उत्तर भारत में बारिश से क़हर जारी, 60 मरे

बारिश से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी तबाही हुई है. अब तक 60 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लापता हैं. चार धाम यात्रा पर गए हज़ारों यात्री जगह-जगह फंस गए हैं.
हालांकि मौसम विभाग ने उम्मीद जताई है कि मंगलवार को हालात में सुधार होगा.
पिछले 48 घंटों में हुई तेज़ बारिश के कारण अकेले उत्तराखंड में 40 लोग मारे गए हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश में 10 लोग मारे गए हैं.
उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में राष्ट्रीय राजमार्ग 58 में कई स्थानों पर पानी आने से कई इलाकों का संपर्क कट गया है.
जबकि कुमाऊँ मंडल में पिथौरागढ़ ज़िला सबसे ज़्यादा प्रभावित है जहां कई गांव बह गए हैं और कई पर ख़तरा है. अल्मोड़ा में भूस्खलन से चार लोगों की मौत हो गई है.
उत्तराखंड में हो रही बारिश का असर उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में भी पड़ा जहां से लगभग 15 लोगों के मारे जाने की ख़बर है.
पानी ही पानी
पिथौरागढ़ से स्थानीय पत्रकार मुकेश पंत के अनुसार काली, गोरी और धौली गंगा तीनों नदियां उफ़ान पर हैं. धारचूला, मुनस्यारी सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्र हैं.
नदियों के किनारों पर बसे 100 से ज़्यादा गाँवों को ख़तरा है. कई गाँव बह गए हैं.
200 से ज़्यादा लोगों को प्रशासन ने विस्थापित किया है. प्रशासन ने पूरे ज़िले में रेड अलर्ट घोषित कर दिया है.
अल्मोड़ा में आपदा कंट्रोल रूम ने बस हादसे में चार लोगों की मौत की पुष्टि की है.
कंट्रोल रूम के अनुसार दिल्ली से गंगोलीहाट जा रही बस भूस्खलन की चपेट में आ गई.
पहाड़ से गिरे मलबे के साथ बस खाई में जा गिरी जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए.
श्रीनगर से स्थानीय संवाददाता गजेंद्र मैठाणी के अनुसार आईआईटी, एसएसबी कैंप, शक्ति विहार, अलकनंदा विहार, नया बस अड्डा, तिवाड़ी मोहल्ला, सिरकोट क्षेत्र में अलकनंदा का पानी भर गया है.
धारी देवी मंदिर भी पानी में डूब गया है- यहां से मूर्ति रविवार रात को ही हटा ली गई थी. श्रीनगर जलविद्युत परियोजना का निर्माणाधीन पावर हाउस भी ढह गया है.

राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर पूरा पानी भर गया है और हज़ारों तीर्थयात्री फंस गए हैं. शहर के होटल भर गए हैं और यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
उत्तरकाशी से स्थानीय पत्रकार बलबीर के अनुसार वहां लगातार बारिश हो रही है. भागीरथी ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही है.
ज़िले में कई जगह खेत बह गए हैं.
राष्ट्रीय राजमार्ग कई जगह से कट गया है और 10-12 हज़ार यात्री जगह-जगह फंसे हुए हैं.
आपदा कंट्रोल रूम ने स्थानीय पत्रकारों को दो मौतों की पुष्टि की है.
बलबीर के अनुसार झाला गांव के पास करीब एक हज़ार बकरियों के साथ उनका चरवाहा बह गया है.
एक गुजराती महिला पर्यटक की भूस्खलन के दौरान पत्थर लगने से मौत हो गई है.
शहर क्षेत्र को छोड़कर ज़िले में कहीं बिजली नहीं है और लोग बिजली-पानी के संकट से जूझ रहे हैं.
हरिद्वार से स्थानीय पत्रकार धर्मेंद्र चौधरी के अनुसार सोमवार दोपहर तक गंगा नदी ख़तरे के निशान से डेढ़ मीटर ऊपर बह रही थी.
गंगा में सामान्य के चार गुना से भी ज़्यादा पानी आ रहा है.
हरिद्वार के लक्सर क्षेत्र में करीब एक दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं.
फ़ेसबुक से
बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक पेज पर भी पाठकों ने आँखों-देखा हाल भेजा है.
फ़ैसल खान- मैं सुबह आठ बजे से जाम और भारी बारिश में फंसा हूं. यहां पत्थरों का गिरना सबसे बड़ी दिक्कत है. मैं अमरीकी टूरिस्टों के साथ टूर गाइड हूं. हम जल्दी से जल्दी सुरक्षित अपने घर पहुंचना चाहते हैं. हेमकुंट साहिब, वैली ऑफ फ्लावर और चार धाम की यात्रा की योजना बना रहे लोग कृपया अपने कार्यक्रम टाल दें. हमने अपने जीवन का सबसे बड़ा दुःस्वप्न देखा है.
सिद्धार्त सती- मैं चमोली के कंटयार में हूं और यहीं का रहने वाला हूं. सुबह से ही बारिश हो रही है और बहुत नुकसान हुआ है. पूरे इलाक़े में पानी भरा हुआ है और हमें बहुत नुकसान हुआ है. कई घर टूट गए हैं.
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