शांति सैनिकों के परिवार में मातमी सन्नाटा

सूडान में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के दस्ते में भारत के करीब दो हजार दो सौ सैनिक तैनात हैं. लेकिन इनमें से पांच सैनिकों के लिए मंगलवार का दिन बेहद अमंगल साबित हुआ.
जब सूडान के जूंगेली इलाके में उनके दस्ते पर 200 से ज्यादा आक्रमणकारियों ने हमला कर दिया. <link type="page"><caption> 32 सैनिकों के दस्ते में पांच भारतीय सैनिकों की मौत</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/04/130409_sudan_indian_soldiers_killed_ns.shtml" platform="highweb"/></link> हो गई.
ये सैनिक हैं- लेफ्टिनेंट कर्नल महिपाल सिंह, नायब सुबेदार शिव कुमार पाल, हवलदार हीरा लाल, हवलदार भारत सैमसल और लांस नायक नंद किशोर.
हंसमुख थे हीरालाल
हवलदार हीरा लाल उत्तर प्रदेश के बुलंद शहर के रहने वाले थे. उनकी मौत की ख़बर से बूढ़े मां-बाप, पत्नी सब सदमे में हैं. तीन मासूम बच्चों के चेहरे से हंसी गायब हो चुकी है.
बुलंदशहर में हीरालाल के चचेरे भाई सुबेदार जयकरण ने बताया कि घर में मातमी सन्नाटा है.
अपने भाई को याद करते हुए जयकरण कहते हैं, “वे बेहद हंसमुख थे, किसी भी मुश्किल के आने पर परेशान नहीं होते थे.”
हीरालाल का परिवार के लिए फौज कोई नई बात नहीं है. जयकरण ने बताया, “हमारे घर में आठ-दस जवान सेना में हैं. ऐसे में किसी हादसे की आशंका तो रहती है लेकिन इन लोगों को अपने पलटन में ज़्यादा सैनिक लेकर जाना चाहिए था.”
वो फोन नहीं आएगा
वहीं हवलदार भरत सैमसल का परिवार पश्चिम बंगाल का मिदनापुर का है. हालांकि उनकी पत्नी और दो छोटे छोटे बच्चे गांव गोविना में रहते हैं.
उनके बड़े भाई लक्ष्मण सैमसल कहते हैं, “रविवार को भरत से बात हुई थी, वो कह रहा था कि दो-तीन बाद फोन करूंगा. लेकिन अब वो फोन नहीं आएगा.”
बीबीसी ने जब लक्ष्मण से भरत के परिवार वालों से बात कराने की बात कही तो उन्होंने बताया कि उनके भाई की पत्नी ने दुख की इस घड़ी में फोन बंद कर दिया.
सरकारी नौकरी पर जाना ही था
वहीं लांस नायक नंद किशोर जोशी के पिता भुवनचंद्र जोशी ने बताया कि मंगलवार शाम साढ़े सात बजे के करीब फोन उनकी बहू के लिए आया था.

बेटे के गम में दुखी भुवनचंद्र जोशी के सामने बहू के अलावा दो मासूमों की देखभाल का जिम्मा भी हैं.
अपने बेटे से आखिरी बातचीत के बारे में भुवनचंद्र ने बताया, “चार-पांच दिन पहले फोन पर उसने कहा था कि पापा कहीं दूसरे देश जा रहा हूं. सरकारी नौकरी थी, तो उसमें जाना ही था.”
भुवनचंद्र जोशी खुद उत्तर प्रदेश पुलिस से रिटायर हुए हैं और इनके परिवार में भी फौज की परंपरा रही है.
वहीं नायब सूबेदार शिवकुमार पाल का परिवार तो फौजियों का ही है. उनके पिता फौज में रहे और बड़े भाई भी फौज थे.
बहादूर था मेरा भाई
ऐसे में उनके बड़े भाई प्रदीप पाल अपने भाई को याद करते हुए बताते हैं, “मेरा भाई बहुत बहादुर व्यक्ति था, किसी चीज से डरते नहीं थे और उतने ही मिलनसार थे.”
शिव कुमार की पत्नी की हालत ख़बर आने के बाद से ही ख़राब है. उनके परिवार में एक बेटी और एक बेटा भी है. लेकिन ये लोग बात करने की स्थिति में नहीं थे.
बीबीसी ने कर्नल महिपाल सिंह के परिवार वालों से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन फोन उठाने वाली महिला ने बताया कि अभी कोई भी सदस्य बात करने की स्थिति में नहीं है.
शहीद हुए सैनिकों का शव देर रात भारत लाया गया है. इन्हें उनके घरों तक भेजने की व्यवस्था की जा रही है.
दुख से भरे इन परिवारों के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सांत्वना व्यक्त की है.












