लोकपाल पर राज्य सभा में बहस, सपा का वॉक आउट

सड़क से लेकर संसद तक एक लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार मंगलवार को राज्य सभा में लोकपाल विधेयक पर बहस शुरू हो गई.

सदन में इस विधेयक पर चर्चा शुरू करते हुए क़ानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि यह एक मजबूत लोकपाल है, जिसके लिए पारदर्शी प्रक्रिया को अपनाया गया है और इसमें सरकार के हस्तक्षेप की गुंजाइश नही है.

उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि यह समय उन सभी लोगों को बधाई देने का है, जिन्होंने इस विधेयक पर सहमति बनाने के लिए काम किया. उन्होंने कहा कि यह सभी के लिए जश्न मनाने का वक्त है.

समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने इस बहस में भाग नहीं लिया और वो सदन से बाहर चले गए. समाजवादी पार्टी यह कहते हुए विधेयक का विरोध कर रही है कि इससे भ्रष्टाचार को ख़त्म करने में कोई मदद नहीं मिलेगी.

पक्ष में भाजपा

राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान सरकार की समझ बदली है और विधेयक के मौजूदा प्रावधानों में विपक्ष की चिंताओं का पूरा ध्यान रखा गया है. उन्होंने विधेयक पर सहमति बनाने के लिए सेलेक्ट कमेटी के अध्यक्ष सत्यव्रत चतुर्वेदी की तारीफ की.

अरुण जेटली ने यह भी कहा कि जल्द ही लोकसभा में इस विधेयक को वापस भेजना चाहिए.

इस विधेयक को पास कराने की मांग को लेकर समाजसेवी अन्ना हज़ारे पिछले आठ दिनों से अनशन पर हैं.

उन्होंने सरकार के लोकपाल विधेयक से संतुष्टि जताई है और कहा है कि सदन में इस विधेयक के पारित होने के बाद वो अपना अनशन खत्म कर देंगे.

मजबूत लोकपाल

कपिल सिब्बल ने कहा कि लोकपाल के रूप में हमारे पास एक स्वतंत्र जांच एजेंसी होगी और नियुक्ति से लेकर जांच तक की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई है.

उन्होंने कहा कि इस विधेयक के साथ लोकपाल की जांच प्रक्रिया में सरकार के हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है.

उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि अतीत में जो कुछ हुआ उसे भूल कर यह समय उन लोगों को बधाई देने का है जिन्होंने इसके लिए मेहनत की.

गौरतलब है कि अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में देश में लोकपाल की नियुक्ति के लिए जोरदार आंदोलन चलाया गया, हालांकि शुरुआत में इस आंदोलन को सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया.

विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि संघीय ढांचे को बनाए रखते हुए भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ी जा सकती है और मौजूदा विधेयक में देश के संघीय ढांचे का पूरा ध्यान रखा गया है.

इस विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक विधेयक के पारित होने के एक साल के भीतर सभी राज्यों के इस कानून के आधार पर अपने यहां लोकायुक्त की नियुक्ति करना अनिवार्य होगा.

नए विधेयक के कुछ खास प्रावधान

  • लोकपाल से जुड़े मामले में सीबीआई लोकपाल के अधीन काम करेगी.
  • सरकार लोकपाल की जांच से जुड़े सीबीआई अधिकारियों का ट्रांसफर नहीं कर सकेगी.
  • राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति का अधिकार राज्य विधानसभा के पास होगा.
  • हालांकि उनके लिए एक साल के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति करना अनिवार्य है. इसके लिए केंद्रीय लोकपाल कानून को मॉडल कानून माना जाएगा.
  • लोकपाल की नियुक्ति करने वाली समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में नेता विपक्ष, मुख्य न्यायाधीश शामिल होंगे.
  • धार्मिक संस्थाओं को छोड़कर अन्य सभी ऐसी स्वयंसेवी संस्थाएं लोकपाल के दायरे में आएंगी, जिन्हें सरकारी मदद मिलती है.
  • लोकपाल को हटाने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास होगा.
  • समिति में 50 प्रतिशत सदस्य अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और महिला वर्ग से होंगे.
  • प्रधानमंत्री लोकपाल के दायरे में हैं, हालांकि उनको लेकर शिकायतों के निपटान के लिए विशेष प्रक्रिया है.
  • सभी श्रेणियों के सरकारी अधिकारी लोकपाल के दायरे में शामिल.
  • तय समयसीमा के भीतर जांच का प्रावधान

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