केरल: कैदियों ने जेल से किया फेसबुक अपडेट

जेल से कैदियों द्वारा ली गई तस्वीरों में से एक
इमेज कैप्शन, जेल से कैदियों द्वारा ली गई तस्वीरों में से एक

बहुचर्चित राजनीतिक हत्या के मामले में केरल की जेल में बंद कई विचाराधीन कैदियों के जेल से फेसबुक अपडेट के मामले सामने आए है. जिसके चलते एक ओर जेल के कानून-कायदों की धज्जियां उड़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर, गृह मंत्रालय की खासी किरकिरी हो रही है.

अदालत ने इस मामले में पांच कैदियों को स्थानांतरित करने की डीजीपी (कारावास) की मांग खारिज कर दी है.

एक मलयाली टीवी चैनल ने अपने स्टिंग ऑपरेशन में दावा किया है कि सनसनीखेज़ चंद्रशेखरन हत्या मामले में कुछ आरोपी अपनी कोठरियों से मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर अपने फेसबुक खाते अपडेट कर रहे हैं. जबकि जेल में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक है.

पूर्व माकपा नेता टीपी चन्द्रशेखरन की मई 2010 में केरल स्थित उनके घर पर हत्या कर दी गयी थी. उन्हें कुछ साल पहले माकपा नेतृत्व के साथ मतभेद होने के कारण पार्टी से निकाल दिया गया था. बाद में उन्होंने रेवोल्यूशनरी मार्कसिस्ट पार्टी (आरएमपी) बना ली थी. आरोपियों में कई स्थानीय माकपा समर्थक हैं.

स्टिंग ऑपरेशन

टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन के बाद यह मामला सामने आया है. जिसमें जेल के कानून का गंभीर उल्लंघन किया गया है. इससे राज्य की कांग्रेस सरकार को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

स्थानीय पत्रकारों ने पाया कि कैदियों से जुड़े फेसबुक पन्ने जेल में ली गई तस्वीरों के साथ नियमित रूप से अपडेट किए जा रहे हैं. चैनल ने हत्या के कुछ प्रमुख आरोपियों की ओर से पोस्ट की गई तस्वीरों की ओर भी इशारा किया है.

एक समाचार पत्र के सूत्रों के अनुसार आरोपियों ने 50 दिनों के अंतराल में एक हजार फोन कॉल कीं. जबकि एक स्थानीय टीवी पत्रकार फोन के जरिए एक कैदी से बात करने में सफल रहा. जिसके बाद राज्य के गृह मंत्री तिरूवनकूर राधाकृष्णन को जल्द से जल्द बर्खास्त करने की मांग की गई.

कैदी नहीं होंगे शिफ्ट

राज्य के गृह मंत्री राधाकृष्णन ने जेल के कानून और सुरक्षा के उल्लंघन की बात स्वीकार करते हुए कहा, "गृह सचिव और डीजीपी (कारावास) को मामले की जांच के आदेश और शीघ्र रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं."

जबकि विशेष अतिरिक्त एवं सत्र अदालत न्यायाधीश आर.नारणयण पीशाराडी ने केरल के जीडीपी (कारावास) अलेक्जेंडर जैकब की पांच कैदियों को दूसरी जेल में स्थानांतरित करने की मांग खारिज कर दी. इन कैदियों को जिला कारावास से तिरुवनंतपुरम स्थित केंद्रीय कारागार भेजने की मांग की गई थी.

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