भारतीय मीडिया पर नहीं चला कैमरन का जादू

ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन अपने भारतीय दौरे में उस तरह का जलवा नहीं बिखेर सके जैसा अमरीकी या रूसी राष्ट्रपति कर पाते हैं.
इसकी एक वजह तो शायद ये हो सकती है कि कई भारतीय न्यूज़ चैनल डेविड कैमरन का नाम भी सही तरीक़े से नहीं ले पाए.
अंग्रेज़ी चैनल 'टाइम्स नाउ' ने उनको डेविड 'कैमरून' कहा तो भारत के राष्ट्रीय प्रसारक 'डीडी न्यूज़' की एक एंकर ने तो उन्हें जेम्स कैमरन कह दिया.
ग़ौरतलब है कि जेम्स कैमरन एक जाने माने फ़िल्म निर्देशक हैं.
कैमरन एक लंबा चौड़ा व्यापारिक प्रतिनिधि मंडल अपने साथ लेकर आए थे क्योंकि उन्हें पूरी आशा थी कि वे ब्रितानी कंपनियों के लिए यहां ज़्यादा से ज़्यादा बिज़नेस हासिल कर सकेंगे.
लोगों को लुभाने और शायद मीडिया में बने रहने के लिए उन्होंने मुंबई में बच्चों के साथ क्रिकेट खेला, हिंदी समाचार चैनल 'ज़ी न्यूज़' के साथ बातचीत में अपने पसंदीदा खाने के बारे में जानकारी दी.
लेकिन उनके दौरे पर शायद सबसे ज़्यादा चर्चा <link type="page"> <caption> वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे</caption> <url href=" Details Setup & Layout Main Promotion Social Media Filename: http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130219_cameron_manmohan_va.shtml" platform="highweb"/> </link> में कथित दलाली के बारे में हुई.
हेलिकॉप्टर सौदा छाया रहा
भारत ने अगस्टा वेस्टलैंड कंपनी से जो 12 हेलिकॉप्टर ख़रीदने का सौदै किया था वो दरअसल एक एंग्लो-इतालवी कंपनी है, और हेलिकॉप्टर का निर्माण ब्रिटेन में ही होता है.
इसके कारण कैमरन के दौरे पर हुई दूसरी चीज़े फीकी पड़ गई.
कैमरन ने अगस्टा वेस्टलैंड कंपनी को अपना समर्थन देते हुए कहा कि उनकी जानकारी में अभी तक कंपनी ने कोई ग़ैर-क़ानूनी काम नहीं किया है.
इस कथित दलाली ने इतनी सुर्खियां बटोरी कि कैमरन के दौरे के समय भारतीय व्यापारियों के लिए उसी दिन वीज़ा दिए जाने और भारतीय छात्रों के लिए वीज़ा नियमों में राहत दिए जाने संबंधी घोषणाओं को मीडिया में उतनी प्रमुखता से जगह नहीं मिल सकी.
भारतीय मीडिया ने ज़्यादातर ख़बरें कैमरन के व्यापारिक मिशन के बारे में की.
हिंदी दैनिक 'नवभारत टाइम्स' ने लिखा कि यूरोप की आर्थिक परेशानियों से ख़ुद को बचाने के लिए ब्रिटेन अपने पुराने उपनिवेशों पर अपने प्रभाव का फ़ायदा उठाना चाहता है.
अंग्रेज़ी अख़बार 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' ने कहा कि भारत को ब्रिटेन और फ़्रांस से बराबरी का संबंध बनाने की कोशिश करनी चाहिए.
खेद पर माफ़ी नहीं
फ़्रांस के प्रधानमंत्री फ़्रांसवा ओलांड कैमरन से कुछ ही दिन भारतीय दौरे पर आए थे.
कैमरन ने पंजाब के <link type="page"> <caption> जलियाँवाला </caption> <url href=" Filename: http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130220_jallianwala_bagh_victim_va.shtml" platform="highweb"/> </link>बाग़ जाकर काफ़ी सुर्खियां बटोरी जहां 1919 में ब्रितानी सेना ने सैंकड़ों निहत्थे भारतियों को गोलियों से भून डाला था.
कैमरन ने उस घटना को शर्मनाक कहा, लेकिन भारतीय मीडिया में ये बातें होती रहीं कि प्रधानमंत्री ने इसे शर्मनाक घटना ज़रूर क़रार दिया लेकिन उन्होंने दरअसल सार्वजनिक रूप से माफ़ी नहीं मांगी.
अंग्रेज़ी चैनल 'एनडीटीवी 24x7' ने कहा कि लोगों को कैमरन से माफ़ी मांगने की उम्मीद थी. उसके संवाददाता ने कहा कि कई लोगों ने कैमरन के खेद प्रकट करने को शिष्टाचार क़रार दिया तो कई लोगों ने उसे नाकाफ़ी माना.
जबकि एक दूसरे अंग्रेज़ी चैनल 'सीएनएन-आईबीएन' ने कहा कि ब्रिटेन को खेद प्रकट करने में भी एक सौ साल लग गए.
एक हिंदी चैनल 'एबीपी न्यूज़' ने एक भारतीय सांसद के बयान को दिखाया जिसमें उन्होंने संपूर्ण माफ़ी की मांग की थी.
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