भारत से लेकर पाकिस्तान तक छाए केजरीवाल

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- Author, अशोक कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
पाकिस्तान के उर्दू मीडिया में जहां हमलों के बीच तालिबान से बातचीत की प्रक्रिया में रुकावट आने की आशंकाएं दिख रही हैं, वहीं भारत में संसद में मिर्च स्प्रे छिड़के जाने से लेकर अरविंद केजरीवाल का इस्तीफ़ा और नरेंद्र मोदी से अमरीकी राजदूत की मुलाक़ात से जुड़ी खबरें छाई रहीं.
बीते दिनों भाजपा नेता नरेंद्र मोदी से अमरीकी राजदूत नैंसी पॉवेल की मुलाक़ात पर राष्ट्रीय सहारा का संपादकीय है - 'नरेंद्र मोदी और अमरीकी वीज़ा'.
अख़बार कहता है कि गुजरात दंगों के कारण मोदी से कई साल तक दूरी बनाए रखने वाले अमरीका की कथनी और करनी का कोई ऐतबार नहीं है. और ये बात पहले कई बार साबित हो चुकी है.
राष्ट्रीय सहारा के अनुसार इस मुलाक़ात से मोदी समर्थक ख़ुश हैं लेकिन इस हक़ीक़त को अनदेखा नहीं किया जा सकता है कि अमरीका ने बदतरीन और ज़ालिम शासकों से कभी हाथ मिलाने से कभी कोई गुरेज़ नहीं किया है.
मनहूस दिन
हमारा समाज की राय में संसद में काली मिर्च का स्प्रे छिड़के जाने के कारण 13 फ़रवरी भारतीय राजनीति का मनहूस दिन है.

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अख़बार लिखता है कि सांसदों के बीच भी ऐसे लोग भी आ गए हैं जिनका सरोकार राजनीति से कम और निर्धारित मूल्यों की धज्जियां उड़ाने से कहीं ज़्यादा दिखाई पड़ता है.
हिंदोस्तान एक्सप्रेस ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार के इस्तीफ़े को अपने संपादकीय का विषय बनाया है.
अख़बार कहता है कि जनलोकपाल के मुद्दे पर केजरीवाल की सरकार का यूं जाना अफ़सोसनाक है क्योंकि दिल्ली के लोगों की आंखों में जो रोशनी के चिराग़ जले थे वो बुझ गए हैं.
अख़बार ने मौजूदा राजनीति को आप के लिए संभावनाओं का खेल बताते हुए लिखा है कि हो सकता दिल्ली में फिर उसकी सरकार बन जाए या फिर केंद्र की सत्ता उसके हाथ आ जाए.
कौन ज़िम्मेदार
रुख़ पाकिस्तान का करें तो वहां भी केजरीवाल ख़बरों में रहे.
औसाफ़ के पहले पन्ने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस्तीफ़े की ख़बर को फोटो के साथ छापा गया है, जबकि दैनिक पाकिस्तान ने इससे जुड़ी ख़बर में विश्लेषकों की इस राय को भी जगह दी है कि दिल्ली राष्ट्रपति शासन की तरफ बढ़ रही है.
इसके अलावा जंग ने तालिबान और सरकार की बातचीत को अपने संपादकीय का विषय बनाया है.
अख़बार लिखता है कि यूं तो ये बातचीत कई नागवार घटनाओं के बावजूद आगे बढ़ रही है, लेकिन कराची में पिछले दिनों पुलिस की बस को जिस तरह 25 किलो बारूद से उड़ाया गया वो बातचीत के लिए धक्का है.
जंग के अनुसार इसकी जिम्मेदारी तालिबान ने क़बूली भी कर ली और सवाबी और पेशावर में अपने साथियों को निशाना बनाए जाने का हवाला दिया है.
अख़बार के अनुसार तालिबान और सरकार, दोनों के समझना होगा कि इस वक्त शांति ही वो तोहफ़ा है जो जनता को दिया जा सकता है इसलिए जरूरत है कि सब्र और संयम से आगे बढ़ा जाए.
औसाफ़ ने लिखा है - दो दिन के अंदर कराची को दूसरी बार निशाना बनाया गया है ऐसे में बातचीत को कौन नाकाम बना रहा है तालिबान या फिर विदेशी ताकतें.
यू आर माई वेलेंटाइन
नवाए वक्त का संपादकीय है- क्या अफ़गानिस्तान 'वांछित दहशतगर्द पाकिस्तान के हवाले करेगा'.
अख़बार ने अंकारा में तुर्की की मध्यस्थता में अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के नेताओं की बैठक का ज़िक्र करते हुए लिखा है कि पाकिस्तान में चरमपंथ की वजह अफ़ग़ानिस्तान और वहां तालिबान सरकार को हमलों के ज़रिए ख़त्म करने की अमरीकी रणनीति है.

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अख़बार के मुताबिक इसी के ख़िलाफ़ तालिबान ने संघर्ष छेड़ा और पाकिस्तान को एक मोर्चे की तरह इस्तेमाल किया. बाद में यही पाकिस्तान में अशांति की वजह बना.
दोनों देशों के बीच भरोसा कायम करने के लिए अख़बार कहता है कि अफ़ग़ानिस्तान को वो चरमपंथी पाकिस्तान को सौंप देने चाहिए जो उसे निशाना बना रहे हैं.
खबरें ने कराची में हिंसक तत्वों के ख़िलाफ़ ऑपरेशन जारी रखने पर संपादकीय लिखा है. अख़बार के मुताबिक जब तक कराची में एक एक खुराफ़ाती को पकड़ नहीं लिया जाएगा, इस शहर को उसकी रोशनियां नहीं लौटाई जा सकती है.
और आख़िर में दैनिक इंसाफ़ में पहले पन्ने पर एक कार्टून छपा जिसमें तंग हाल पाकिस्तान के वित्त मंत्री को इसाक डार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अधिकारी से लिपटते हुए दिखाया गया है, और वो कह रहे हैं – यू आर माई वेलेंटाइन.
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