कोयला खदान आवंटन के लिए अध्यादेश

केंद्र सरकार कोयला खदानों के फिर से आवंटन के लिए अध्यादेश लाई है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने 218 में से 214 कोयला खदानों का आवंटन रद्द कर दिया था.
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार के फ़ैसले के बारे में बताते हुए कहा कि सीमेंट, स्टील और ऊर्जा के क्षेत्र में ईंधन की सख़्त ज़रूरत है और इसी वजह से सरकार यह अध्यादेश लाई है.
उनके अनुसार सरकारी क्षेत्र की कंपनियों को प्राथमिकता के आधार पर कोयला खदानों का आवंटन किया जाएगा. इनमें एनटीपीसी जैसे केंद्र सरकार के अधीन संस्थानों के अलावा राज्य सरकारों के बिजली बोर्ड भी शामिल हैं.
इसके अलावा निजी क्षेत्र की सीमेंट, स्टील और ऊर्जा कंपनियों के लिए पर्याप्त और उचित संख्या में कोयला खदानें रखी जाएंगी और ज़रूरत के अनुसार उनका आवंटन होगा.
आमदनी राज्यों की

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वित्त मंत्री ने बताया कि निजी कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय एक निश्चित लेवी देनी होगी.
निजी क्षेत्र को कोयला खदानों का आवंटन ई-ऑक्शन के ज़रिए होगा. सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और 3-4 महीने में पूरी हो जाएगी.
जेटली ने कहा कि इससे होने वाली सारी आय उस राज्य सरकार को मिलेगी जिसमें खदान मौजूद है. केंद्र सरकार इसमें से कुछ नहीं लेगी.

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उन्होंने कहा कि ज़्यादातर कोयला खदानें पूर्वी भारत में है. इसलिए बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल के अलावा मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र को भी इसका फ़ायदा मिलेगा.
वित्त मंत्री ने कहा कि इससे रुकी हुई पूंजी प्रवाह में आएगी और निर्माण क्षेत्र को फ़ायदा मिलेगा.
उन्होंने कहा कि इससे कोल इंडिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा. वह इसी तरह काम करती रहेगी और भविष्य में उसके हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा.
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