अफ़ज़ल मामला: संसद में पाकिस्तान को 'खरी-खोटी'

भारतीय संसद में पाकिस्तान के खिलाफ एक प्रस्ताव पास किया गया है. ये पाकिस्तानी संसद के उस प्रस्ताव के खिलाफ है जिसमें अफज़ल गुरु की फांसी की निंदा की गई थी.
लोकसभा की स्पीकर मीरा कुमार ने संसद के निचले सदन में प्रस्ताव रखा कि पाकिस्तान भारत के अंदरूनी मामलों में दखलअंदाज़ी न करे. प्रस्ताव में कहा गया कि जम्मू कश्मीर का पूरा हिस्सा भारत का है और रहेगा और इसमें वो क्षेत्र भी शामिल है जो पाकिस्तान प्रशासित है.
इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पास किया गया. एजेंसियों के मुताबिक इससे पहले विभिन्न दलों के नेताओं ने स्पीकर मीरा कुमार से मुलाकात की थी और इस प्रस्ताव के शब्दों पर अपनी राय दी थी.
राज्य सभा में भी एक प्रस्ताव पारित करते हुए पाकिस्तानी प्रस्ताव की निंदा की गई.
इससे पहले पाकिस्तान की एक संसदीय समिति ने भारतीय संसद पर हमले के दोषी <link type="page"> <caption> अफज़ल गुरु</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130209_afzal_timeline_pk.shtml" platform="highweb"/> </link> को फांसी दिए जाने के खिलाफ गुरुवार को प्रस्ताव पारित किया है.
साथ ही कश्मीर पर विशेष संसदीय समिति ने अफज़ल गुरु के शव को उसके खानदान के हवाले करने की मांग की है.
<link type="page"> <caption> पाकिस्तानी संसद</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130209_pak_protest_afzal_vk.shtml" platform="highweb"/> </link> के निचले सदन में ये प्रस्ताव जमाते-उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान की ओर से पेश किया गया.
प्रस्ताव में अफज़ल को फांसी दिए जाने की निंदा करने के साथ ही जम्मू-कश्मीर में पैदा हुई स्थिति पर चिंता जताई गई है.
नीति के तहत
इस्लामाबाद में बीबीसी उर्दू के संवाददाता एजाज़ मेहर के मुताबिक ऐसा कोई प्रस्ताव पहले से तय नहीं था लेकिन सदन के दौरान कश्मीर समिति के सदस्य खड़े हो गए और ये प्रस्ताव रखा जिसका विरोध नहीं किया गया.
एजाज़ मेहर के मुताबिक, "संसद में जो कश्मीर की समिति है उसके सदस्य अचानक खड़े हो गए और उन्होंने अपनी बात कहीं. जहां तक पाकिस्तान की सरकार की नीतियों का सवाल है, पाकिस्तान मानता है कि कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है और भारत का अंदरूनी मामला नहीं है. ये प्रस्ताव उसी पॉलिसी के तहत है."
प्रस्ताव में कहा गया कि भारत प्रशासित कश्मीर में कर्फ्यू के सूरते हाल खत्म किए जाए और वहां के स्थानीय नेताओं को रिहा किया जो जेलों में बंद हैं.
अफज़ल गुरु

13 दिसंबर, 2001 में भारतीय संसद पर हमले में दोषी करार अफ़ज़ल गुरू को नौ फरवरी को फॉंसी दे दी गई थी.
भारत के संसद पर हुए हमले में पांच चरमपंथी शामिल थे. इस हमले में नौ लोगों की मौत हुई थी, इनमें सात संसद की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी शामिल थे. जबकि पांचों चरमपंथी जवाबी कार्रवाई में मारे गए थे.
अफ़ज़ल गुरु पर इन चरमपंथियों को मदद मुहैया कराने का आरोप सही पाया गया था. उन्हें भारी हथियार गोला बारूद के साथ दिल्ली के उनके ठिकाने से गिरफ़्तार किया गया था.
अफ़ज़ल गुरु जैश-ए-मोहम्मद के चरमपंथी थे. उन्होंने भारत की सुप्रीम कोर्ट ने 2004 में फॉंसी की सजा सुनाई गई थी.
उन्हें 20 अक्तूबर, 2006 में फॉंसी की सजा दी जानी थी लेकिन उनकी पत्नी ने राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दायर की, जिसके चलते अफ़ज़ल गुरु की फॉंसी टलती रही.












