बलात्कार पीड़िता को कैद में रखने पर सख्त सुप्रीम कोर्ट

भारत के उच्चतम न्यायालय ने बुलंदशहर में बलात्कार की शिकार बच्ची को पुलिस द्वारा जेल में बंद करने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है.
न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए यह नोटिस जारी किया है.
उत्तर प्रदेश सरकार को इस नोटिस का जवाब सोमवार तक देना है.
पुलिस ने पीड़िता इसलिए लॉकअप में डाला था क्योंकि वह बलात्कार की शिकायत दर्ज करवाना चाहती थीं.
मांगा इंसाफ़, मिली गालियां
सोमवार को दस साल की बच्ची अपनी मां के साथ एक महिला पुलिस थाने गई थी ताकि वह 24 साल के युवक के खिलाफ़ बलात्कार की शिकायत दर्ज करवा सके.
लेकिन उनकी शिकायत सुनने के बजाय महिला पुलिस अधिकारियों ने उन्हें गालियां दीं और बच्ची की मां को भगा दिया.
पीड़ित बच्ची को थाने के अस्थाई हवालात में बंद कर दिया गया.
बच्ची को रात को हिरासत में ही गुज़ारनी पड़ी जहां वह नंगे फ़र्श पर ही पड़ी रही.
पुलिसकर्मियों ने उससे यह भी कहा कि “वह खुद ही अपने बलात्कार की वजह है.”
यह मामला तब प्रकाश में आया जब स्थानीय टीवी चैनल ने इस मामले को रिकॉर्ड कर लिया और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को यह विडियो दिखाया.
बुलंदशहर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मंगलवार को कहा कि एसएचओ और एक सब-इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर और दो कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है.
उन्होंने बताया कि बच्ची को हिरासत से छोड़ दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार बच्ची से बलात्कार करने वाले के खिलाफ़ मामला दर्ज कर लिया गया है और उसकी गिरफ़्तारी की कोशिश की जा रही है.












