ओडिशा के पूर्व सीएम जेबी पटनायक का निधन

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- Author, संदीप साहू
- पदनाम, भुवनेश्वर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और असम के पूर्व राज्यपाल जानकी बल्लभ पटनायक का सोमवार देर रात निधन हो गया. वो 89 वर्ष के थे.
तीन जनवरी 1927 में जन्मे पटनायक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे और ओडिशा के तीन बार मुख्यमंत्री रहे.
वर्ष 1980 में पहली बार मुख्यमंत्री बने और 1989 तक वो लगातार दो बार मुख्यमंत्री रहे.
तीसरी बार 1995 में वो प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, लेकिन ग्राहम स्टेंस की हत्या और अंजना मिश्रा गैंग रेप मामले को लेकर 1999 में उन्हें पद से हटना पड़ा.
वर्तमान मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के बाद राज्य में सबसे अधिक समय तक यानी 14 सालों तक वो मुख्यमंत्री रहे.
राजनीति

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वर्ष 2009 में वो असम के राज्यपाल नियुक्त हुए और कुछ महीने पहले ही उनका कार्यकाल पूरा हुआ था और भुवनेश्वर लौट आए थे.
वापस आने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में आने के संकेत दिए थे, लेकिन वो राजनीति से दूर ही रहे.
मोदी सरकार के आने के बाद वो चंद ऐसे राज्यपालों में से एक रहे, जिनका कार्यकाल नई सरकार ने पूरा होने दिया.
राजनेता होने के अलावा वो साहित्यकार भी थे. उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए किया.
वो संस्कृत के विद्वान थे और कई किताबें भी लिखी हैं.
साहित्य में रुचि

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पटनायक को बंकिम चंद्र चटोपाध्याय के उपन्यास का उड़िया में अनुवाद करने के लिए 2001 में केंद्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था. भर्तृहरि की संस्कृत सूक्तियों का उड़िया में 'बैराग्य शतक' के नाम से अनुवाद किया था, इसके लिए 1996 में उन्हें ओडिशा साहित्य अकादमी अवार्ड भी दिया गया था.
इसके अलावा, उन्होंने रामायण, महाभारत, गीता का भी उड़िया अनुवाद किया था. उनकी चर्चित किताबों में 'सिंधु उपत्यका' और 'गौतम बुद्ध' शामिल है.
उनकी पत्नी जयंती पटनायक भी राजनीति में रही हैं. वो कटक संसदीय क्षेत्र से तीन बार लोकसभा की सदस्य रह चुकी हैं.
जेबी पटनायक के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा एक लड़का और दो बेटियां हैं.
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