बीसीसीआई में बिग बॉस जैसा ड्रामा: कीर्ति आज़ाद

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई के प्रमुख एन श्रीनिवासन पर इस्तीफ़ा देने का दबाव बढ़ रहा है.
स्पॉट फ़िक्सिंग विवाद में जब से उनके दामाद गुरुनाथ मेयप्पन का नाम आया है, श्रीनिवासन भी सवालों के घेरे में हैं.
इसी क्रम में बुधवार को आईपीएल कमिशनर राजीव शुक्ला ने क्रिकेट बोर्ड के उपाध्यक्ष अरूण जेटली से बातचीत के बाद कहा कि श्रीनिवासन को मामले की जांच पूरी होने तक उस प्रक्रिया से बिल्कुल दूर रहना चाहिए.
साथ ही उन्होंने कहा कि स्पॉट फिक्सिंग की जांच करने के लिए बन रही तीन सदस्यीय समिति में बीसीसीआई के केवल एक ही अधिकारी हैं. उन्होंने ये भी ज़ोर देकर कहा कि समिति की सिफ़ारिश को पूर्ण रूप से लागू किया जाना चाहिए.
बीसीसीआई में 'ड्रामा'
पूर्व क्रिकेटर और भाजपा सांसद कीर्ति आज़ाद ने बीबीसी से बातचीत में कहा की ये महज़ एक ड्रामा भर है.
उन्होंने कहा, “ये तो एक राजनीतिक ड्रामा है, राजीव शुक्ला एक उप समिति के अध्यक्ष है और अरुण जेटली बीसीसीआई के उपाध्यक्ष. क्या इन दोनों के कहने से बोर्ड मान जाएगी. मुझे ये बिग बॉस का ड्रामा लगता है, हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और है.”
श्रीनिवासन और बोर्ड के बाक़ी सदस्यों की नैतिकता पर सवाल उठाते हुए कीर्ति आज़ाद ने कहा, “दुनिया पूछ रही है कि वो इस्तीफ़ा क्यो नहीं दे रहे हैं, इसका कोई भी जवाब भी सीधा नहीं दिया जा रहा. बोर्ड के सदस्य नैतिकता की बात करते है लेकिन कहते है कि आरटीआई में नहीं आएंगे.”
उन्होंने आगे कहा, “एक तरफ ज्योतिरादित्य सिंधिया और राजीव शुक्ला हैं, जो कहते हैं कि श्रीनिवासन को इस्तीफा देना चाहिए, लेकिन दूसरी तरफ फ़ारूख़ अब्दुल्लाह इस्तीफ़े का विरोध कर रहे हैं. हम तो उनका ड्रामा देख रहे हैं.”
कीर्ति आज़ाद का मानना है कि बीसीसीआई को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए भीतर के लोगों को ही कदम उठाने पड़ेंगे.
आईपीएल का भ्रष्टाचार

उन्होंने कहा, “बीसीसीआई के अंदर आईपीएल के माध्यम से जिस प्रकार का भ्रष्टाचार घुस गया है उसके इलाज के लिए तो अंग ही काटना पड़ेगा. लेकिन इस बीच आपस में ही लड़ाई शुरु हो चुकी है. कोई इधर भाग रहा है, कोई उधर भाग रहा है.”
बीसीसीआई के भीतर कथित तौर पर होने वाली लॉबिंग के बार में कीर्ति आज़ाद ने कहा कि सदस्य एक दूसरे से बैर लेना नहीं चाहते हैं और इसका कार्रवाई पर असर पड़ता है.
उन्होंने कहा, “सदस्यों के बीच भी राजनीति होती है लेकिन कोई किसी को दुश्मन नहीं बनाना चाहता. इनका इलेक्टोरल कॉलेज बहुत छोटा है, सिर्फ 31 लोगों का. कोई किसी के खिलाफ बोलेगा तो उसका वोट कट जाएगा, इसलिए कोई किसी को दुखी नहीं करना चाहता.”
पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आज़ाद से बीबीसी संवाददाता फ़ैसल मोहम्मद अली की बातचीत पर आधारित.
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