाद मेरे घर के क़रीब मौजूद अमरीकी दूतावास की वेबसाइट पर वायु प्रदूषण का स्तर देखा. वहां भी रीडिंग यही थी.
बाक़ी दिल्ली का तो और बुरा हाल है. भारी यातायात, गंदगी से भरे स्थानीय उद्योग और पूर्वी दिल्ली के इलाक़े में कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों ने प्रदूषण को और बदतर कर दिया है.
एक समय तो एयर पॉल्यूशन डिटेक्टर की रीडिंग 500 तक पहुंच गई.
आइए इन आंकड़ों को क्रम में देखें.

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डब्ल्यूएचओ और यूरोपीय संघ द्वारा पीएम2.5 प्रदूषण का स्तर प्रति घन मीटर 25 माइक्रोग्राम रखा गया है.
अमरीका में यह मानक और कड़ा है. यहां यह सीमा 12 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है.
मतलब यह कि दिल्ली में यह प्रदूषण अमरीकी मानकों से 30 गुना और डब्ल्यूएचओ मानकों से 15 गुना ज़्यादा है.
अगर तुलना करें तो किंग्स कॉलेज के एनवायर्नमेंटल रिसर्च ग्रुप के मुताबिक़ छह दिसंबर को लंदन में पीएम2.5 प्रदूषण का स्तर 8 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था.
इसके अनुसार, लंदन में सर्वाधिक प्रदूषण 2006 में दर्ज किया गया था, जो 112 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था.
बीजिंग पीएम2.5 प्रदूषण डब्ल्यूएचओ मानकों से 10 गुना ज़्यादा था लेकिन मैं यह नहीं कह रहा कि बीजिंग ने इमर्जेंसी घोषित कर कोई ग़लती की है, बल्कि प्रशासन के क़दम सराहनीय हैं.
दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर दिल्ली में जो बात मुझे सबसे अजीब लगी वह यह कि यहां ऐसे क़दम नहीं उठाए गए.
प्रशासन ने प्रदूषण कम करने के लिए कुछ उपायों की घोषणा की है लेकिन बहुतों को लगता है कि ये बेहद मामूली हैं.
हालांकि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यह नहीं मानता.
बोर्ड के अध्यक्ष अश्विनी कुमार ने बीबीसी को बताया, ''प्रदूषण स्तर कम करने के लिए जो किया जा सकता है, हम वो कर रहे हैं. हालांकि प्रदूषण स्तर बहुत अधिक है लेकिन यह अपवाद नहीं है क्योंकि पहले यह इससे भी अधिक था.''

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कुमार ने कहा कि बीजिंग और दिल्ली के प्रदूषण स्तर में सीधे कोई तुलना नहीं करनी चाहिए.
वे कहते हैं, ''चीन के प्रदूषण की प्रकृति दिल्ली से अलग है. उदाहरण के लिए धूल और तट से दिल्ली की दूरी को भी ध्यान में रखना होगा.''
मेरा परिवार ऐसे माहौल में रहने के लिए संघर्ष कर रहा है. हम अपने चार बच्चों के साथ दिल्ली आए थे, तब यहां इतना प्रदूषण नहीं था और अब मैं सर्दियों में प्रदूषण को लेकर चिंतित हूँ.
पिछले हफ़्ते मेरे पांच साल के बेटे विलियम को पहली बार अस्थमा का दौरा आया. अब वह दवा पर है. मैं और मेरी 14 साल की बेटी इवा भी.
मेरी पत्नी और मैं सोच रहे हैं कि दिल्ली में कितने दिन तक रुके रह सकते हैं.
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