हमले से डरी श्रीलंकाई पत्रकार ने देश छोड़ा

रात में घर में घुसकर परिवार को चाक़ू के नोक पर रखकर लूटपाट और तलाशी लेने की घटना के तीन हफ्ते बाद श्रीलंका की एक वरिष्ठ पत्रकार देश छोड़कर किसी अज्ञात देश में चली गई हैं.
संडे लीडर अख़बार की एसोसिएट एडिटर और पत्रकारों के संगठन की नेता मंदाना इस्माइल अबेविक्रेमा को धमकियां भी मिली थीं.
उन्होंने बीबीसी से कहा कि उन्होंने कुछ महीने के लिए देश छोड़ा है और वो वापस लौट कर आएंगी.
'पत्रकारों के ख़िलाफ़ युद्ध'
<link type="page"><caption> मीडिया</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/rolling_news/2012/03/120323_srilanka_journo_rn.shtml" platform="highweb"/></link> अधिकारों के संरक्षण के लिए काम करने वाले एक संगठन का कहना है कि अबेविक्रेमा का जाना पत्रकारों के ख़िलाफ़ युद्ध के जारी रहने का प्रतीक है.
इस अख़बार के एक पूर्व संपादक की चार साल पहले गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इसके एक और पूर्व संपादक पिछले साल देश छोड़कर चले गए थे.
अबेविक्रेमा के वकील ने कहा कि उन्होंने अपनी सुरक्षा की देखते हुए देश छोड़ा है और परिवार को अपने साथ ले गई हैं.
चार नक़ाबपोश और हथियारबंद लोगों ने 24 अगस्त की रात उनके घर में घुसकर उनके चेहरे पर घूसा मारा था और उन्हें, उनकी 10 साल की बेटी और माता-पिता को धमकी दी थी.
उन्होंने सामान भी चुरा लिए और दस्तावेज़ों की घंटों खोजबीन भी की.
पुलिस और सेना ने इस घटना को चोरी के रूप में दर्ज किया, जिसका मक़सद मीडिया को परेशान करना नहीं था.
अबेविक्रेमा के पति ने तत्काल घटना की सूचना पुलिस को दी, जिसने एक घुसपैठिए की गोली मारकर हत्या कर दी और अन्य को पकड़ लिया.
भ्रष्टाचार का पर्दाफ़ाश
कोलंबो स्थित बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैवीलैंड का कहना है कि इस मामले में अभी आरोप तय नहीं किए गए हैं. उनका कहना है कि इस गिरोह के दो सदस्य सेना के भगोड़े हैं.
इस घटना के बाद अबेविक्रेमा ने कहा था कि भ्रष्टाचार का पर्दाफ़ाश करने वाले पत्रकारों को श्रीलंका में ख़तरों का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन इसके बाद भी उन्हें हार नहीं माननी चाहिए.
इस घटना के बाद एक बार फिर उनके घर पर हमला हुआ और एक कंप्यूटर चुरा लिया गया.
विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया है कि अबेविक्रेमा को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि वो एक विवादित निर्माण सौदे के तथ्यों को सामने ला रही थीं.
अब वे किसी अज्ञात देश में चली गई हैं. श्रीलंका के फ्री मीडिया मूवमेंट ने कहा है कि सरकार को हाल के सालों में पत्रकारों पर हुए हमलों के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर मुक़दमा चलाना शुरू करना चाहिए.
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