मौत की सज़ा बदले की कार्रवाई: मानिक सरकार

मनिक सरकार

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मानिक सरकार का कहना है कि सभ्य समाज में 'मौत की सज़ा बदले से की गई कार्रवाई' नज़र आती है.

हाल ही में त्रिपुरा विधानसभा ने एकमत से एक प्रस्ताव पास करके केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वो आईपीसी की धारा 302 में संशोधन करके मौत की सज़ा को ख़त्म कर दे.

इस विषय पर मानिक सरकार ने बीबीसी से ख़ास बातचीत की.

मानिक सरकार ने बीबीसी से कहा, "आप देखिए, 302 का मतलब क्या है? अगर किसी ने एक व्यक्ति की हत्या कर दी तब उस पर आईपीसी की ये धारा लगाई जाती है. अगर आप उसे मौत की सज़ा देते हैं तो ये अपने आप में विरोधाभास है."

'मौत की सज़ा नहीं होनी चाहिए'

फांसी

उन्होंने कहा, "मेरा प्वाइंट है कि ये सज़ा नहीं दी जानी चाहिए. मैंने विधानसभा में भी यही कहा कि कठोर सज़ा ये हो सकती है कि उसे मृत्यु होने तक जेल में रखा जाए."

"ऐसा अपराध करने वाले व्यक्ति को कुछ गुंजाइश मिल सकती है कि वो दोबारा सोचे, सांत्वना दे सके. दूसरी तरफ़ समाज में ये संदेश जाएगा कि अगर कोई ऐसा अपराध करता है तो उसे इस तरह का दंड भुगतना होगा."

मानिक सरकार मानते हैं कि एक सभ्य समाज में मौत की सज़ा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए.

उन्होंने कहा, "आप देखिए, ये सभ्य समाज है. इस समाज में ऐसा लगता है कि मौत की सज़ा देना बदले की भावना से की गई कार्रवाई है. कोई ये नहीं कह रहा कि जिस व्यक्ति ने दुर्लभ से दुर्लभतम अपराध किया हो उसे क्षमा कर दिया जाए.

"ऐसा कोई नहीं कहेगा. उसे सज़ा मिलनी चाहिए लेकिन फांसी की सज़ा देने के बजाए उसे आख़िरी सांस तक जेल में रखा जा सकता है. नहीं तो ये अपने आप में विरोधाभास होगा."

केंद्र करे फ़ैसला

भारतीय संविधान

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आईपीसी की दफ़ा 302 में संशोधन के सवाल पर मानिक सरकार ने कहा कि ये केंद्र सरकार पर निर्भर करता है.

सरकार ने कहा, "उन्हें अपना मन बनाना होगा. अलग-अलग राजनीतिक दल हैं जिनके प्रतिनिधि संसद में हैं. अगर वो संशोधन करना चाहते हैं तो उन्हें संसद में चर्चा करनी होगी."

"तमाम राजनीतिक दलों ने अब तक इस मुद्दे पर निर्णय नहीं किया है. भारत में कुछ राजनीतिक दल हैं जो इसके ख़ास-ख़ास पहलू पर फ़ैसला कर चुके हैं. अब तो ये भारत सरकार पर निर्भर करता है."

त्रिपुरा विधानसभा में ये प्रस्ताव कांग्रेस विधायक जितेंद्र सरकार ने रखा. प्रस्ताव के ख़िलाफ़ राय रखने वाले एक मात्र विधायक थे कांग्रेस के रतन लाल नाथ.

हालांकि, जितेंद्र सरकार का कहना है कि वो न तो प्रस्ताव के विरोध में थे न ही पक्ष में.

कांग्रेस की राय

कांग्रेस समर्थक

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जितेंद्र सरकार ने कहा, "प्रस्ताव का विरोध करने वाले कांग्रेस विधायक रतन लाल नाथ का कहना है कि इस विषय को लेकर विवाद है. इस मुद्दे को लेकर कई तरह की राय रखी जा रही है. तो उनका कहना है कि वो ना तो इसका समर्थन कर रहे हैं और ना ही विरोध."

मौत की सज़ा ख़त्म करने पर कांग्रेस पार्टी की राय को लेकर पूछे गए सवाल पर जितेंद्र सरकार ने कहा कि उन्हें केंद्रीय कार्यकारिणी के बारे में जानकारी नहीं है लेकिन प्रदेश इकाई इसे हटाने के पक्ष में है.

उन्होंने कहा, "कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता समेत प्रदेश इकाई की राय है कि 302 को बरक़रार रखना बुद्धिमानी नहीं है और इसे हटा देना चाहिए."

जितेंद्र सरकार का कहना है कि मौत की सज़ा के बजाए मौत होने तक कठोर कारावास की सज़ा होनी चाहिए.

(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत के आधार पर)

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