उत्तराखंड: लंबे समय तक भूल नहीं पाएँगे तबाही की ये तस्वीरें

उत्तर भारत में क़ुदरत के क़हर का सबसे ज़्यादा असर पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में देखा जा रहा है.
कई दिनों की मूसलाधार बारिश और फिर बाढ़ व भूस्खलन के चलते सिर्फ़ उत्तराखंड में ही 150 लोग लोग मारे जा चुके हैं और हज़ारों लोग अभी भी फंसे हुए हैं.
आइए उन इलाकों पर एक नज़र डालते हैं जो इस प्राकृतिक आपदा से सर्वाधिक प्रभावित हैं.
उत्तराखंड(गढ़वाल मंडल)

केदारनाथ: देहरादून से 239 किमी, लगभग 12 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई पर
बताया जा रहा है कि सबसे ज़्यादा तबाही केदारनाथ में हुई.केदारनाथ मंदिर का मुख्य हिस्सा और सदियों पुराना गुंबद तो सुरक्षित है, लेकिन उसके अलावा सब कुछ या तो पानी में बह गया है या फिर वहां पानी भरा हुआ है.
केदारनाथ में बड़ी तादाद में होटल,लॉज और दुकानें बह गए हैं और चारों तरफ़ मलबा बिखरा पड़ा है.

रुद्रप्रयाग ज़िले में मौजूद प्राचीन केदारनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है.
हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु भगवान केदारनाथ के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से आते हैं. केदारनाथ यात्रा उत्तराखंड के चार प्रमुख धाम यात्राओं में से एक है. इसके अलावा बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम हैं.
रामबाड़ा: गौरीकुंड-केदारनाथ मार्ग पर एक पड़ाव, देहरादून से 232 किमी

गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर सात किलोमीटर दूर स्थित यह जगह केदारनाथ यात्रा मार्ग का एक प्रमुख पड़ाव है, जो कि पूरी तरह तबाह हो गया है.
उत्तराखंड के मंत्री हरक सिंह रावत ने वहां का दौरा करने के बाद कहा कि रामबाड़ा का तो नामोनिशान ही मिट गया है. रामबाड़ा में रविवार रात बादल फटा था.
रामबाड़ा बाज़ार में लगभग 100 दुकानें हैं और यात्रा काल में वहां पांच-छह सौ लोग हमेशा रहते हैं लेकिन अब शायद कुछ भी नहीं बचा.
गौरीकुंड: देहरादून से लगभग 225 किमी दूर

यहीं से केदारनाथ मंदिर की चढ़ाई शुरू होती है यानी यहां तक तो सड़क पर गाड़ियों के सहारे जाया जा सकता है लेकिन केदारनाथ मंदिर जाने के लिए यहां से पैदल, ख़च्चर के ज़रिए या फिर हेलिकॉप्टर के ज़रिए ही पहुंचा जा सकता है.
गौरीकुंड कस्बे का बड़ा हिस्सा नदी में बह गया है.
सोनप्रयाग: केदारनाथ नेश्नल हाईवे पर बसा शहरा

सोनप्रयाग का बाज़ार पूरी तरह बह गया है. ये भी पानी में विलीन हो गया है.
चंद्रापुरी: देहरादून से लगभग 180 किमी दूर
यहां भी कई होटल और लॉज पानी में बह गए हैं.
बदरीनाथ: ज़िला चमोली, देहरादून से 336 किमी दूर

पीटीआई ने चमोली ज़िला के अतिरिक्त ज़िलाधिकारी संजय कुमार के हवाले से ख़बर दी है कि बद्रीनाथ में अब भी 12 हजा़र लोग फंसे हुए हैं.
अधिकारियों के अनुसार मंगलवार को बंसीनाराय़ण इलाक़े से आठ शव मिले थे. ऐसी आशंका है कि ये लोग रविवार को ही बह गए थे और मंगलवार को उनके शव मिले.
उत्तराखंड(कुमाऊं मंडल)
पिथौरागढ़: कुमाऊं मंडल में ज़्यादा तबाही नहीं

ज़िले के धारचुला इलाक़े में सोमवार देर शाम बादल फटने से काफ़ी जान-माल का नुक़सान हुआ. मरने वालों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है.
झूला पुल: काली नदी के उफ़ान से जौलजीबी अंतरराष्ट्रीय झूला पुल का नामोनिशान मिट गया है जिससे भारत-नेपाल के बीच आवाजाही ठप हो गई है.
हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश में सबसे ज़्यादा तबाही किन्नौर ज़िले में मची जहाँ 10 लोगों की जान गई और लगभग 100 घरों को नुक़सान पहुंचा.
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले में सोमवार को 15 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो गई थी. मंगलवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश से भी चार लोगों के मारे जाने की ख़बर है. इस तरह से इस बाढ़ में अब तक उत्तर प्रदेश में कुल 19 लोग मारे गए हैं.
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