उत्तराखंड: सड़कों का धँसना जारी, सफ़र मुश्किल

- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, रुद्रप्रयाग से
महज़ दो मिनट पहले तक जो सड़क तिलवारा को सिल्ली और अगस्तमनी से जोड़े हुए थी वो धँसकर अलकनंदा नदी में समा गई. अब जो जहाँ है वहीं फँसा हुआ है.
रुद्रप्रयाग से तिलवारा का रास्ता भी कुछ ऐसा ही है. दूरी सिर्फ़ नौ किलोमीटर की है मगर वहाँ जाया नहीं जा सकता है. पांच किलोमीटर तक तो गाड़ी जा सकती है. मगर फिर गाड़ी को वहीं छोड़कर पैदल पहाड़ पारकर फिर दूसरी तरफ खड़ी गाड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है.
लोगों की परेशानियां यहीं ख़त्म नहीं होतीं. तिलवारा से सिल्ली का रास्ता मेरी आँखों के सामने देखते-देखते . अब वहाँ जाना मुमकिन नहीं है. ये रास्ता इस इलाक़े को केदारनाथ से जोड़ता है.
अलकनंदा में तेज़ बहाव
सड़क के धंसने की ख़बर के बाद सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के लोग मौक़े पर पहुंचे. आम लोगों और बीआरओ के राजेश गर्ग के बीच बहस चल रही है. लोगों का कहना है कि वे उत्तराखंड में पैदा हुए हालात के सामने खुद को बिलकुल बेबस समझ रहे हैं. उनका कहना है कि सड़कें संकीर्ण ही बनाई जा रही हैं.
बीआरओ के राजेश गर्ग कहते हैं कि इस जगह की भौगोलिक स्थिति इस तरह की है कि ज़्यादा कुछ किया नहीं जा सकता है.
ये सड़क अलकनंदा नदी के किनारे पर है. अलकनंदा के उफान नें इस इलाके में काफी तबाही मचाई है. पानी तो कम हो गया मगर बहाव इतना ज़ोरदार था कि किनारे कमज़ोर हो चुके हैं.
तिलवारा को सिल्ली से जोड़ने वाली इस सड़क के नीचे के हिस्से को पानी ने काट दिया है. अब जगह-जगह पर इसका धँसना शुरू हो गया है. पहाड़ों से बरसते पत्थर और नीचे से खिसकती ज़मीन ने ज़िन्दगी को चुनौती भरा बना दिया है.
क़िस्मत के सहारे सफ़र
राजेश गर्ग ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि ये तो कुछ भी नहीं है. कुछ ही दूर आगे विजय नगर के पास तो सड़क इस तरह नदी में समा गई जैसे ताश का पत्ता.
गर्ग बताते हैं, "विजय नगर पर आवाजाही बहाल करने के लिए हमें काफ़ी मेहनत करनी पड़ी. रात दिन भिड़कर किसी तरह इस रास्ते को काम चलाऊ बनाया गया. सड़कों का अचानक धँसना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है."

आपदा के बाद से उत्तराखंड के उत्तरी इलाक़े की सभी सड़कें कमज़ोर और इन पर सफ़र जोखिम भरा हो गया है. कब सड़क का कौन सा हिस्सा कितने मीटर नीचे धँस जाएगा, ये कोई नहीं बता सकता.
सड़कों पर सब अपनी रखकर सफ़र कर रहे हैं. चाहे राहत सामग्री ले जाने वाले वाहन हों या फिर यात्री वाहन. यहाँ हर किसी को हर वक़्त ख़ुशक़िस्मत होना ज़रूरी है.
मौसम भी अब साथ नहीं दे रहा है. रुक-रुक कर हो रही बारिश और आने वाले दिनों में ज़बरदस्त बारिश के पूर्वानुमान ने उत्तराखंड के उत्तरी इलाक़ों में रह रहे लोगों को किस्मत के हवाले कर दिया है.
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