क्या सुधर पाएगी रुपये की सेहत?

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने रूपये की लगातार गिर रही सेहत को सुधारने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. इस दिशा में उसने भारतीय बैंकिंग व्यवस्था के लिए 80 अरब रूपये जारी करने का फ़ैसला लिया है.
रिज़र्व बैंक लंबे समय के बांड ख़रीद कर यह रकम दूसरे बैंकों को देगा. रिज़र्व बैंक ने रुपयों की आपूर्ति पर अंकुश लगाने के फ़ैसले के थोड़े दिन बाद ही लिया है.
माना जा रहा है कि रिज़र्व बैंक के नए कदम से अब देश में कहीं ज़्यादा पैसा उपलब्ध होगा और सरकार को कम उधार लेना होगा.
मंगलवार को भारत के उधार देने की दर 2001 के बाद अपने उच्चतम दर तक पहुंच गई. 10 साल के बॉंड के लिए ये दर 9.48 फ़ीसदी तक पहुंच गई है.
भारतीय रिज़र्व बैंक ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि पैसों के प्रवाह पर सख़्ती दीर्घकालीन फ़ायदों को प्रभावित नहीं कर पाए और देश के उत्पादन क्षेत्र पर इसका नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़े.”
रिज़र्व बैंक ने कहा कि वे अन्य बैंकों के बॉंड खुले बाज़ार से ख़रीद की प्रक्रिया से 23 अगस्त को खरीदेगा.
रुपया निम्नतम स्तर पर
भारतीय मुद्रा का मूल्य लगातार लुढ़क रहा है. इस साल मई के मुक़ाबले अब तक अमरीकी डॉलर के मुक़ाबले रुपये के मूल्य में 16 फ़ीसदी की गिरावट हुई है.
मंगलवार को अमरीकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 64.13 तक पहुंच गई, जो सबसे निम्नतम मूल्य है.
इस गिरावट के चलते भारतीय रिज़़र्व बैंक को कदम उठाने की ज़रूरत पड़ी है, ताकि रुपये का लुढ़कना थमे.

हाल ही में रिज़र्व बैंक ने अपनी उस ब्याज़ दर को बढ़ाने का फ़ैसला लिया था जिस दर पर वह अन्य बैंकों को उधार देता था. इतना ही नहीं उसने बैंकों पर रोज़ाना एक सीमा से ज़्यादा उधार देने पर भी अंकुश लगा दिया.
इस कदम से रुपये का लुढ़कना थमा नहीं. उलटे यह चिंता शुरू हो गई कि पैसों की कमी से भारत की विकास दर पर असर पड़ेगा. भारत की मौजूदा विकास दर इस दशक के सबसे निम्न स्तर तक पहुंच चुकी है.
विश्लेषकों का मानना है कि चलन में ज़्यादा रूपये के उपलब्ध होने से चिंताएं कम होंगी और रुपये की सेहत भी सुधरेगी.
एचडीएफसी बैंक के ट्रेज़रार आशीष पार्थसारथी ने कहा, “आरबीआई ने पैसों के प्रवाह पर अंकुश लगाने की जो कोशिश की थी, अब उस कदम को सुधारने की कोशिश कर रही है.”
पार्थसारथी के मुताबिक आरबीआई के इस कदम से 10 साल के बॉंड पत्र की आपूर्ति कम होगी और बैंकों का घाटा भी तेज़ी से कम होगा.
आईडीबीआई बैंक के एनएस वेंकटेश का कहना है कि रिजर्व बैंक के इस कदम से रुपये की सेहत सुधरेगी क्योंकि इस कदम के बाद विदेशी निवेशक भारतीय बाज़ार की ओर आकर्षित होंगे.
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