बाढ़ को दावत देती है 'तालमेल की कमी'

- Author, नवीन सिंह खड़का
- पदनाम, पर्यावरण संवाददाता, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
दक्षिण एशियाई देशों के बीच तालमेल की कमी के कारण बाढ़ की चेतावनी समय से नहीं मिल पाती है, जबकि ऐसा करके मॉनसून के दौरान बड़ी संख्या में जान-माल को बचाया जा सकता है.
अत्यधिक बारिश अक्सर <link type="page"><caption> विनाशकारी बाढ़</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/07/130715_uttarakhand_flood_relief_camp_gallery_dp.shtml" platform="highweb"/></link> का रूप ले लेती है, जैसा कि हाल में उत्तर-पश्चिम भारत और नेपाल में हुई भारी बारिश के बाद देखने को मिला.
पानी के इस्तेमाल पर विवाद के चलते जलविज्ञान संबंधी आंकड़ों को साझा करना एक संवेदनशील मसला है.
अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न देशों में आंकड़ों के लेनदेन के लिए एक नेटवर्क की दरकार है.
विशेषज्ञों और अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि इस क्षेत्र के देश बाढ़ की भविष्यवाणी में एक दूसरे की मदद के लिए बहुत कम काम कर रहे हैं.
सूचनाओं का अभाव
बीते महीने की घटना का जिक्र करते हुए नेपाल के धारचुला जिले के मुख्य जिलाधिकारी चिरंजीवी अधिकारी ने बताया कि, “हमें भारत से भयानक बारिश के बारे में कोई चेतावनी नहीं मिली.” धारचुला की सीमा बाढ़ प्रभावित उत्तराखंड से लगी हुई है.
भारत से नेपाल में जाने वाली महाकाली नदी में बाढ़ के कारण नेपाल में 30 से अधिक लोगों की जान गई और कई भवनों को नुकसान पहुँचा.
<link type="page"><caption> उत्तराखंड में आई इस भीषण तबाही</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/indepth/uttarakhand_flood_special_ml.shtml" platform="highweb"/></link> के कारण करीब 1,000 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है और हजारों लोग अभी भी लापता हैं.
चिरंजीवी अधिकारी ने बीबीसी के बताया कि, “हम बाढ़ के कारण जानने के लिए उनसे (भारतीय अधिकारियों) लगातार संपर्क कर रहे हैं, लेकिन अभी तक टेलीफोन पर कोई संपर्क नहीं हो सका है. ”

इसी तरह दक्षिण एशिया में अफगानिस्तान और <link type="page"><caption> पाकिस्तान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/05/130512_pak_nawaz_sharif_challenges_fma.shtml" platform="highweb"/></link> से होकर गुजरने वाली काबुल नदी के चलते 2010 में पाकिस्तान में भयानक बाढ़ आई. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच बाढ़ के पूर्वानुमान को लेकर आज तक किसी तरह का संवाद कायम नहीं हो सका है.
क्षेत्र में बाढ़ से सबसे अधिक तबाह होने वाले बांग्लादेश को नेपाल से काफी कम जलविज्ञान संबंधी आंकड़े मिलते हैं.
कर्मचारियों की कमी
नेपाल के जलविज्ञान और मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पहले वे फैक्स के जरिए ढाका को सूचनाएँ भेजते थे, लेकिन अब कर्मचारियों की कमी के कारण परेशानी हो रही है.
पाकिस्तान को भी भारत से सीमित मात्रा में जलविज्ञान संबंधी आंकड़े मिलते हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ की सटीक भविष्यवाणी करने के लिए ये आंकड़े अपर्याप्त हैं.
पाकिस्तान के एक अधिकारी रियाज बताते हैं, “उदाहरण के लिए भारत से सिंधु जल आयोग को केवल उस समय सूचना मिलती है जब चिनाब नदी का जलस्तर 75,000 क्यूसेक को पार कर जाता है.”
उन्होंने बताया, “ऐसे में लोगों को निकालने और बाढ़ की तैयारी करने के लिए काफी कम समय मिलता है.”
चिनाब सिंधु की एक प्रमुख सहायक नदी है और यह तिब्बत से निकल कर भारत के रास्ते पाकिस्तान में प्रवेश करती है.
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी के जल बंटवारे को लेकर गहरी असहमति है और इसे लेकर मुकदमा भी चल रहा है.
सुधार की उम्मीद

दूसरी ओर <link type="page"><caption> बांग्लादेश</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/" platform="highweb"/></link> में अधिकारियों का कहना है कि भारत के साथ आँकड़ें के लेनदेन में कुछ सुधार हुआ है और उन्हें भारत से गंगा के लिए तीन स्थानों से और ब्रह्मपुत्र के लिए चार स्थानों से सूचनाएँ मिल रही हैं.
बांग्लादेश के मुख्य बाढ़ चेतावनी अधिकारी अमिरुल हुसैन ने बताया कि उनके देश को तिब्बत स्थित चीनी अधिकारियों से ब्रह्मपुत्र के आंकड़े मिलते हैं.
भारत में जलविज्ञान संबंधी आंकड़े काफी संवेदनशील मुद्दा है, खासकर उन राज्यों के बीच जहाँ पानी के बंटवारे को लेकर कुछ अनबन है.
नेपाल के मौसम कार्यालय में बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग के प्रमुख राजेंद्र शर्मा ने कहा, “इस क्षेत्र में बाढ़ की सही भविष्यवाणी के लिए भारत और चीन सहित सभी देशों को जलविज्ञान और मौसम संबंधी आंकड़ों के लेनदेन के लिए सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए.”
भारतीय अधिकारी भी सीमापार आंकड़ों के लेनदेन के महत्व के स्वीकार करते हैं. भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष शशिधर रेड्डी ने कहा, “जो बातें कागजों पर होती है, उन पर अमल नहीं हो पाता है”, हालांकि उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में हालात सुधरेंगे.
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