यात्री बस जलाने वाले तीन दोषियों को फांसी की सज़ा

फांसी का फंदा
इमेज कैप्शन, इस अग्निकांड में 15 लोग मारे गए थे.
    • Author, ऋषि पाण्‍डे
    • पदनाम, भोपाल से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

मध्‍य प्रदेश के बडवानी ज़िले की विशेष अदालत ने दो साल पहले एक यात्री बस को आग के हवाले करने वाले तीन दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई है.

इस मामले के एक दोषी को उम्रक़ैद और 62 लाख रुपए के जुर्माने की सज़ा दी गई है.

इस अग्निकांड में बस में सवार 15 यात्रियों की जलने से मौत हो गई थी.

मामला 21 अगस्‍त 2011 का है. पुलिस डायरी के मुताबिक 21 अगस्‍त 2011 को सवारियां बिठाने को लेकर हुए विवाद में अशोका ट्रेवल्‍स के ड्राइवर, कंडक्‍टर और क्‍लीनर ने मिलकर सांई ट्रेवल्‍स की बस को बालसमुंद बैरियर के निकट रोका और उसके दरवाजे पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी.

सांई ट्रेवल्‍स की बस में सिर्फ एक ही दरवाजा था जिस वजह से अंदर बैठे यात्री बाहर नहीं निकल पाए जिससे महिला और बच्चों समेत 15 यात्रियों की मौत हो गई थी.

घटना

पुलिस डायरी के अनुसार बाद में गुस्‍साए लोगों ने अशोका ट्रेवल्‍स की बस से यात्रियों को बाहर निकाल कर उसे भी आग के हवाले कर दिया.

बडवानी की विशेष अदालत के न्‍यायाधीश देवेन्‍द्र सिंह सोलंकी ने शुक्रवार को अपने 118 पेज के फैसले में बस ड्राइवर तरूण सोनी, कंडक्‍टर दिलीप शर्मा और क्‍लीनर राजकुमार कुशवाह को फांसी की सज़ा सुनाई जबकि बस मालिक नरेश पिता केशरीमल दोषी को उम्रकैद और 62 लाख रुपए के जुर्माने की सज़ा सुनाई.

यह जुर्माना 15 मृतकों के परिजनों को तीन-तीन लाख और 19 घायलों को 50-50 हजार रूपए के हिसाब से बंटेगा.

दो साल पहले हुए इस हादसे ने मध्‍य प्रदेश में निजी बस आपरेटरों के बीच खूनी प्रतिस्‍पर्धा को उजागर किया.

परिवहन व्यवस्था

परिवहन के जानकार और बंद हो चुके सरकारी उपक्रम राज्‍य सड़क परिवहन निगम कर्मचारी संघ के पदाधिकारी श्‍यामसुंदर शर्मा कहते हैं, ''यह सब सरकारी परिवहन व्‍यवस्‍था को ध्‍वस्‍त करने का परिणाम है."

उन्होंने कहा, "मध्‍य प्रदेश ही ऐसा राज्‍य है जहां प्राइवेट ऑपरेटरों को सरकार ने हावी किया है और सरकारी वाहनों को बंद कर दिया. निजी बस ऑपरेटरर्स पर किसी का अंकुश नहीं है.''

शर्मा कहते हैं ''मध्‍य प्रदेश और छत्‍तीसगढ को छोड़ पूरे देश में राज्‍य परिवहन निगम अस्तित्‍व में है. इसलिए यहां परिवहन व्‍यवस्‍था पर किसी का अंकुश नहीं है.''

मध्य प्रदेश में इस समय सोलह हजार या‍त्री बसें चल रही है और ये सभी निजी हैं.

मध्‍य प्रदेश लीज बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्‍यक्ष गोपाल पैगवार का कहना है, ''यात्री बसों में प्रतिस्‍पर्धा के लिए परिवहन विभाग जिम्‍मेदार है. एक रूट पर पांच से दस मिनट के अंतराल से जब बसें चलेंगी तो यात्री कहां से मिलेंगे. इसलिए आए दिन विवाद की स्थितियां बनती है."

पैगवार के मुताबिक मध्‍य प्रदेश में ऑल इंडिया परमिट की बसें भी सवारी ढोने लगती है जिससे रूट परमिट की बसों को यात्री नहीं मिलते.

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