'मैं सुज़ैट हूँ, पार्क स्ट्रीट की रेप विक्टिम नहीं'

- Author, रुपा झा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
'मेरा नाम सुज़ैट जोर्डन है. अब से मुझे पार्क स्ट्रीट की बलात्कार पीड़िता कहकर न बुलाएं...' कोलकाता से फोन पर सुज़ैट ने जब ये बात कही तो उनकी आवाज़ से छलक रहे आत्मविश्वास को महसूस किया जा सकता था.
लगभग पंद्रह महीनों के बाद <link type="page"><caption> सुजै़ट जोर्डन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/11/121104_mamata_teen_kanya_ban_pa.shtml" platform="highweb"/></link> अपनी पहचान दुनिया से दोबारा करवा रही हैं.
पिछले साल फरवरी से उन्हें कोलकाता के पार्क स्ट्रीट की बलात्कार पीड़िता के नाम से ही जाना जा रहा था.
इतने महीनों के बाद इस फैसले की वजह?
जवाब में वह कहती हैं, "मैं थक चुकी हूँ समाज से, दुनिया के उसूलों से... अब किसी बात का फर्क नही पड़ता है. औरतों पर कितनी हिंसा हो रही है लेकिन कोई बोलने वाला नहीं है. हम सब डरते हैं. मेरी पहचान मेरे मां बाप ने दी है और मुझे इस पर गर्व है. मैं अपने आप को सम्मान देना चाहती हूँ इसीलिए निकलकर बाहर आई हूँ."
ज़िंदगी बदल गई
फोन पर बातें करते हुए सुज़ैट की तस्वीर मेरी आंखों के सामने उतर रही थी. 38 साल की महिला, दो बेटियों की माँ. पति से 11 साल पहले अलगाव हो गया था. वह अपने मां-बाप के साथ कोलकाता में रहती हैं.
फ़रवरी की उस रात वे कोलकाता के एक जाने माने नाइट क्लब से निकलीं. उस क्लब में उनकी दोस्ती जिस व्यक्ति से हुई उसने सुज़ैट के सामने उसे घर छोड़ने का प्रस्ताव रखा. जिस गाड़ी में वे बैठी थीं उसमे और भी लोग थे.
सुज़ैट का आरोप है कि चलती कार में पूरी रात उनका बलात्कार किया गया. उन लोगों ने तड़के सुज़ैट को गाड़ी से बाहर फेंक दिया.
उसके बाद उनकी जिंदगी वैसे ही बदल गई जैसे अमूमन ऐसी हिंसा के बाद <link type="page"><caption> भारतीय समाज</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/12/121228_india_rape_singapore_ns.shtml" platform="highweb"/></link> में बदलती है.
"मैं जहां रहती थी, उस घटना के बाद मुझे वो घर छोड़ना पड़ा. लोग मुझ पर ताने मारते थे और मेरी बच्चियों को भी ये सब सुनना पड़ता था. मैंने उस घटना को किसी से छिपाकर नहीं रखा था. उस हादसे के बाद जब मेरे पुरूष मित्र घर आते थे, तो मेरे मोहल्ले के लोग मेरे बारे में बुरी-बुरी बातें करते थे."
'बलात्कार को न्यौता'

अपना दर्द बयान करते हुए उन्होंने कहा, "चूंकि उस रात मैं डिस्को से निकली थी तो मुझे ही इस <link type="page"><caption> बलात्कार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/12/121229_all_india_protest_pn.shtml" platform="highweb"/></link> का दोषी जैसा महूसस कराया जा रहा था. जैसे मैंने ही बलात्कार को न्यौता दिया था. मुझे वेश्या तक बुलाया गया. मैं पूरी तरह टूट चुकी थी."
सुज़ैट बहुत सारी बातें बहुत जल्दी करना चाहती हैं. ऐसा लगा कि एक सांस में पिछले 15 महीनों की छटपटाहट बाहर लाना चाहती हैं.
कहती हैं कि वे लोगों के रवैये से इतनी परेशान हो गई थीं कि कई बार आत्महत्या तक की सोची, लेकिन उनकी बच्चियों ने उन्हें हमेशा रोक लिया.
"मैं आज भी बाहर निकलती हूं तो डर लगता है लेकिन उस डर को जीतना चाहती हूं और उसी कोशिश में जब दूसरी औरतों की मदद करने के लिए सरवाइवर्स फॉर विक्टिम्स ऑफ़ सोशल जस्टिस नाम की हेल्पलाइन में काम करना शुरू किया तो ऐसा लगा कि मेरा दर्द साझा हो गया है."
लेकिन वो कौन सा लम्हा था जब सुज़ैट ने पार्क स्ट्रीट रेप विक्टिम की पहचान को हमेशा के लिए मिटा देने का फैसला लिया.
"इस रेप विक्टिम की पहचान के साथ मैं बिल्कुल नहीं रह सकती थी. मैं अपनी बच्चियों के साथ सर उठाकर जीना चाहती हूं. जब पिछले दिनों एक वैसी लड़की के मां बाप से मुलाकात हुई जिसके साथ बलात्कर कर उसे मार दिया गया था, मेरे अंदर सबकुछ जम गया..बर्फ की सिल्ली की तरह. आखिर हम क्यों नहीं सामने आते हैं. अपना चेहरा क्यों नहीं दिखलाना चाहते हैं."
मर्दों पर भरोसा?
"मैंने तय किया मुझे अपना सम्मान और अपनी पहचान वापस चाहिए और फिर सब कुछ आसान हो गया."
सुज़ैट नहीं जानतीं कि उन्हें न्याय मिलेगा या नहीं. उनके मामले की सुनवाई कोलकाता के फास्ट ट्रैक कोर्ट में अभी चल रही है. तीन लोग इस मामले में गिरफ्तार भी किए गए हैं. दो लोग पकड़े नहीं गए.
हालांकि गिरफ्तार किए गए तीनों लोगों ने खुद को बेकसूर बताया है.
वे कहती हैं कि इस लड़ाई में वे पीछे नहीं हटेंगी.
बलात्कार के इस मामले में मुख्यमंत्री <link type="page"><caption> ममता बनर्जी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/07/120729_kolkata_assault_sa.shtml" platform="highweb"/></link> ने ये कहकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था कि ये उनकी सरकार को <link type="page"><caption> बदनाम</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130520_mamata_intellectuals_tb.shtml" platform="highweb"/></link> करने के लिए मन से गढ़ी गई घटना है.
सुज़ैट ऐसे <link type="page"><caption> राजनीतिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/12/121229_all_india_protest_pn.shtml" platform="highweb"/></link> विवादों और बयानबाजी से अलग रहना चाहती हैं.
क्या मर्दों पर भरोसा अब भी करती हैं?
मेरे इस सवाल पर ठहाके लगाकर हंसती सुज़ैट कहती हैं, "अगर ये सवाल एक औरत ने एक औरत से पूछा है तो जवाब है नहीं."
"मुझे पता है माफ कर आगे बढ़ना ही मेरा मरहम है, पर मेरा दिल इसकी गवाही नहीं देता."
बातचीत के आख़िर में सुज़ैट कहती हैं, "मेरी तस्वीर को धुंधला मत करना, न ही मेरी आवाज़ को बदलना... मैं सुज़ैट जोर्डन हूं. पार्क स्ट्रीट रेप विक्टिम नहीं. इसी पहचान के साथ सर उठाकर जीना चाहती हूं."
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