काटजू ने ग़लत नंबर डायल किया है: नीतीश

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन <link type="page"> <caption> जस्टिस मर्केंडय काटजू </caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130218_katju_publicity_aa.shtml" platform="highweb"/> </link>पर जोरदार पलटवार किया है. काटजू ने इससे पहले बिहार में मीडिया की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए थे.
नीतीश ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मिस्टर काटजू आपने ग़लत नंबर डायल किया है.”
मुख्यमंत्री ने बिहार विधानसभा के सदन में <link type="page"> <caption> काटजू की रिपोर्ट </caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/02/120211_katju_bihar_sdp.shtml" platform="highweb"/> </link>को पक्षपातपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, “काटजू ने सीमा रेखा का उल्लंघन किया है और बिना किसी आधार के मुझे निशाना बनाया है.”
दरअसल बिहार को लेकर प्रेस काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार सरकार मीडिया पर अंकुश लगाने के लिए तरह तरह के हथकंडों का इस्तेमाल करती है.
इस रिपोर्ट में बिहार की मौजूदा स्थिति की तुलना अपातकाल से की है. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि बिहार के समाचार पत्र अब सरकार का मुख्यपत्र के तौर पर काम कर रहे हैं.
नीतीश कुमार ने जस्टिस काटजू के नजरिए की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी रिपोर्ट बिहार सरकार की छवि को ख़राब करने की उद्देश्य से तैयार की गई है.
छवि ख़राब करने की कोशिश
उन्होंने कहा, “काटजू ने राज्य के बारे में हर तरह की बात की और ख़ासकर मेरे बारे में. मैं अब तक चुप रहा क्योंकि मेरी आदत किसी ऐसे अधिकारी के साथ विवाद में पड़ने की नहीं है जो अर्ध न्यायिक सत्ता का सुख भोग रहा हो. लेकिन हर बात की कोई हद होती है.”
नीतीश कुमार से काटूज की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, “पहले तो आप बयान जारी करते हैं फिर जांच बिठाते हैं. इसके बाद जब जांच समिति रिपोर्ट सौंपती है तो उसे प्रेस काउंसिल से मंजूरी मिले बिना अपनी ईमेल आईडी से लीक कर देते हैं. आप ऐसे इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आप देश के जाने माने न्यायविद जस्टिस कैलाश काटजू के पोते हैं और मैं एक सामान्य वैद्य का बेटा हूं. यह किस तरह का न्याय है?”
विज्ञापन नीति नहीं बदली
जस्टिस काटजू ने बीते साल दो बार बिहार का दौरा किया और नीतीश कुमार सरकार की काफी आलोचना की थी. काटूज ने कहा था कि बिहार की मीडिया पर सेंशरशिप लागू है और सरकार उन प्रकाशनों को विज्ञापन नहीं देती है जो सरकार की आलोचना करती है.
नीतीश कुमार ने सरकार की विज्ञापन नीति के बारे में बताया है कि वे सालों से एकसमान है.
पिछले साल 25 फरवरी को उन्होंने बिहार की मीडिया की स्थिति की जांच के लिए पत्रकार राजीव रंजन नाग की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की थी. प्रेस काउंसिल के सदस्य अरुण कुमार और कल्याण भरूच इस समिति में शामिल थे.
इससे पहले जस्टिस काटजू की आलोचना भारतीय जनता पार्टी के नेता <link type="page"> <caption> अरुण जेटली</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130217_katju_jaitley_ia.shtml" platform="highweb"/> </link> भी कर चुके हैं.












