वाइ-फाई से लैस गुजरात का मॉडल विलेज़

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- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, अहमदाबाद से
गुजरात मॉडल की इतनी चर्चा के बाद भी ये बहस कभी रुकी नहीं कि <link type="page"><caption> यह मॉडल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/04/140418_india_bol_gujrat_model_sdp.shtml" platform="highweb"/></link> है क्या लेकिन अहमदाबाद से कुछ ही दूरी पर स्थित एक गांव मॉडल विलेज का नमूना बन गया है.
इसे मॉडल विलेज बनाने का काम नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्रित्व काल में ही शुरू हुआ था.
भारतीय गांवों की मान्य तस्वीर के उलट यहां बिजली, स्वच्छ पेय जल, पानी की निकासी आदि की पूरी व्यवस्था है.
गांव के प्राइमरी स्कूलों में कम्प्यूटर है और पूरे गांव में वाईफ़ाई की सुविधा है.
पढ़ें ये रिपोर्ट विस्तार से
जब आप भारत के किसी गाँव की कल्पना करते हैं तो आम तौर पर क्या सोचते हैं: कच्चे मकान, तंग और गंदी गलियां, नाली, पानी और बिजली की सुविधाओं का न होना.
लेकिन गुजरात में पुनसारी गाँव में शहर की सभी <link type="page"><caption> सुविधाएं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/04/140414_gujrat_model_gurcharan_das_rd.shtml" platform="highweb"/></link> हैं, हालांकि रूप गाँव का ही है. देश का पहला ऐसा गाँव अहमदाबाद से 90 किलोमीटर की दूरी पर है, जिसे मॉडल विलेज (गाँव) कहा जा रहा है.

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इस गाँव के सरपंच हिमांशु पटेल कहते हैं छह हज़ार की आबादी वाले उनके गाँव के हर घर में बिजली और पानी की सुविधा है. यहाँ पानी के निकासी की व्यवस्था भी है.
यहाँ पीने के मिनरल वॉटर (पानी) का भी अलग से इंतज़ाम है. इसके इलावा ये एक स्मार्ट विलेज भी है.
वाई-फाई और सीसीटीवी

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पटेल कहते हैं, "पूरे गाँव में वाई-फाई है, सीसीटीवी कैमरे जगह-जगह पर लगे हैं." गाँव की गतिविधियों को हिमांशु अपने दफ़्तर के एक बड़े स्क्रीन पर भी देख सकते हैं और अपने स्मार्टफोन के स्क्रीन पर भी.
यहाँ लाउडस्पीकर्स भी लगे हैं. मुझसे पहले गाँव की सुविधाओं का जायज़ा लेने तमिलनाडु के मुख्य सचिव भी आए थे, जिसका प्रसारण पटेल ने अपने दफ़्तर में बैठकर किया.

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पूरे गाँव में जगह-जगह पर 150 लाउडस्पीकर्स लगे हैं, इनसे सरपंच की घोषणा लोगों तक पहुँचाने में मदद मिलती है.
स्मार्ट विलेज के सरपंच पटेल भी स्मार्ट हैं. उनके पास आइफोन 5 है, जिसके स्क्रीन पर गाँव की सुविधाओं की सूचना से संबंधित अप्लिकेशन्स हैं.
इसे मॉडल विलेज इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ के दो प्राइमरी स्कूल भी स्मार्ट स्कूल हैं. हिमांशु अपने दफ्तर के अंदर एक बड़े स्क्रीन पर इस सरकारी स्कूल को भी मॉनिटर कर रहे थे.
स्मार्ट स्कूल

इसके बाद गर्व से वह इस स्कूल की लाइव तस्वीरों को अपने फ़ोन की स्क्रीन पर भी दिखाते हैं.
स्कूल की प्रिंसिपल भगवत बहन पटेल बताती हैं कि ये स्मार्ट <link type="page"><caption> स्कूल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/08/140822_jharkhand_school_no_books_aa.shtml" platform="highweb"/></link> क्यों है, ''यहाँ कोई विद्यार्थी बीच में पढ़ाई नहीं छोड़ता और यहाँ परीक्षाओं के नतीजे सबसे अच्छे होते हैं."
ये स्मार्ट स्कूल इसलिए भी है क्योंकि यहाँ छोटे बच्चों को कंप्यूटर ऑपरेट करने की ट्रेनिंग दी जाती है.

एक बच्चे ने मुझे इसका इस्तेमाल करके ये बताना चाहा कि कंप्यूटर के इस्तेमाल में वह माहिर है.
इस लड़के की कक्षा में 15 विद्यार्थी थे और कंप्यूटरों की संख्या भी लगभग उतनी ही थी. ऐसा मैंने किसी गाँव के स्कूल में पहले कभी नहीं देखा.
सरपंच कहते हैं, ''सन् 2006 में उस समय के मुख्यमंत्री और अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में इस गाँव को स्मार्ट विलेज बनाने का काम शुरू हुआ था.''
पलायन रुका

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अब तक इसे स्मार्ट बनाने में कितने पैसे खर्च किए गए हैं? हिमांशु कहते हैं, ''वर्ष 2006 से 2012 तक सभी योजनाओं में 14 करोड़ रुपए खर्च आए और ये सभी पैसे राज्य और केंद्रीय सरकारों की ग्रामीण योजनाओं से आए."
इस गाँव ने ये साबित कर दिया है कि सरकारी योजनाओं के सही इस्तेमाल से देश के दूसरे गाँव भी प्रगति कर सकते हैं. मॉडल या स्मार्ट गाँव बन सकते हैं.

पुनसी स्मार्ट विलेज का उद्देश्य था गाँव से रोज़ी रोटी के लिए <link type="page"><caption> शहरों को जाने के सिलसिले</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/08/140825_bihar_labour_migration_tk.shtml" platform="highweb"/></link> को रोकना.
हिमांशु कहते हैं, ''अब तो लोग गाँव को वापस लौट रहे हैं. अब तक 20 परिवार मुंबई से वापस गाँव लौट चुके हैं.''
अब जिस तरह से केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने इस गाँव में दिलचस्पी दिखाई है उससे ये उम्मीद बंधी है कि देश भर में स्मार्ट गाँवों की संख्या बढ़ेगी.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindin" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












