चीन सीमा पर तनाव घटेगा इन चार उपायों से?

बीजिंग में चीनी सैनिक

चीन के नए राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पद सँभालने के बाद भारत के साथ पाँच-सूत्री फ़्रेमवर्क के तहत काम करने की पेशकश की थी.

इसमें आपसी विश्वास बढ़ाने को काफ़ी अहमियत दी गई थी. साथ ही आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय महत्त्व के मुद्दों पर आपसी समझदारी बढ़ाने की बात कही गई थी.

उन्होंने ये भी कहा था कि सीमा विवाद सुलझाने के लिए बातचीत जारी रहेगी लेकिन विवाद सुलझने तक का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है.

लेकिन पिछले 15 अप्रैल को जिस तरह चीन की जनमुक्ति सेना (पीएलए) के लोगों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के दस किलोमीटर अंदर तक आकर अपना तंबू गाड़ दिया है, वो राष्ट्रपति के पाँच-सूत्री फ़्रेमवर्क के विपरीत जाता है.

समदरौंग-चू की घटना के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि चीनी सैनिक अंदर तक आकर अपना तंबू लगा चुके हैं. अरुणाचल प्रदेश की समदरौंग-चू घाटी में चीनी सैनिक 1986 में आकर काबिज़ हो गए थे.

अगर दोनों देशों के बीच में कटुता बढ़ी तो ये दक्षिण एशिया और एशियाई देशों के लिए ठीक नहीं होगा. इसलिए तनाव की स्थिति से बचने के लिए निम्न चार उपाय तुरंत किए जा सकते हैं:

पहला उपाय

चीन की जनमुक्ति सेना के सैनिक
इमेज कैप्शन, चीन ने पिछले कुछ बरसों में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने पर ज़ोर दिया है.

टेक्नॉलॉजी की मदद लेकर सीमा पर सैनिकों की आमदरफ़्त, वायुक्षेत्र में होने वाली हलचल पर नज़र रखी जानी चाहिए.

अख़बारों में ख़बर छपी है कि चीनी हेलिकॉप्टरों ने भारतीय इलाक़ों के ऊपर उड़ान भरी है. इस बात की सूचना चीनी अधिकारियों की ओर से पहले भारत को दी जानी चाहिए थी.

जीपीएस तकनॉलॉजी के ज़रिए ये पता लगाया जाना चाहिए कि 15 अप्रैल से पहले भारतीय और चीनी सैनिकों की स्थिति कहाँ थी. जब ये तय हो जाए तो सैनिकों को पहले के ठिकानों पर लौट जाना चाहिए.

दूसरा उपाय

कहने को चीन और भारत के प्रधानमंत्रियों से लेकर सरकार के संयुक्त सचिवों तक हॉटलाइन कनेक्शन है, लेकिन लद्दाख की घटना से लगता है कि इसका बहुत उपयोग नहीं किया जाता.

इससे पहले कि ऐसी और घटनाएँ हों, दोनों देशों के बीच हॉटलाइन संपर्क को फिर से सक्रिय किया जाना चाहिए.

तीसरा उपाय

दोनों देशों के बीच दो फ़्लैग मीटिंग हो चुकी हैं. फ़्लैग मीटिंग में सीमावर्ती क्षेत्र में दोनों देशों के फ़ौजी कमांडर आमने सामने मेज़-कुर्सी पर बैठकर विवाद को हल करने की कोशिश करते हैं. ले

किन इससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है कि सेना के उच्च स्तरीय अफ़सर आपस में बात करें और संवाद की ये प्रक्रिया सर्वोच्च राजनीतिक स्तर पर भी तुरंत शुरू की जानी चाहिए.

चौथा उपाय

भारतीय सैनिक
इमेज कैप्शन, भारतीय सैन्य अधिकारियों ने चीनी सेना के साथ दो बार फ़्लैग मीटिंग की है.

भारत और चीन के बीच बनाए गए संयुक्त कार्य दलों की गतिविधियों को और दुरस्त किया जाना चाहिए. चरमपंथ के ख़िलाफ़ आपसी सहयोग को लेकर गंभीरता से काम करने का संकल्प दोनों पक्षों को दिखाना चाहिए.

कई विश्लेषक कहते हैं ये समझ पाना मुश्किल होता है कि चीन क्या सोच रहा है और क्या करने जा रहा है. विदेश नीति को लेकर थोड़ा-बहुत अनिश्चितता का माहौल हर देश बनाकर रखना चाहता है, पर चीन के बारे में यह कहना थोड़ा अतिश्योक्ति होगा.

ये भी ध्यान में रखना चाहिए कि लद्दाख में अपने सैनिकों को आगे भेजने का फ़ैसला स्थानीय स्तर पर किया गया हो सकता है और मैं नहीं मानता कि इस घटना से चीन और भारत के बीच युद्ध की जैसी स्थिति आ सकती है.

इस विवाद का मूल कारण है धरती पर वास्तविक नियंत्रण रेखा का न होना. यहाँ तक कि ये भी नहीं मालूम है कि लद्दाख और तिब्बत के बीच युद्धविराम रेखा किस जगह पर है.

(बीबीसी संवाददाता राजेश जोशी से बातचीत पर आधारित) (ये लेखक की निजी राय है)