महिलाओं को कंडोम बेचने में आती है लाज

मध्य प्रदेश के दमोह ज़िले में काम कर रही महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का कहना है कि वो सरकार के परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत घर-घर जाकर <link type="page"><caption> कंडोम</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/02/130216_condom_hiv_aa.shtml" platform="highweb"/></link> नहीं बांटना चाहती हैं.
इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस काम को करने में उन्हें शर्मिंदगी होती है. पूरे भारत के सैकड़ों ज़िलों में भारत सरकार की 'आशा' योजना चलाई जा रही है.
इस योजना का कार्यान्वयन आशा के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के हाथों में है. ये कार्यकर्ता घर-घर जाकर गर्भनिरोधक पहुंचाते हैं.
परिवार नियोजन की इस योजना का एक मकसद स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को रोजगार मुहैया कराना भी है. इस योजना के तहत कार्यकर्ता कंडोम का एक पैकेट एक रुपए में बेचते हैं.
<bold>बीबीसी</bold> से बात करते हुए दमोह ज़िले में 'आशा' की अध्यक्षा मिथिलेश विश्वकर्मा उदाहरण देते हुए कहतीं हैं, "ये सामाजिक मर्यादाओं के खिलाफ है क्योंकि कोई हमारी बहू लगती है, कोई बेटी लगती है. <link type="page"><caption> इस्तेमाल </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/05/130509_kenya_condom_catholic_church_condemn_vd2.shtml" platform="highweb"/></link>करने वाला अगर जेठ है तो बहू कैसे उसे कंडोम दे सकती है. हम सब कार्यकर्ता इतने गिरे हुए नहीं हैं.लाज शर्म भी कोई चीज़ है."
मर्यादा के ख़िलाफ़
कार्यकर्ताओं का कहना है कि दिक्कत ये भी है कि जो कंडोम उन्हें बेचे जाते हैं वो सरकारी अस्पताल में मुफ्त मिलते हैं, तो लोग एक रुपए देकर कंडोम भला क्यों खरीदेंगे.
मिथिलेश ने कहा," कंडोम को छोडकर महिलाओं को अन्य गर्भनिरोधक के इस्तेमाल की जानकारी देने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं है. महिलाओं को तो हम गर्भ निरोधक के अन्य साधनों के बारे में खुल कर बता सकते हैं, पर पुरुषों को नहीं बता सकते कि इसका कैसे इस्तेमाल किया जाए."
कार्यकर्ताओं का कहना है कि पुरुष भी महिला कार्यकर्ताओं से कंडोम लेने में संकोच करते हैं.
इन कार्यकर्ताओं ने वरिष्ठ अधिकारियों को इस बारे में एक ज्ञापन दिया है और जल्द ही इस बारे में एक और ज्ञापन देंगी कि लोगों को कंडोम बेचने का काम उनसे न लिया जाए.
इस बारे में डिंडोरिया के मेडिकल अधिकारी बीपी अहरवाल ने बीबीसी को बताया कि कि अगर इस तरह की समस्या है तो वहाँ सुपरवाइज़र को भेजा जाएगा और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से इस बारे में चर्चा कर स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा.
मध्य प्रदेश के दामोह ही नही कई अन्य ज़िलों से भी इस तरह की खबरें आई हैं, जिसमें महिला कार्यकर्ताओं ने कंडोम बांटने से इनकार किया है.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के <link type="page"><caption> एंड्रॉएड ऐप</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए क्लिक करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












