'मोदी और प्रधानमंत्री…सिर्फ अफ़वाह है’

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- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, देवबंद से
विख्यात धार्मिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद के एक वरिष्ठ मुफ़्ती ने कहा है कि नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना इतना आसान नहीं और ये सिर्फ़ एक अफ़वाह है.
दारुल उलूम देओबंद के अरबी विभागाध्यक्ष मुफ़्ती अशरफ़ अब्बास क़ासमी ने बीबीसी से यहां तक कहा कि ये बात शायद जानबूझ कर उड़ाई जा रही है.
उन्होंने कहा, " हमें इत्मीनान रखना चाहिए कि मोदी प्रधानमंत्री बनने नहीं जा रहे हैं. ये एक अफ़वाह है जो उड़ाई जा रही है, जिससे न भी बनने वाले हों तो बन जाएं".
दारुल उलूम देवबंद के भीतर स्थित एक विशालकाय मदरसे में बैठकर मुफ़्ती अशरफ़ अब्बास क़ासमी ने कांग्रेस पार्टी से लेकर उत्तर प्रदेश की मौजूदा समाजवादी पार्टी सरकार पर खुलकर विचार रखे. लगभग सभी सवालों का बेबाकी से जवाब दिया.
यह पूछे जाने पर कि अगर कहीं मोदी प्रधानमंत्री बन ही जाते हैं तो मुसलमान इसे कैसे देखेंगे, उन्होंने कहा, "उस सूरत में भी चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है."

उन्होंने कहा, "अगर ऐसा हुआ भी तो मुसलमानों की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं होगी. मौजूदा हुकूमत से ही मुसलमानों को कौन सी बहुत मदद मिली है.मुसलमान कई तरह के मामलों से जूझ रहे हैं. उन्हें ऐसे हालात में भी जीना आता है".
''नहीं भूला सकेंगे"
मुफ़्ती अशरफ़ अब्बास क़ासमी ने साफ़ कहा, ''गुजरात सांप्रदायिक दंगों के लिए मुसलमान शायद ही कभी नरेंद्र मोदी को भुला सकेंगे.''
मैंने जब उन्हें छह महीने पहले उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर सांप्रदायिक हिंसा की बात याद दिलाते हुए पूछा, ''क्या वह अखिलेश यादव सरकार से भी उतने ही नाराज़ हैं?" तो मुफ़्ती साहब थोड़े असहज दिखे.
उन्होंने कहा, "देखिए, दोनों में फ़र्क़ है. लेकिन ये साफ़ है कि मुज़फ़्फ़रनगर में भी प्रशासन पूरी तरह से नाकाम रहा. मुसलमान ज़रूर समझ रहे हैं कि प्रदेश सरकार को जिस तरह हिंसा से निपटना चाहिए था वैसा नहीं हुआ. अखिलेश यादव सरकार के ख़िलाफ़ भी ग़म और ग़ुस्सा है. लेकिन इसकी तुलना मोदी से करना ग़लत होगा".
''परेशानियां बढ़ी हैं''

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मुफ़्ती अशरफ़ अब्बास क़ासमी ने इसी विशेष इंटरव्यू में ये भी कहा कि पिछले 10 वर्षों से केंद्र में आसीन रही कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मुसलमानों की परेशानियां बढ़ी हैं.
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने के सवाल पर कोई ठोस जवाब तो नहीं दिया लेकिन यहां तक कहा, "हम ये ज़रूर चाहेंगे कि अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनते हैं तो ये अच्छा रहेगा. शायद वह मुल्क को आगे भी ले जाएंगे".
हालांकि मुफ़्ती अशरफ़ अब्बास क़ासमी ने ज़ोर दिया कि भारत में सबसे बड़ी दिक़्क़त भ्रष्टाचार की है, जिससे पार पाने के लिए सही तरह से इंसानियत के आधार वाली तालीम दिए जाने की ज़रूरत है.
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