लोकपाल पर केंद्र सरकार को बीजेपी की चेतावनी

मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने सरकार को प्रस्तावित भ्रष्टाचार निरोधक कानून के खिलाफ चेतावनी दी है. इसके बाद केंद्र सरकार <link type="page"><caption> लोकपाल </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130131_lokpal_cabinet_vr.shtml" platform="highweb"/></link>बिल को संसद में पास कराने की योजना अधर में पड़ती दिख रही है.
वरिष्ठ बीजेपी नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने गुरुवार को सरकार पर आरोप लगाया कि इस विधेयक का प्रारूप फिर से तैयार करते समय सरकार सेलेक्ट कमेटी की मुख्य सिफारिशों को अनदेखा कर रही है.
इल बिल के सोमवार को राज्यसभा में पेश होने की उम्मीद है.
'लम्बे समय से लटका है लोकपाल'
जेटली ने चेतावनी दी, ''हम सरकार को सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट को ख़ारिज नहीं करने देंगे.''
लोकसभा में 27 दिसंबर 2012 को पेश लोकपाल बिल पास हो गया था. लोकसभा में पारित बिल में कहा गया था कि लोकपाल के लिए काफी हद तक सरकार द्वारा लोगों को नियुक्त किया जाएगा और उसके कामकाज पर सरकार का नियंत्रण रहेगा.
एक जांच एजेंसी के रूप में सीबीआई के कामकाज को भी काफी हद तक सरकार द्वारा नियंत्रित किया गया है. यह बिल भारतीय जनता पार्टी को स्वीकार्य नहीं था.
राज्यसभा में इस विधेयक पर 29 दिसंबर 2011 को बहस हुई. प्रस्तावित विधेयक पर विपक्ष ने कई संशोधन करने का सुझाव दिया था.

राज्यसभा के अधिकतर सदस्य इन संशोधनों के पक्ष में थे लेकिन 29 दिसंबर 2011 को राज्यसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई थी.
इसके बाद इस विधेयक को कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी की अध्यक्षता वाली एक सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया गया.
सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट

सेलेक्ट कमेटी ने कई बैठकों के बाद 23 दिसंबर 2012 को अपनी रिपोर्ट राज्यसभा में पेश की. तभी से ये रिपोर्ट अब तक राज्यसभा में लटकी हुई है.
राज्यसभा में कार्य संचालन और प्रकिया संबंधी नियमों के नियम 91 के तहत चयन समिति की रिपोर्ट को सदन में प्रस्तुत किया गया है.
दोनों सदनों में से सिर्फ राज्यसभा में ही इस रिपोर्ट में कोई संशोधन कर सकती है या स्वीकार कर सकती है.
इस रिपोर्ट का मुकाबला स्थायी समिति की उस रिपोर्ट से है जिसमें सरकार प्रस्तावित रिपोर्ट में कोई संशोधन ला सकती है.
संसद के दोनों ही सदनों में कई अवसरों पर इस विधेयक पर चर्चा हो चुकी है.
इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने संसद के शीतकालीन सत्र को छोटा करने की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया औक कहा कि सरकार लोकपाल विधेयक को पहले राज्यसभा में और उसके बाद लोकसभा में पेश करेगी.
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