सबसे ऊंचे 'सरदार' के जवाब में सबसे बड़ा मंदिर !

- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, पटना से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
गुजरात में प्रस्तावित दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा यानी सरदार पटेल की प्रतिमा की योजना की आधारशिला रखे जाने के दो हफ़्ते बाद बुधवार को बिहार में दुनिया के सबसे ऊंचे हिंदू मंदिर के मॉडल के अनावरण किया गया.
पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर परिसर में द्वारकापीठ के जगदगुररु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज विराट रामायण मंदिर के मॉडल का अनावरण किया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी बतौर मुख्य अतिथि वहां मौजूद थे.
इन दोनों परियोजनाओं में एक अंतर यह है कि जहां सरदार पटेल की प्रतिमा का निर्माण गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहा है, वहीं विराट राम मंदिर के निर्माण से नीतीश कुमार या उनकी पार्टी जुड़ी हुई नहीं है. बिहार के पूर्वी चंपारण ज़िले के जानकी नगर में प्रस्तावित इस 405 फीट ऊंचे मंदिर का निर्माण पटना के हनुमान मंदिर ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है. ट्रस्ट का दावा है कि तैयार हो जाने के बाद यह दुनिया का सबसे ऊंचा हिंदू मंदिर होगा.
पटना स्थित प्रसिद्ध महावीर मंदिर का संचालन इसी ट्रस्ट द्वारा किया जाता है. 2015 तक इस मंदिर के बनकर तैयार होने की संभावना है.
जानकी नगर बिहार की राजधानी पटना से लगभग 120 किलोमीटर और ऐतिहासिक वैशाली शहर से 60 किलोमीटर की दूरी पर है.
दिसंबर से शुरुआत
इस साल 21 जून को जानकी नगर में भूमि पूजन किया गया था. हनुमान मंदिर ट्रस्ट के अनुसार ज़मीन अधिग्रहण कार्य पूरा हो चुका है और उसमें मिट्टी भरने का काम चल रहा है.
ट्रस्ट 14 दिसंबर को खर मास शुरू होने के पहले बारह करोड़ की प्रारंभिक राशि से निर्माण कार्य शुरू करेगा और मंदिर के चबूतरे के निर्माण के बाद भक्तों से अपील करेगा कि वे निर्माण कार्य के लिए दान करें.
ट्रस्ट की वर्तमान योजना के मुताबिक इच्छुक भक्त सात हज़ार रुपए या इसके गुणक में दान कर सकेंगे.
ट्रस्ट के सचिव आचार्य किशोर का कहना है कि मंदिर निर्माण के लिए न तो किसी धार्मिक संगठन, सरकार और न ही किसी कॉरर्पोरेट घराने से कोई मदद मांगी गई है.
विरोध

पहले कंबोडिया के प्रसिद्ध अंकोरवाट मंदिर की प्रतिमूर्ति बनाने की योजना थी और नाम रखा गया था. ‘विराट अंकोरवाट राम मंदिर’.
अंकोरवाट मंदिर वर्तमान में सबसे ऊंचा हिंदू मंदिर माना जाता है और यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल है, लेकिन आचार्य किशोर कुणाल के मुताबिक भारत स्थित कंबोडियाई दूतावास द्वारा इस सबंध में विरोध दर्ज कराया गया.
इसके बाद न सिर्फ प्रस्तावित मंदिर का प्रारूप और नाम बदला गया बल्कि अंकोरवाट मंदिर से भी ऊंचा और बड़ा मंदिर निर्माण कर दुनिया के सबसे ऊंचे हिंदू मंदिर बनाने की योजना बनाई गई.
हाजीपुर में पर्याप्त ज़मीन नहीं मिल पाने के कारण निर्माण स्थल के रूप में जानकी नगर का चयन किया गया.
ख़ासियत
ट्रस्ट के अनुसार अंकोरवाट के मंदिर के मुक़ाबले अब यह मंदिर न केवल ऊंचाई में ज़्यादा होगा बल्कि यह इस मायने में भी अलग होगा कि प्रस्तावित मंदिर का शिखर अंकोरवाट के मंदिर की तरह पत्थर का नहीं बल्कि कंक्रीट का बना होगा.
गौरतलब है कि पहले इसकी ऊंचाई 222 फुट से बढ़ाकर 270 फुट की गई और अब 405 फुट ऊंचे मंदिर के निर्माण की तैयारी चल रही है.
मंदिर का आधार 2268 फुट लंबा और 1296 फुट चैड़ा होगा. मंदिर के आर्किटेक्ट अहमदाबाद के पीयूष सोमपुरा और पटना के श्याम प्रसाद हैं. ख़ास बात यह होगी कि इसमें शिखर पर राम-सीता, लव-कुश के साथ-साथ बाल्मीकि की भी मूर्ति स्थापित की जाएगी.
मंदिर में लगभग 70 फीट की ऊंचाई पर एक लाख चालीस हजार वर्गफुट के विस्तृत हॉल में पच्चीस हजार भक्त एक साथ पूजा-अर्चन भी कर सकेंगे. मंदिर परिसर में कुल 18 मंदिर होंगे और शिव मंदिर का शिवलिंग दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग भी होगा.
साथ ही मंदिर परिसर में हिंदू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक हुए समुद्र मंथन के दृश्य को भी साकार किया जाएगा. परिसर की चारदीवारी पर रामायण से जुड़े प्रसंगों के डिजिटल प्रस्तुति की भी योजना है. मंदिर का प्रस्तावित क्षेत्र भूकंप प्रभावित क्षेत्र (सिस्मिक जोन-4) में आता है.
लागत

फिलहाल मंदिर की निर्माण लागत लगभग 500 करोड़ आंकी गई है. मंदिर के लिए ज़रूरी राशि के संबंध में हनुमान मंदिर ट्रस्ट की योजना है कि वह व्यक्तिगत दान के द्वारा ही यह विशाल राशि एकत्र करेगा.
ट्रस्ट द्वारा भक्तों से ऑनलाइन चंदे की मांग की गई है.
ट्रस्ट के अनुसार एक लाख या इससे ज्यादा की राशि दान करने वालों के नाम मंदिर के ‘कीर्ति-स्तंभ’ और मंदिर के किसी हिस्से का नामकरण एक करोड़ या उससे ज्यादा की राशि दान करने वालों भक्तों के नाम किया जाएगा.
दान में भी मिली जमीन
अमूमन किसी भी निर्माण कार्य के लिए बड़े पैमाने पर ज़मीन अधिग्रहण एक कठिन चुनौती के रूप में सामने आता है. लेकिन ट्रस्ट के मुताबिक मंदिर के लिए ज़मीन अधिग्रहण में कोई समस्या नहीं आई.
बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद से सम्बद्ध मठों के पास जानकी नगर में लगभग 90 एकड़ जमीन उपलब्ध थी और बाक़ी 100 एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण किया गया. स्थानीय पत्रकार रितेश कुमार वर्मा ने भी ट्रस्ट के दावे को सही ठहराया.
उन्होंने बताया, ‘स्थानीय लोगों ने प्रस्तावित मंदिर परिसर के लिए जमीन या तो स्वेच्छा से दान की है या बेची है. इतना ही नहीं जिन लोगों ने ज़मीन के बदले जमीन की मांग की जिसे स्थानीय भाषा में ‘बदलैन’ कहा जाता है, उन्हें ट्रस्ट द्वारा मंदिर परिसर के बाहर ज़मीन या तो खरीद कर दी गयी या फिर उन्हें दूसरे भक्तों द्वारा दान दी हुई ऐसी ज़मीन दी गयी जो मंदिर परिसर से बाहर है.’
विचार
इस मंदिर का निर्माण भारतीय पुलिस सेवा के भूतपूर्व अधिकारी आचार्य किशोर कुणाल के नेतृत्व में चल रहा है जो कि हनुमान मंदिर ट्रस्ट के सचिव भी हैं. मंदिर निर्माण का विचार कैसे आया, इस सवाल के जवाब में आचार्य किशोर ने बताया, ‘बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष के रूप में मैंने सैकड़ों मंदिरों का निर्माण और उनका जीर्णोद्धार कराया.
लेकिन मन में एक दबी हुई इच्छा थी कि एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया जाए.''
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