भारतीय सैनिकों पर हमला कायरतापूर्ण था: मनमोहन सिंह

लाल किले पर प्रधानमंत्री का भाषण

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए नियंत्रण रेखा पर पांच सैनिकों के मारे जाने को कायरतापूर्ण कार्रवाई बताया है, हालांकि उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया.

उन्होंने कहा कि भारत-पाक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए ज़रूरी है कि पाकिस्तान अपनी ज़मीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए न होने दे.

मनमोहन सिंह ने कहा, "नियंत्रण रेखा पर हाल ही में हमारे जवानो पर कायरतापूर्ण हमला किया गया. इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए हम हर मुमकिन कोशिश करेंगे."

विपक्ष भारतीय सैनिकों पर हमले के लिए पाकिस्तानी सेना को दोषी ठहराता रहा है लेकिन पाकिस्तान ने ऐसी किसी भी आरोपों से इंकार किया है.

करीब आधे घंटे के भाषण में प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान से कहा कि वो अपनी ज़मीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ़ न होने दे.

उन्होंने कहा, "हमारी ये भी कोशिश रही है कि पड़ोसी देशों के साथ दोस्ती बढ़े लेकिन पाकिस्तान के साथ रिश्ते बेहतर होने के लिए ये ज़रूरी है कि वो अपनी सरज़मीं और अपने नियंत्रण वाली ज़मीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ़ किसी भी कार्रवाई के लिए न होने दे."

नक्सल खतरा

मनमोहन सिंह ने नक्सली गतिविधियों को भारतीय लोकतंत्र पर हमला बताया.

उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा के संबंध में हमें लगातार सावधानी बरतने की ज़रूरत है. समय-समय पर हो रहे नक्सली हमलों को पूरी तरह रोकने में हम सफ़ल नहीं हो पाए हैं. छत्तीसगढ़ में पिछली 25 मई को जो नक्सली हिंसा हुई वो भारतीय लोकतंत्र पर सीधा हमला था."

अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले, इस आखिरी भाषण में मनमोहन सिंह का खासा ज़ोर खाद्य बिल, मिड-डे मील जैसी सरकारी योजनाओं पर रहा.

उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून से 81 करोड़ भारतीयों को फायदा होगा और लोगों को चावल तीन रुपए प्रति किलो, गेहूँ दो रुपए किलो और अनाज एक रुपए किलो मिल सकेगा.

प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा में मारे गए लोगों के प्रति दुख जताया. उन्होंने उत्तराखंड की जनता को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ है और उनकी हर संभव सहायता की जाएगी.

सेना और सुरक्षा बलों की ओर से उत्तराखंड में किए गए काम की तारीफ़ करते हुए प्रधानमंत्री ने वहाँ मारे गए सैनिकों और सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धांजलि दी.

विकास पर जोर

प्रधानमंत्री ने मंगलवार को मुंबई में पनडुब्बी सिंधुरक्षक हादसे का जिक्र करते हुए इस हादसे में मारे गए नौसैनिकों को श्रद्धांजलि दी.

उन्होंने कहा कि देश में हर 10 साल बाद उल्लेखनीय बदलाव आया है. पंडित जवाहर लाल नेहरु के कार्यकाल में बनी योजना आयोग और अन्य संस्थाओं ने देश के विकास को नई दिशा दी.

पिछले दशक को प्रधानमंत्री ने बदलाव का दशक बताते हुए कहा कि इस दौरान देश आर्थिक रूप से समृद्ध हुआ है और इससे पहले इतनी समृद्धि कभी नही आई थी.

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दौरान आम आदमी को नए अधिकार मिले हैं और इससे उसकी सामाजिक ताकत बढ़ी है.

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आवाज बुंलद हुई है और आज दुनिया भारत को सम्मान की नज़र से देखती है.

उन्होंने कहा कि सफर अभी लंबा है और भारत को अभी लंबा फासला तय करना है.

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