भारत में ताज़िया निकालने में सुन्नी भी आगे

- Author, शकील अख़्तर
- पदनाम, बीबीसी उर्दू संवाददाता, दिल्ली
मोहर्रम का त्यौहार और ताज़ियादारी की परंपरा आमतौर पर शिया मुसलमानों से जोड़कर देखी जाती है.
लेकिन, भारत में ताज़िए रखने की रवायत में सुन्नी भी काफ़ी आगे हैं. ताज़ियादारी के विरोध के बावजूद सुन्नियों की ताज़ियादारी की परंपरा पूरी तरह बनी हुई है.
लखनऊ से 200 किलोमीटर दूर टांडा कस्बा अपने ताज़ियों के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. यहां सौ से ज्य़ादा ताज़िए निकलते हैं.
स्थानीय ताज़ियादार मुमताज अहमद कहते हैं, “यहां तो यह सौ फ़ीसदी सुन्नियों की परंपरा है.”
विरोध में आंदोलन
कुछ अर्से से तबलीज़ी जमात और देवबंदी विचारधारा के कुछ धार्मिक संगठनों ने ताज़ियादारी के विरुद्ध आंदोलन चला रखा है.

फ़ैज़ाबाद की नूर फ़ातिमा ताज़िया बनाती रही हैं.
उनका कहना है, “बहुत से मौलाना लोग रोक रहे हैं. यह उनकी सोच है. जिनको ताज़िया रखना है, वह रख रहे हैं और सुन्नियों में उनकी संख्या बढ़ रही है.”
इमाम हुसैन और हसन की याद में मोहर्रम में ताज़िया रखने की परंपरा सदियों पुरानी है और इसको आगे बढ़ाने में सूफी संतों और दरगाहों का महत्वपूर्ण किरदार रहा है.
सूफी पंथ के एक ताज़ियादार मोहम्मद कासिम कहते हैं, “मुझे पंथों के मतभेदों से क्या लेना देना! मैं तो आस्था के साथ ताज़िया रखता हूं और मुझे रूहानी सुकून मिलता है.”
परंपरा पर असर

मोहर्रम की दसवीं तारीख़ यानी “यौम ए आशुरा” के मौक़े पर पूरे भारत में हर जगह ताज़िए जुलूस के रूप में निकलते हैं.
लखनऊ के बुद्धिजीवी शकील सिद्दीक़ी कहते हैं, “बदलते समय और ताज़ियादारी के ख़िलाफ़ आंदोलन से कुछ स्थानों पर ताज़ियादारी की सुन्नियों की परंपरा पर ज़रूर असर पड़ा है, लेकिन यह परंपरा कमोबेश अपनी जगह पर बनी हुई है.”
ताज़िया बनाना एक कला है और प्रायः स्थानीय लोग इसे मिल-जुलकर बनाते हैं.
सांस्कृतिक विरासत

भारत में ताज़ियादारी एक धार्मिक परंपरा ही नहीं, सदियों से चली आ रही स्थानीय सांस्कृतिक विरासत भी है.
और यहां के लोगों ने पंथ से जुड़े मतभेदों से ऊपर उठकर पूरी आध्यात्मिक आस्था के साथ इस परंपरा को निभा रखा है.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












