अब गूगल कराएगा ताजमहल का ऑनलाइन दीदार

इमेज स्रोत, Getty
- Author, शिल्पा कन्नन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
आज वैलेंटाइन्स डे है और आप में से कई लोग अपने साथी के साथ शाम की रुमानियत का लुफ्त उठाने के लिए घर से बाहर जाने का इरादा रखते होंगे.
और अगर आप अपने साथी को दुनिया में किसी के प्यार की बेमिसाल निशानी के तौर पर माने जाने वाले ताजमहल ले जाना चाह रहे हों तो क्या करेंगे?
आपके पास बस, ट्रेन या हवाई जहाज का विकल्प हो सकता है लेकिन जल्द ही आप ताजमहल की सैर वर्चुअल दुनिया में ऑनलाइन भी कर सकेंगे. ये गूगल की ख़ास पेशकश है.
<link type="page"><caption> (ताजमहल और चाँदनी रात)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/05/120503_taj_eco_tourism_ar.shtml" platform="highweb"/></link>
भारत के संस्कृति मंत्रालय के साथ मिलकर गूगल ताजमहल सहित देश के 99 अन्य ऐतिहासिक महत्व की जगहों की मैपिंग कर रहा है ताकि इंटरनेट यूजर ऑनलाइन जाकर ताजमहल के आस पास की इमारतों से लेकर इसकी एक-एक दीवार तक से रूबरू हो सकते हैं.
ताजमहल कई लिहाज से ख़ास है. दुनिया भर में इसे शोहरत हासिल है.
हर साल लाखों लोग इसे देखने आते हैं लेकिन कई ऐसे भी हैं जिन्होंने ताजमहल केवल फ़िल्मों और तस्वीरों में देखा है.
गूगल और भारतीय संस्कृति मंत्रालय की कोशिश है लोग ताजमहल के दीदार का लुफ्त ऑनलाइन भी उठा सकें. बीबीसी ने आगरा में गूगल की इस परियोजना का जायजा लिया.
तकनीकी जुगलबंदी

कहते हैं कि सहर की धूप में ताजमहल और भी अधिक हसीन लगता है और यमुना नदी के किनारे जब सूरज ढल रहा होता है तो सफ़ेद संगमरमर की ये आलीशान इमारत दुनिया भर के चाहने वालों की दास्तान यहाँ की फिज़ा में घुल सी जाती है.
इस इमारत की उम्र कोई 360 साल की हुई होगी और अब ताजमहल 21वीं सदी की तकनीक के साथ जुगलबंदी करने जा रहा है.
<link type="page"><caption> (आगरा का पेठा)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2010/05/100524_petha_agra_mb.shtml" platform="highweb"/></link>
21वीं सदी की इस तकनीक का नाम गूगल ट्रेकर है. ये एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसमें ताजमहल के वीडियो फुटेज इकट्ठा की जा रही है ताकि इसे जल्द ही ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा सके. गूगल ट्रेकर का इस्तेमाल पहले भी ग्रांड कैनन और दुनिया की सबसे ऊँची इमारत बुर्ज खलीफा के ऑनलाइन संस्करण तैयार करने में किया जा चुका है.
लेकिन सवाल उठता है कि क्या भारत में गूगल इस तरह की कोशिश पहली बार कर रहा है? साल 2011 में गूगल ने भारत के बैंगलोर शहर की सड़कों की मैपिंग करने की कोशिश की थी लेकिन सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर ये परियोजना बाद में रोक दी गई.
सांस्कृतिक संरक्षण

सुरेन रुहेला गूगल के प्रोडक्ट मैनेजर हैं. इस परियोजना पर वे कहते हैं, "हम इन ऐतिहासिक धरोहरों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं और ये रिकॉर्ड हमेशा रहेंगे. यह केवल इस पीढ़ी के लिए नहीं होगा बल्कि आने वाली कई पीढ़ियाँ भी इसे देख सकेंगी. यह एक देश की संस्कृति के संरक्षण का बढ़िया तरीक़ा है."
<link type="page"><caption> (हवा महल की धुलाई)</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/01/120106_hawamahal_rj.shtml" platform="highweb"/></link>
लेकिन भारत में गूगल के 'स्ट्रीट व्यू' तकनीक या सड़कों और गलियों की वास्तविक तस्वीरों के ऑनलाइन संस्करण तैयार करने की परियोजना को लेकर सुरक्षा चिंताएँ बरकरार हैं.
भारत में 'स्ट्रीट व्यू' के वीडियो फुटेज लेने पर रोक है और मुश्किल ये है कि गूगल की तकनीक इसी पर आधारित है.
सुरेन कहते हैं, "हम संबंधित सरकारी महकमों के साथ इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं. उनकी सुरक्षा चिंताओं को समझने और उसे सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. मुझे पूरा भरोसा है कि वक़्त रहते हम इस मुद्दे को सुलझा लेंगे और भारत में इंटरनेट यूजर्स इनका ऑनलाइन नजारा देख सकेंगे. ये गूगल का एक बेहतरीन प्रोडक्ट है जिसे दुनिया भर में सराहा गया है."
गूगल का कैमरा

लेकिन गूगल ट्रेकर काम कैसे करता है. पीठ पर लटकाए जाने वाले बैकपैक में एक कैमरा बंधा होता है जिसे आप पहन सकते हैं. इसे चालू करने के लिए किसी के मदद की ज़रूरत पड़ती है और ये बेहद भारी भी है. गूगल ट्रेकर में लगा कैमरा 40 पाउंड या तकरीबन 18 किलो का होता है.
और जैसे ही आप इसे चालू करते हैं, इस कैमरे के 15 लेंस अलग अलग दिशाओं में तस्वीरें लेना शुरू कर देते हैं.
फिर एक कम्प्यूटर के ज़रिए इन तस्वीरों को एक साथ कुछ इस तरह से जोड़ा जाता है कि देखने वाले किसी जगह को 360 डिग्री के कोण से देख सकें. इसे ऑनलाइन देखने पर आपको ऐसा लगेगा कि मानो आप उस गली में घूम रहे हैं.
ताजमहल के सभी हिस्सों में सैलानियों को जाने की इजाजत नहीं है लेकिन गूगल ट्रेकर पर ऐसी कोई रोक नहीं लगाई गई है.
गूगल का कैमरा वहाँ भी जा सकता है जहाँ पर्यटक नहीं जा सकते. ताज महल का परिसर एक बड़े इलाके में फैला हुआ है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) भारत में ऐतिहासिक महत्व की इमारतों का संरक्षक है.
एएसआई को उम्मीद है कि इस परियोजना से ज़्यादा से ज़्यादा लोग ताजमहल की ओर आकर्षित होंगे. एएसआई के मुनज़्जर अली ताजमहल के संरक्षक हैं.
बेमिसाल इमारत

मुनज्जर अली कहते हैं, "इससे लोगों को फ़ायदा होगा. गूगल ट्रेकर के कैमरे को बंद कमरों में जाने की इजाजत दी जाएगी, वह पूरे परिसर में कहीं भी जा सकता है. मकबरे के भूतल तक भी उसकी पहुँच होगी ताकि लोग ताजमहल का पूरी तरह से दीदार कर सकें. जैसा उन्होंने पहले कभी भी नहीं किया होगा."
माना जाता है कि दुनिया भर से हर साल 80 लाख से ज़्यादा सैलानी ताजमहल देखने आते हैं. मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में ये मकबरा बनवाया था जिसे उनकी बेमिसाल मोहब्बत की निशानी के तौर पर दुनिया देखती है. ताजमहल देखने आए लोगों का कहना है कि ये बेहद ख़ूबसूरत है.
कई लोग इसे देखने का सपना संजोए हुए रहते हैं और जब इससे रूबरू होने पाते हैं कि ये उनके ख़्वाबों से कहीं ज़्यादा ख़ूबसूरत है. एक सैलानी ने कहा कि वे इसे अब तक केवल तस्वीरों में ही देखते आए थे लेकिन यहाँ आकर भावुक हो गए.
हर साल की तरह इस बार भी लाखों सैलानी ताजमहल देखने आएंगे और रोज गुजर जाने वाले दिन के बाद रात की रोशनी में भीगी सफेद संगमरमर की ये इमारत झिलमिलाती रहेगी. अब तकनीक की बदौलत इस बेमिसाल इमारत को अब और अधिक लोग देख सकेंगे.
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