कुंभ में पधारे फेसबुक बाबा!

मैं जब कुंभ में आया था तो ये सोचा भी नहीं था कि कोई ऐसे बाबा मिलेंगे जो फेसबुक पर सक्रिय होंगे लेकिन कुंभ तो कुंभ है जो चाहो मिल जाता है.
मेरे साथ भी यही हुआ. एक ऐसे बाबा मिले जिनका फेसबुक पर भी एकाउंट हैं और ट्विटर पर भी. और हां, वो सक्रिय भी हैं.
बाबा के अपने कारण हैं और बड़े ही वैध कारण हैं. बाबा का नाम है महंत रबिंद्रानंद सरस्वती और ये जुड़े हुए हैं जूना अखाड़े से.
मेरी उनकी मुलाकात अखाड़े में हुई और उन्होंने अपना फोन नंबर दिया और कहा कि फोन कर लें.
फोन किया, बात हुई और समय तय हुआ बातचीत का.
क्यों आए फेसबुक पर
रबिंद्रानंद सरस्वती ने बड़ी ही मृदु भाषा में बताया कि वो इंटरनेट से जुड़े हुए हैं और यही एक तरीका है समाज से जुड़े रहने का.
वो कहते हैं, ‘‘ये इंटरनेट का ज़माना है. समाज से जुड़ने का ये एक बढ़िया तरीका है. मैं लैपटॉप इस्तेमाल करता हूं. इंटरनेट भी इस्तेमाल करता हूं.’’
तकनीकी रुप से जुड़े हैं तो सोशल मीडिया पर भी होंगे.
वो बोले, ‘‘बिल्कुल हैं. महंत रबिंद्रानंद सरस्वती के नाम से फेसबुक पर हूं. ट्विटर पर भी हूं लेकिन बहुत एक्टिव नहीं हूं. मेल पर भी हूं. फेसबुक अच्छा लगता है.’’
लेकिन फेसबुक पर वो करते क्या हैं.
सरस्वती जी मुस्कुराए और बोले, ‘‘ज्वलंत मुद्दों पर अपनी राय देता हूं. जैसे समझिए कोई राजनीतिक मुद्दा है. सामाजिक मुद्दा है. अभी हाल में दिल्ली में एक लड़की के साथ अत्याचार हुआ था तो उस पर क्या होना चाहिए, वो हमने लिखा.’’
कैसे बने संन्यासी
और कुंभ का कार्यक्रम...

‘‘अरे बिल्कुल...क्यों नहीं. हमने सारा कार्यक्रम डाल रखा है फेसबुक पर कि हमारा अखाड़ा क्या कर रहा है. हम अब थोड़ा ट्विटर पर सक्रिय होना चाहते हैं.’’
तो आप फेसबुक बाबा हुए.. इस बात पर सरस्वती जी मंद मंद मुस्काए और बोले कि इंटरनेट का ज़माना है तो ये सब करना ज़रूरी है.
वैसे रबिंद्रानंद पिछले 18 सालों से बाबा हैं. उनके बाबा बनने की कहानी भी दिलचस्प है.
वो बताते है, ‘‘मैं बंगलौर का हूं. एक दिन सपना आया कि मुझे कोई कहीं ले जा रहा है. शाम का समय था. चलते चले गए..फिर बुखार आ गया दो दिन तक. उसके बाद मेरा मन वैराग्य और अध्यात्म की तरफ चला गया. कुछ समय बाद संन्यास ले लिए.’’
चलिए सपने से बैरागी हुए रबिंद्रानंद अब सोशल हो रहे हैं. क्या कहा जाए. शायद बस यही कि फेसबुक बाबा की बोलिए जय.












