सरबजीत सिंह मामले से उठे पाँच सवाल

एक तरफ़ जहाँ पूरे देश में <link type="page"><caption> सरबजीत सिंह</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130503_sarabjit_mourning_ss.shtml" platform="highweb"/></link> की मौत पर गुस्से का माहौल है, इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो गए हैं.
पहला सवाल
कौन थे सरबजीत सिंह? हालाँकि सरकार और सरबजीत सिंह के परिवार की ओर से सरबजीत सिंह की शख्सियत को लेकर कई बयान आए हैं, कई लोगों के मन में सरबजीत सिंह को लेकर अब भी संशय बरकरार है कि क्या वो भारतीय खुफ़िया तंत्र का वो मोहरा था जिन्हें बुरे वक्त में त्याग दिया गया.
ये ढँकी-छुपी बात नहीं रही कि भारत और पाकिस्तान दोनो एक दूसरे के खिलाफ़ गुप्तचरों का इस्तेमाल करते रहे हैं और बात में उन्हें पहचानने से भी इनकार कर देते हैं.
एक तरफ़ जहाँ पाकिस्तान में सरबजीत सिंह को आतंकवादी माना गया और उन्हें मौत की सज़ा दी गई, भारत सरकार इनकार करती रही है कि सरबजीत किसी भी आतंकी गतिविधि में शामिल थे.
दूसरा सवाल

एक सवाल सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर को लेकर भी हैं.
अस्पताल में सरबजीत को देखने के बाद जब उन्होंने वाघा सीमा पार किया और पत्रकारों से मिलीं तो उन्होंने मनमोहन सिंह पर निशाना साधा और उनके इस्तीफ़े की मांग की.
लेकिन अगले दिन जब वो पत्रकारों से मिलीं तो उनके सुर बदले हुए थे. दलबीर ने मनमोहन सिंह को जैसे क्लीन चिट देते हुए कहा कि उनकी पीठ में छुरा भोंका गया.
कई लोगों ने दलबीर के बयान को राजनीतिक बताया और उनके बयानों पर सवाल उठाए.
तीसरा सवाल
सरबजीत सिंह को लेकर सरकार की ओर से आ रहे बयानों को लेकर भी कई सवाल हैं.
बयानों को सरकार की नीयत से जोड़कर देखा जा रहा है.
सरबजीत सिंह पर हमले और फिर उनकी मौत की ख़बर ऐसे वक्त आई जब सरकार संसद के भीतर और बाहर कोयले में दलाली मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो की भूमिका पर घिरी हुई थी.
लेकिन सरबजीत की दर्दनाक मौत के कारण मीडिया का सारा ध्यान कोयला मामले से हट सा गया लग रहा है.
चौथा सवाल

सरबजीत पर पाकिस्तान की जेल में हुए हमले के बाद और फिर जम्मू की जेल में पाकिस्तानी कैदी <link type="page"><caption> सनाउल्लाह</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130503_pakistani_prisoner_ra.shtml" platform="highweb"/></link> पर हमले के बाद दोनो देशों के कैदियों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं.
भारतीय विदेश विभाग के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन के मुताबिक 535 भारतीय कैदी पाकिस्तानी जेलों में बंद हैं जबकि 273 पाकिस्तानी कैदी भारतीय जेलों में बंद हैं.
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अगर पाकिस्तान में भारतीय कैदी की सुरक्षा ख़तरे में पड़ती है, तो भारत में पाकिस्तानी कैदी की सुरक्षा पर भी सवाल उठेंगे.
पाँचवा सवाल
एक अहम सवाल इन मुद्दों के राजनीतिकरण से जुड़ा है.
जिस तरह भारतीय नेताओं ने सरबजीत सिंह की मौत पर बयान दिए हैं, जानकार कहते हैं कि राजनीतिज्ञों की कोशिश मामले से राजनीतिक लाभ उठाने की है, न कि इस समस्या की जड़ तक पहुँचने की.
भारतीय नेताओं और नौकरशाहों पर सवाल उठे हैं कि क्यों भारत पाकिस्तान को लेकर एक ठोस और समान नीति विकसित नहीं कर पाया. पाकिस्तान को लेकर भारत कभी नरम तो कभी गरम रवैया दिखाता आया है.












