सुप्रीम कोर्ट: आठ मुजरिमों की फांसी पर रोक

<link type="page"><caption> सुप्रीम कोर्ट</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/01/130129_supreme_court_rejects_transfer_trial_pk.shtml" platform="highweb"/></link> ने आठ मुजरिमों को फांसी दिए जाने पर चार सप्ताह की रोक लगा दी है. इन मुजरिमों की दया याचिका राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने हाल ही में ख़ारिज कर दी थी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ न्यायमूर्ति पी सदाशिवम और न्यायमूर्ति एम वाई इक़बाल की पीठ ने शनिवार देर शाम को आपात सुनवाई के बाद ये फ़ैसला सुनाया. ये सुनवाई न्यायमूर्ति सदाशिवम के आवास पर हुई थी.
मौत की सज़ा पाए इन दोषियों में सुरेश, रामजी, गुरमीत सिंह, प्रवीण कुमार, सोनिया और उनके पति संजीव, सुंदर सिंह और जफ़र अली शामिल हैं.
पीठ ने कहा, “आठ याचिकाकर्ताओं की <link type="page"><caption> फांसी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130216_virappan_aides_execution_sm.shtml" platform="highweb"/></link> पर रोक रहेगी. संबंधित राज्यों को चार सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब देना होगा.”
याचिका
पीठ ने नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (पीयूडीआर) की याचिका पर ये फ़ैसला दिया.
पीयूडीआर ने आठ लोगों की दया याचिकाओं को ख़ारिज किए जाने को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें फांसी देने में देरी हुई है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मौत की सज़ा दिए जाने की पुष्टि बहुत पहले कर दी थी.
ये आठों लोग देश की विभिन्न जेलों में बंद हैं.
सुरेश, रामजी, गुरमीत सिंह और जफ़र अली उत्तर प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद हैं जबकि हरियाणा के पूर्व विधायक रेलू राम पूनिया की बेटी सोनिया और उनके पति संजीव हरियाणा की जेल में हैं.
प्रवीण कर्नाटक और सुंदर सिंह उत्तराखंड की जेल में बंद हैं.
जुर्म
सोनिया और संजीव को अपने परिवार के आठ लोगों की हत्या करने के जुर्म में फांसी की सज़ा सुनाई गई थी. ये घटना 2001 में हुई थी.
गुरमीत सिंह को 1986 में अपने ही परिवार के 13 सदस्यों की हत्या का दोषी क़रार दिए जाने के बाद मौत की सज़ा सुनाई गई थी.
इसी तरह सुरेश और रामजी को भी अपने ही परिजनों की हत्या के जुर्म में फांसी की सज़ा सुनाई गई थी.












