जातीय जनगणना के आंकड़े जारी हों: लालू

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- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने जातीय जनगणना के आंकड़े जारी करने की मांग के साथ सोमवार को पटना में राजभवन की तरफ़ मार्च किया.
खुली जीप में निकले लालू यादव ने केंद्र की मोदी सरकार पर फिर वादा ख़िलाफ़ी करने का आरोप लगाया.
चार महीनों के दौरान लालू दूसरी बार केंद्र की नरेंद्र मादी सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे हैं.
लालू यादव ने इस मौक़े पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए इन आकडों को बेहद अहम बताया.

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जानकारों का मानना है कि जाति आधारित जनगणना के आंकड़े जारी होने का सीधा फायदा लालू और गठबंधन को चुनावों में हो सकता है.
आंदोलन की धमकी
पटना के गांधी मैदान के पास स्थित जेपी गोलंबर से यह मार्च दोपहर 12 बजे शुरू हुआ पर प्रशासन ने मार्च को राजभवन तक नहीं जाने दिया.
इस कारण से बीच रास्ते में ही लालू ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित किया.
उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद दलित-आदिवासी-पिछड़ों को सरकारी नौकरियां में मिल रहा आरक्षण दोगुने से ज्यादा हो जाएगा.

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उन्होंने कहा, "25 जुलाई को मोदी जी आ रहे हैं. उनकी बात सुन लेते हैं. हो सकता है आंकड़ा निकल जाए."
उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो बिहार में आंदोलन किया जाएगा.
सियासी लाभ?
पटना स्थित एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल स्टडीज के निदेशक डाक्टर डीएम दिवाकर के मुताबिक इस जनगणना से आर्थिक स्थिति को मापने का सबसे विश्वसनीय आंकड़ा सामने आ सकता है.

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लेकिन इसे जारी नहीं करने के संबंध में उनका कहना है, ‘‘शायद केंद्र सरकार को आशंका है कि अगर ग़रीबी के जातिवार आंकड़े सामने आए तो निचली जातियों में सबसे ज़्यादा लोग कमज़ोर और गरीब होंगे. इसका तथ्यगत आधार भी है."
उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के कारण लालू-नीतीश के नेतृत्व वाले गबंधन को बिहार चुनाव में शायद फ़ायदा हो सकता है.
आरजेडी मुखिया लालू यादव ने कहा कि बिहार का आगामी बिहार चुनाव मंडल बनाम कमंडल होगा.
इस पर भारतीय जनता पार्टी के बिहार अध्यक्ष मंगल पांडेय ने कहा, ‘‘लालू अब भी बिहार को पुराने चश्मे से देखते हैं. लेकिन अब भाजपा के पास मंडल और कमंडल दोनों है. ऐसे में लालू और नीतीश बौखलाहट में हैं. बिहार अब पुराने दौर में लौटने को कतई तैयार नहीं है.’’
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