एंटनी के बयान से सांसत में सरकार

- Author, प्रमोद जोशी
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
संसद के मॉनसून सत्र में तेलंगाना राज्य के गठन, उत्तराखंड की आपदा, रिटेल में विदेशी पूंजी निवेश, दुर्गाशक्ति नागपाल या महंगाई के सवाल पर हंगामा होता, उसके पहले ही जम्मू-कश्मीर सीमा पर पाँच भारतीय सैनिकों की हत्या ने सनसनी फैला दी है.
आज सम्भव है प्रधानमंत्री को इस मसले पर संसद में सफाई पेश करनी पड़े. सरकार पर ‘माकूल जवाब’ देने का दबाव है. पर माकूल जवाब के माने क्या हैं?
अगले कुछ दिन संसद के भीतर और बाहर यह मसला हावी रहे तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए.
राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल
राष्ट्रीय सुरक्षा भारत में एक बड़ा राजनीतिक मसला है. आज सरकार को विपक्ष के वार झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए.
रक्षा मंत्री एके एंटनी का वक्तव्य सरकार के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है, क्योंकि उन्होंने सैनिकों की हत्या के लिए पाकिस्तानी सेना को सीधे दोषी नहीं ठहराया.
भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंगलवार की शाम से ही एंटनी के घर के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिए.
मंगलवार की सुबह लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर अध्यक्ष मीरा कुमार ने जैसे ही प्रश्नकाल शुरू करने की घोषणा की, भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने नियंत्रण रेखा पर भारतीय सैनिकों की हत्या का मामला उठाया.
दोनों सदनों में दिनभर यह मसला किसी न किसी रूप में छाया रहा.
पाकिस्तानी सेना नहीं तो कौन?
सवाल यह है कि हमला करने वाले पाकिस्तानी फौजी नहीं थे, तो कौन थे? रक्षा मंत्री एके एंटनी ने संसद में सीधा जवाब देने के बजाय कहा कि भारत को निष्कर्षों पर पहुँचने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए.
विपक्ष इस मामले पर एकमत नजर आता है कि हमें सख्ती बरतनी चाहिए.
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने कहा कि यह रक्षा और विदेश नीति से जुड़ा मसला है इस लिए इस पर प्रधानमंत्री का बयान होना चाहिए.
पाकिस्तान में नवाज शरीफ की सरकार बनने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में कड़वाहट का पहला झोंका है. इसके पीछे क्या किसी की कोई योजना है?
तेलंगाना पीछे रह गया

सीमा पर सैनिकों की हत्या के कारण तेलंगाना मामला कुछ समय के लिए पीछे चला गया लगता है. इस सत्र के शुरू होने के पहले उम्मीद यह थी कि इस बार काफी विधायी कार्य पूरे हों सकेंगे.
अब लगता है कि राष्ट्रीय राजनीति पर राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल हावी हो जाएगा. लद्दाख में चीनी सेना की चहलकदमी की खबरें अभी ताज़ा ही हैं.
सोमवार के अखबारों में इस बात को रेखांकित किया गया था कि संसद के मॉनसून सत्र में 44 विधेयक पेश रखे जाने और 6 वापस लिए जाने का विचार है.
सत्र में केवल 16 बैठकें होंगी, जिनमें से चार शुक्रवारों को गैर-सरकारी काम होने के कारण प्रभावी बैठकें 12 ही होंगी.
बारह में से दो दिन निकल गए और विधायी काम जस का तस है. हालांकि यह सत्र शुरू होने के पहले मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने आश्वस्त किया था कि यदि सरकार विधायी कार्य करना चाहती है तो हम उसके साथ सहयोग करेंगे.
पर विपक्ष का मानना है कि सदन में विचार-विमर्श की स्थितियां बनाना सरकार का काम है. संयोग से पहले दो दिन विमर्श की स्थितियाँ नहीं बन पाईं.
माहौल बदल गया
कल मंगलवार को दूसरा दिन था. पहले दिन तेलंगाना मुद्दे के कारण विधायी कार्य नहीं हो पाए. इसकी संभावना भी थी.
दूसरे दिन भी तेलंगाना मुद्दे के साथ दोनों सदनों में गहमा-गहमी शुरू हुई लेकिन नियंत्रण रेखा पर पाँच भारतीय जवानों की हत्या की खबर आने के बाद माहौल बदल गया.
अभी यह मसला रंग पकड़े तो आश्चर्य नहीं, क्योंकि रक्षा मंत्री के वक्तव्य को लेकर विपक्ष की आपत्तियां हैं. इस साल की शुरूआत नियंत्रण रेखा पर गड़बड़ियों के साथ हुई थी. सैनिकों की गर्दन काटे जाने के बाद से लगातार घटनाएं होती जा रहीं हैं.
मुलायम सिंह, मायावती, सीताराम येचुरी से लेकर यशवंत सिन्हा और अरुण जेटली सब ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि सरकार कुछ करे.
खाद्य सुरक्षा और अन्य विधेयक

संसद के इस सत्र में जिन महत्वपूर्ण विधायी कार्यों की आशा है उनमें सबसे आगे है खाद्य सुरक्षा विधेयक. चूंकि सरकार ने अध्यादेश जारी कर दिया है, इसलिए अब इस सत्र में पास कराना जरूरी है.
इसी तरह सेबी से जुड़ा एक अध्यादेश है. मेडिकल काउंसिल अध्यादेश की पुष्टि भी होनी है. सन 2011 के भारत-बांग्लादेश सीमा समझौते को लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक भी सरकार पास कराना चाहेगी.
भूमि अधिग्रहण कानून को पेश करने के लिए बजट सत्र के दौरान विपक्ष के साथ बात हुई थी, पर वह पेश हो पाएगा या नहीं कहना मुश्किल है. दो साल पहले तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन ने राष्ट्रीय खेल विकास विधेयक तैयार किया था.
उसे लेकर खासतौर से क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था बीसीसीआई तथा कुछ अन्य खेल संगठनों को आपत्ति थी. इधर न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मुकुल मुदगल की अध्यक्षता में एक कार्य समूह को इसका मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.
अब राष्ट्रीय खेल विकास विधेयक 2013 का प्रारूप भी तैयार है. कहना मुश्किल है कि यह पेश हो पाएगा या नहीं. कम्पनी कानून विधेयक लोकसभा से पास हो गया था. उसे राज्यसभा से पास कराना है.
इंश्योरेंस बिल पर सहमति?
साम्प्रदायिक हिंसा विधेयक भी पास होना बाकी है. डायरेक्ट टैक्स कोड, समयबद्ध सेवाओं का कानून, पेंशन, फॉरवर्ड कांट्रैक्ट, माइक्रोफाइनेंस, बीज और कीटनाशक कानून, लोकपाल, महिला आरक्षण आदि की लम्बी सूची है.
अनुसूचित जातियों-जनजातियों को सरकारी नौकरियों की प्रोन्नति में आरक्षण का संशोधन विधेयक राज्यसभा से पास हो गया था. उसे लोकसभा से पास किया जाना है.
इस बीच खबरें हैं कि इंश्योरेंस पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को लेकर सरकार और भाजपा के बीच किसी फॉर्मूले पर सहमति हुई है.
हालांकि तेलंगाना राज्य की घोषणा सरकार ने कर दी है, पर यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उससे जुड़ा विधेयक इस सत्र में पेश नहीं होगा.
संसद के सामने कानूनों को पास करने के अलावा देश के सामने खड़े मसलों पर विचार भी करना है. उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा के बाद आपदा प्रबंधन का मसला है.
उत्तर प्रदेश में दुर्गा नागपाल के निलंबन का मामला भी जोर-शोर से उठ सकता था. उठ पाएगा या नहीं यह आज स्पष्ट होगा.
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