ज़मीन अधिग्रहण में देरी, स्टील प्लांट योजना रद्द

दुनियां की सबसे बड़ी स्टील कंपनी आरसेलर मित्तल ने ओड़िसा में प्लांट लगाने की योजना रद्द कर दी है.
साल 2006 में ये तय पाया गया था कि ये स्टील प्लांट केओनझार ज़िले में लगाया जाएगा और इसकी वार्षिक क्षमता 12 लाख टन सालाना होगी.
कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा है, "आरसेलर मित्तल स्टील प्लांट के लिए ज़रूरी ज़मीन का इंतज़ाम नहीं कर पाया है. न ही उसके पास अपनी (कैप्टिव) लौह अयस्क की खान है. ये प्लांट के लिए अहम है."
"इसलिए मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए आरसेलर मित्तल ने फ़ैसला किया है कि वो ओड़िसा के केओनझार में स्टील प्लांट तैयार करने की अपनी योजना पर काम नहीं करेगा."
दूसरी कंपनी
हालांकि कंपनी ने कहा कि वो झारखंड और कर्नाटक में प्लांट तैयार करने की योजना पर क़ायम है.
चंद दिनों पहले ही एक अन्य <link type="page"><caption> स्टील कंपनी पॉस्को</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/03/120330_posco_clearence_sm.shtml" platform="highweb"/></link> ने दक्षिण भारत में 5.3 अरब डॉलर का प्लांट लगाने की योजना रद्द करने की बात कही है.
बीबीसी संवाददाता समीर हाशमी का कहना है कि कंपनियों को ज़मीन हासिल करने में दिक्क़ते आ रही हैं क्योंकि अक्सर किसान कंपनी के ज़रिये ज़बरदस्ती या फिर कम पैसे दिए जाने की शिकायत करते हैं.
लेकिन समीर हाशमी ने ये भी कहा कि इन प्लांटो को लगाने की योजना सालों पहले तैयार की गई थीं और इन सालों में आर्थिक स्थिति में काफी बदलाव आया है.
वो कहते हैं कि दुनियां की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में धीमेपन का दौर जारी है और ज़ाहिर है इन हालात में स्टील की मांग भी घटी है.
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