इमेज कैप्शन, विनायक सेन फ़िलहाल ज़मानत पर रिहा हैं.
विनायक सेन मामलाः तारीख़ों में
6 मई 2007- पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के बीड़ी पत्ता के व्यापारी पीयूष गुहा ऊर्फ़ बुबून गुहा को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से पुलिस ने माओवादी पत्रिकाएं, माओवादियों को लिखी गई तीन चिट्ठी और 49 हज़ार रुपये के साथ गिरफ़्तार किया. पुलिस का आरोप था कि तीनों चिट्ठियां डॉक्टर विनायक सेन ने माओवादियों तक पहुंचाने के लिए पीयूष को दी थीं.
14 मई 2007- विनायक सेन माओवादियों के लिए कूरियर का काम करने के आरोप में बिलासपुर में गिरफ़्तार.
15 मई 2007- विनायक सेन की ज़मानत याचिका नामंज़ूर, न्यायिक हिरासत में जेल भेजे गए.
18 मई 2007-स्थानीय अदालत द्वारा विनायक सेन के घर की तलाशी के आदेश.
22 मई 2007- स्थानीय अदालत द्वारा विनायक सेन के घर से ज़ब्त कंप्यूटर की छानबीन का आदेश.
25 मई 2007- विनायक सेन की ज़मानत याचिका ख़ारिज और पांच जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया.
3 अगस्त 2007- छत्तीसगढ़ विशेष सार्वजनिक सुरक्षा क़ानून और अवैध गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत विनायक सेन के ख़िलाफ़ स्थानीय अदालत में आरोप पत्र पेश.
10 दिसंबर 2007- विनायक सेन की ज़मानत याचिका सुप्रीम कोर्ट से भी नामंज़ूर.
30 मई 2008- विनायक सेन के ख़िलाफ़ अदालत में ट्रायल शुरु.
11 अगस्त 2008- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में ज़मानत याचिका दायर.
14 अगस्त 2008- ज़मानत याचिका पर पहली सुनवाई.
2 दिसंबर 2008- पूर्व में ज़मानत नामंज़ूर होने के बाद से नई ज़मानत याचिका दायर करने तक कोई भी नया तथ्य और हालात नहीं होने के आधार पर ज़मानत याचिका ख़ारिज.
3 दिसंबर 2008- पुलिस द्वारा पूरक आरोप पत्र दाख़िल और 47 गवाहों की सूची पेश.
4 मई 2009- सुप्रीम कोर्ट द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार को दो सप्ताह में विनायक सेन की गिरफ़्तारी के लिए जवाब पेश करने और विनायक सेन के ह्रदय रोग से संबंधित होने को मद्देनज़र रखते हुए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के आदेश.
25 मई 2009- सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मार्कंडेय काटजू और जस्टिस दीपक वर्मा द्वारा विनायक सेन को ज़मानत पर रिहा करने के आदेश.
इस दौरान स्थानीय अदालत में ट्रायल जारी
28 सितंबर 2010- स्थानीय अदालत में सरकारी गवाहों की सुनवाई पूरी.
25 नवंबर 2010- विनायक सेन के वकील की ओर से 12 गवाह और दस्तावेज़ प्रस्तुत.
24 दिसंबर 2010- रायपुर सेसन कोर्ट के जज बीपी वर्मा द्वारा विनायक सेन दोषी क़रार और भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए और 120 बी तथा छत्तीसगढ़ विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम समेत दूसरी धाराओं में आजीवन कारावास की सज़ा.
5 जनवरी 2011- अपनी सज़ा के ख़िलाफ़ विनायक सेन द्वारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका पेश.
24 जनवरी, 2011- विनायक सेन की ज़मानत याचिका पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में सुनवाई.
10 फरवरी, 2011- न्यायमूर्ति टीपी शर्मा और न्यायमूर्ति आरएल झानवार द्वारा विनायक सेन की ज़मानत याचिका ख़ारिज.
11 अप्रैल, 2011- सर्वोच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति एचएस बेदी और न्यायमूर्ति सीके प्रसाद की अध्यक्षता वाली खण्डपीठ ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अपनी दलील पेश करने के लिए और समय मांगने पर सुनवाई स्थगित.
15 अप्रैल, 2011- सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विनायक सेन को ज़मानत.