गुरदासपुर: 'क्या पता था कि पापा कभी नहीं लौटेंगे'

इमेज स्रोत, Salman Raavi
- Author, सलमान रावी,
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, गुरदासपुर से
पंजाब के गुरदासपुर में दीनानगर के लोग अब भी चरपमंथी हमले की दहशत से उबर नहीं पाए हैं.
वहीं कल मंगलवार को गुरदासपुर में ख़ौफ और मातम के माहौल के बीच हमले में मारे गए होमगार्ड के जवान देशराज को अंतिम विदाई दी गई.
कतारबद्ध होकर पुलिस और अर्ध-सैनिक बल के जवानों ने बिगुल की ध्वनि पर अपने हथियारों को झुकाया. देशराज दीनानगर हमले के वक़्त थाने में अकेले थे.
दीनानगर थाने से महज़ कुछ ही दूरी पर उनके गाँव जंगला बूआनी में उनके अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम थीं.

इमेज स्रोत, Salman Raavi
उनकी बेटी अलका सुबकियाँ लेते हुए बताती हैं कि उनके पापा रात की ड्यूटी के लिए गए थे. सुबह वो घर लौटने वाले थे मगर किसी को पता न था कि वो कभी वापस नहीं लौटेंगे.
अलका और परिवार के लोगों तक हमले की खबर पड़ोस की भाभी लेकर आईं जिन्होंने टीवी के चैनलों पर इसे देखा.

इमेज स्रोत, Salman Raavi
अलका कहती हैं, "हमले की ख़बर मिलते ही हमने पापा के मोबाइल पर कॉल किया. मगर उनका फ़ोन बजता रहा. हम सब चिंतित हो गए. फिर मेरा छोटा भाई थाने गया. मगर वहां तो जमकर मुठभेड़ चल रही थी. आखिरकार शाम में हमें पापा के मारे जाने की ख़बर मिली."
'पाकिस्तान से आए थे'

इमेज स्रोत, Salman Raavi
इस बीच पंजाब पुलिस का दावा है कि गुरदासपुर के दीनानगर थाने पर हुए चरमपंथी हमले में शामिल तीनों हमलावर पकिस्तान से आए थे.
राज्य पुलिस के महानिदेशक सुमेध सिंह सैनी के अनुसार ये जानकारी ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम (जीपीएस) यंत्रों से मिली है जो चरमपंथियों के पास से बरामद किए गए हैं.
सैनी का कहना था कि पहले हमलावरों ने रेल की पटरियों पर बम लगाया, फिर कार का अपहरण किया और तब उन्होंने थाने पर हमला किया.
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है कि हमलवार एक हफ़्ते पहले से ही गुरदासपुर में मौजूद रहे हों.
वहीं दीनानगर थाने में मौजूद फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के विशेषज्ञों ने हमले में इस्तेमाल किए गए हथियारों की जांच की है.
जारी है जांच

इमेज स्रोत, EPA
गुरदासपुर के सीनियर एसपी गुरप्रीत सिंह ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच में लगी हुईं हैं कि चरमपंथी दीनानगर कैसे पहुंचे.
हालांकि अभी तक मारे गए चरमपंथियों की शिनाख़्त नहीं हो पाई है मगर उनके पास से बरामद जीपीएस यंत्रों की जांच से उनकी आमद के कुछ सबूत मिल रहे हैं.
पंजाब में लंबे समय बाद हुए चरमपंथी हमले ने सबको सकते में डाल दिया है.
घटना से दहशत तो है ही मगर इस हमले से आम लोगों और पुलिस के जवानों के मारे जाने से पूरे सूबे में ग़म का माहौल है.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












