भारत में इंटरनेट स्पीड की 'सच्चाई'

इंटरनेट
इमेज कैप्शन, इंटरनेट रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है.
    • Author, प्रशांतो कुमार रॉय
    • पदनाम, वरिष्ठ आईटी पत्रकार

भारत में <link type="page"><caption> इंटरनेट</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/05/130514_20best_android_apps_tb.shtml" platform="highweb"/></link> स्पीड को लेकर बहस जारी है. टूजी से लेकर 5जी तक की तकनीकी शब्दों के दरम्यां स्पेक्ट्रम और <link type="page"><caption> स्पीड</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130508_facebook_figures_skj.shtml" platform="highweb"/></link> को लेकर काफी कुछ कहा सुना जा रहा है.

ये अच्छी बात है कि प्रयोग किए जा रहे हैं और नतीजतन दो चीजें हो रही हैं. एक तो स्पीड बढ़ती जा रही है. <link type="page"><caption> वायरलेस</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/05/130508_internet_security_tips_skj.shtml" platform="highweb"/></link> ट्रांसफर की स्पीड.

और उससे भी महत्वपूर्ण यह है कि जो स्पेक्ट्रम उपलब्ध है उसी में ज्यादा चैनल्स और अधिक से अधिक इस्तेमाल करने वालों की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश की जा रही है.

लेकिन अगर आप ये सोचेंगे कि एक साल बाद हम एक पूरी बड़ी <link type="page"><caption> एचडी मूवी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/05/130510_youtube_pay_channel_ra.shtml" platform="highweb"/></link> या ब्लू-रे फिल्म एक सेकेंड में फोन पर डाउनलोड कर लेंगे तो यह मुमकिन नहीं क्योंकि यह पूरे स्पेक्ट्रम पर निर्भर करेगा.

असलियत में कम स्पीड

और हम ये देख रहे हैं कि जो थ्रीजी अभी मौजूद है, उसकी स्पीड के बारे में कई तरह की बातें की जाती हैं. जैसे तीन मेगाबाइट प्रति सेकेंड या सात या 12 एमबीपीएस की डाउनलोडिंग स्पीड.

लेकिन असलियत में हमें जो स्पीड मिलती है वह बेहद कम होती है. कभी-कभी 100 किलो बाइट प्रति सेकेंडे तक.

यह तकनीक की समस्या नहीं है. यह यहां के तौर-तरीकों की समस्या है. यह स्पेक्ट्रम और अन्य उपलब्ध चीजों की समस्या है.

अब भारत में देखिए कि यहां मौजूद 80-90 करोड़ मोबाइल फोन हैं और वे एक ही स्पेक्ट्रम पर काम कर रहे हैं.

और अब जब कि यह कहा जा रहा है कि इतने ही लोग थ्रीजी इस्तेमाल करने लगेंगे और मूवीज <link type="page"><caption> डाउनलोड</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130409_webcontent_store_pkp.shtml" platform="highweb"/></link> करने लगेंगे तो इतना बैंडविथ उपलब्ध ही नहीं है.

यह एक बड़ी समस्या है. पर ये अच्छी बात है कि इसको लेकर रिसर्च किए जा रहे हैं कि इतने ही स्पेक्ट्रम में कैसे <link type="page"><caption> बैंडविथ</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/02/130221_britain_4g_spectrum_va.shtml" platform="highweb"/></link> का पूरा इस्तेमाल हो सके, कैसे ज्यादा चैनल्स हो सके और ज्यादा लोग फोन पर बात कर सकें.

सभी को एक जैसी स्पीड मिले ?

कंप्यूटर कीबोर्ड
इमेज कैप्शन, इंटरनेट स्पीड को लेकर भारत में हर जगह एक जैसी स्थिति नहीं है.

ये एक मुश्किल चुनौती है. आप कहीं भी जाएं. यह समस्या अमरीका में भी है. पर अलग वजहों से.

वहां ऊंची इमारते हैं जिसकी वजह से वहां एक जैसी कवरेज नहीं है.

लेकिन इसके बावजूद वहां भारत से बेहतर स्पीड है. हमारे यहां एक जैसी स्पीड की समस्या है.

यह बहुत बड़ा देश है और यहां पर लगभग दस लाख के आस-पास मोबाइल टावर ही हैं जो पर्याप्त नहीं है.

इससे दो चीजें होती हैं. एक तो एक जैसी नेटवर्क कवरेज नहीं है. शहर में थ्री जी मिलेगा, शहर से बाहर निकलो तो वह टूजी हो जाएगा.

स्पीड पर दबाव

दूसरी बात यह कि शहर में अगर थ्री जी मिलेगा भी तो वहां इसका इस्तेमाल ज्यादा है और स्पीड पर लोगों का दबाव भी ज्यादा.

अगर आप किसी ट्राफिक जाम में फंसते हैं तो पाएंगे कि स्पीड बेहद कम हो गई है क्योंकि उस घड़ी कई लोग एक ही टावर से मिल रहे <link type="page"><caption> नेटवर्क</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/business/2010/04/100409_3g_auction_as.shtml" platform="highweb"/></link> का इस्तेमाल कर रहे होते हैं.

अगर आप कहीं बाहर जाएं जहां थ्रीजी उपलब्ध है तो पाएंगे कि वहां स्पीड बेहतर है क्योंकि कम लोग इसका इस्तेमाल कर रहे होते हैं.

यह बहुत मुश्किल है कि अगले पांच सालों में भी सभी को एक जैसी इंटरनेट स्पीड हर जगह पर मिल पाएगी.

(बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव से बातचीत पर आधारित)

<italic>(बीबीसी हिन्दी के <link type="page"><caption> एंड्रॉएड ऐप</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए यहां <link type="page"><caption> क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर <link type="page"><caption> फ़ॉलो</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> भी कर सकते हैं.)</italic>