छत्तीसगढ़ में चीतलों की मौत का रहस्य गहराया

इमेज स्रोत, SURAJ VAISHNAV
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित चिड़ियाघर में 22 मादा चीतलों की एक साथ हुई मौत का मामला उलझ गया है.
राज्य के वन अधिकारियों ने दावा किया था कि सभी चीतलों की मौत एंथ्रेक्स के कारण हुई थी. लेकिन अब भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली ने अपनी रिपोर्ट में एंथ्रेक्स के कारण चीतलों की मौत से इंकार किया है.
इस रिपोर्ट के बाद चिड़ियाघर में <link type="page"><caption> चीतलों की मौत</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/01/140115_chhatisgargh_cheetal_sk.shtml" platform="highweb"/></link> के पीछे शिकार की आशंका एक बार फिर बढ़ गई है.
चीतलों की मौत एंथ्रेक्स से होने का लगातार दावा करने वाले राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव रामप्रकाश अब इस पूरे मामले से अपना पल्ला झाड़ रहे हैं.
रामप्रकाश का कहना है, “हमें तो राज्य के पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने ही अपनी रिपोर्ट में एंथ्रेक्स के बारे में बताया कहा था. अब हम क्या कहें कि चीतल कैसे मरे? आगे जो भी कार्रवाई होगी, वह तो राज्य के पशुपालन विभाग को करनी है.”
वहीं छत्तीसगढ़ पशु चिकित्सा विभाग के संचालक डॉ. एसके पांडेय इस बात पर अचरज जता रहे हैं कि यह मामला <link type="page"><caption> वनजीव और चीड़ियाघर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130922_pakistan_zoo_dinosaur_vr.shtml" platform="highweb"/></link> से जुड़ा हुआ है. ऐसे में पशु चिकित्सा विभाग कैसे हस्तक्षेप कर सकता है?
पांडेय कहते हैं, “वन्य जीवों का संरक्षक वन विभाग होता है. हमारी तो इसमें कोई भूमिका ही नहीं है.”
मामले की जांच
इधर केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने मामले की जांच के लिए टीम बनाई है और जल्दी ही इसकी जांच शुरू होगी.
केंद्रीय चीड़ियाघर प्राधिकरण के सदस्य सचिव बीएस बोनाल का कहना है कि चीतल कैसे मरे, इसकी जांच के लिए दो सदस्यीय टीम जल्दी ही छत्तीसगढ़ पहुंच रही है.
बीएस बोनाल कहते हैं, “ हम हर पहलू की जांच करेंगे और अगर यह शिकार का मामला है तो उसकी भी जांच की जाएगी.”
बिलासपुर के कानन <link type="page"><caption> पेंडारी चिड़ियाघर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/china/2011/12/111207_china_zoo_lovestory_ar.shtml" platform="highweb"/></link> में 15 जनवरी की सुबह 22 मादा चीतल मरी हुई पाई गई थीं. इनमें से कई के पेट फटे हुए थे और कई चीतल गर्भवती थीं.
बिलासपुर के वन मंडल अधिकारी हेमत पांडेय ने दावा किया था कि चीतलों की मौत ज़हर से हुई है. इसके बाद उसी दिन शाम को राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन्यजीव रामप्रकाश ने दावा किया कि चीतलों की मौत एंथ्रेक्स से हुई है.
हालांकि चीतलों की मौत की जांच को लेकर बनाई गई पशु चिकित्सकों की टीम ने उसी दिन की गई अपनी जांच की रिपोर्ट में साफ लिखा था कि चीतलों की मौत बैसिलाई से हुई है.
बीबीसी के पास उपलब्ध इस रिपोर्ट पर भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली की बैक्टेरियोलॉजी व मॉइकोलॉजी विभाग के ओएन सिंह कहते हैं, “ बैसिलाई का मतलब बैक्टेरिया होता है और बैक्टेरिया तो हर कहीं होता है. इससे किसी की मौत कैसे हो सकती है? वह बैक्टेरिया क्या है, सारा कुछ उस पर निर्भर करता है.”
रात्रिभोज और शिकार

इमेज स्रोत, SURAJ VAISHNAV
<link type="page"><caption> चीतलों की मौत</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/china/2011/12/111207_china_zoo_lovestory_ar.shtml" platform="highweb"/></link> के बाद कई बातें चर्चा में बनी रही और उनमें सबसे प्रमुख था चीतलों की शिफ्टिंग के दौरान बेहोशी की दवा का ओवरडोज़, चीतलों का शिकार और चिड़ियाघर में वन अफसरों की मिलीभगत से बाहुबलियों द्वारा आयोजित होने वाला रात्रिभोज.
कांग्रेस विधायक और छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल ने चिड़ियाघर का दौरा करते समय अधिकारियों से जानना चाहा था कि वहां होने वाली पार्टी के लिए अनुमति कौन देता है ? तब अधिकारियों ने कहा था कि वन मंडल अधिकारी ही इस बारे में अनुमति दे सकते हैं.
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता शैलेष नितिन त्रिवेदी कहते हैं, “चीतलों की मौत के मामले में राज्य सरकार और वन विभाग के दावे झूठे निकले. यह बेहद दुर्भाग्यजनक कि जो बात हर छत्तीसगढ़ वासी के साथ-साथ विपक्ष कांग्रेस को भी स्पष्ट दिख रही थी, उसी मामले में लीपापोती की कोशिश भाजपा सरकार ने की.”
मौत की वजह
चिड़ियाघर के आसपास के ग्रामीणों का दावा है कि चिड़ियाघर में रात्रिभोज सामान्य बात है. ग्रामीण 22 चीतलों को शिकार के दौरान मारे जाने की बात भी कह रहे हैं. लेकिन राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) रामप्रकाश इस पर अपनी अनभिज्ञता जताते हैं.
रामप्रकाश कहते हैं, “यह राजनीतिक बातें हैं और मैं किसी राजनीतिक बात में नहीं पड़ना चाहता.”
तो फिर चीतल मरे कैसे ?
इस रामप्रकाश कहते हैं, “मुझे नहीं पता. यह पता करना मेरा काम भी नहीं है. इस बारे में पशुचिकित्सा विभाग ही बता पाएगा.”
जाहिर है, रामप्रकाश का उत्तर सवाल की शक़्ल में है, जिसका जवाब कोई नहीं देना चाहता.
<bold>(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए <link type="page"><caption> क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link>. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए हमारे <link type="page"><caption> फ़ेसबुक पन्ने</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> पर भी आ सकते हैं और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












