'बलात्कार के लिए मृत्युदंड से मानवाधिकारों का हनन'

कई लोग मानते हैं कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराध की सज़ा मृ्त्यु दंड होनी चाहिए.
इमेज कैप्शन, कई लोग मानते हैं कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराध की सज़ा मृ्त्यु दंड होनी चाहिए.

मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत को सलाह दी है कि बलात्कार और बाकी यौन अपराधों के लिए मानवाधिकारों का हनन करने वाली मृत्यु दंड और रसायन के इस्तेमाल से नपुंसक बनाने जैसी सज़ाएं नहीं देनी चाहिए.

हालांकि संस्था के मुताबिक इन अपराधों के लिए दिए जाने वाली सज़ाओं से अपराध की गंभीरता पता लगनी ज़रूरी है.

ये सलाह एमनेस्टी इंटरनेशनल (एआई) इंडिया ने दिल्ली के सामूहिक बलात्कार मामले के बाद गठित तीन सदस्यीय जस्टिस वर्मा समिति को दी है.ये यौन अपराध से जुड़े मामलों पर अपनी राय सरकार को देगी. संस्था ने कहा है कि भारत को बलात्कार संबंधी का़नूनों को अंतरराष्ट्रीय मानदण्डों के अनुरूप बनाया चाहिए.

अपनी सिफ़ारिशों में एआई इंडिया ने ये भी कहा है कि महिलाओं के खिलाफ़ हिंसा से संबंधित क़ानूनों में सभी लोगों के खिलाफ़ हर तरह के यौन और लैंगिक हिंसा को अपराध माना जाए और पीड़ितों के फिर से सदमे की संभावना कम-से-कम किया जाए.

साथ ही संस्था ने महिलाओं के खिलाफ़ यौन हिंसा से लड़ने के लिए क़ानूनी सुधार सुझाए हैं और इस बात पर ज़ोर दिया है कि पुरुषों, लड़कों और ट्रांसजेंडर लोगों के खिलाफ़ यौन हिंसा अपराधों पर भी ध्यान देना चाहिए.

सुझाव

बलात्कार के मामलों को रोकने के लिए पुलिस और समाज को ज़्यादा संवेदनशील बनाने के लिए ख़ास प्रशिक्षण की भी बात हो रही है.
इमेज कैप्शन, बलात्कार के मामलों को रोकने के लिए पुलिस और समाज को ज़्यादा संवेदनशील बनाने के लिए ख़ास प्रशिक्षण की भी बात हो रही है.

बलात्कार के अपराध की परिभाषा को बढ़ाकर उसमें पेनेट्रेशन समेत किसी भी तरह के ग़ैरसहमति से बने यौन व्यवहार को शामिल करना, चाहे वो शादीशुदा जोड़े के बीच ही हो.

  • बलात्कार के अपराध की परिभाषा में बदलाव कर उसमें सही मायनों में सहमति का होना ज़रूरी.
  • किसी अधिकारी द्वारा बलात्कार को यातना मानना और यौन और लैंगिक-आधार के अपराधों के खिलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई में मिलने वाली छूट को हटाया जाना जिसमें पुलिस बल और सुरक्षाबलों के सदस्य भी शामिल हों.
  • ये सुनिश्चित करना कि न्यायिक सबूत और चिकित्सा सुविधाएं ठीक और पर्याप्त हों. साथ ही मेडिकल परिक्षण के दौरान 'दो उंगलियों' के इस्तेमाल वाला परिक्षण ख़त्म हो
  • अच्छे और यथोचित पीड़ित और गवाह सहायता और सुरक्षा कार्यक्रम बनाना.

क़ानूनी सुधार ज़रूरी

एआई इंडिया का ये भी कहना है कि जब तक क़ानूनों को सही तरह से लागू नहीं किया जाएगा, क़ानूनी सुधारों का असर नहीं होगा. प्रशासनिक और नौकरशाही में सुझाए गए कुछ बदलाव इस प्रकार हैं:

  • पुलिस, वकील, जज और आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े बाकी कार्यकर्ताओं को यौन अपराध और हिंसा के पीड़ितों के प्रति संवदेनशीलता को बढ़ावा देने के लिए ख़ास प्रशिक्षण
  • शिकायत दर्ज कराने के लिए स्वतंत्र प्रणाली का गठन जिसके तहत अधिकारियों को यौन हिंसा के मामलों की शिकायत दर्ज न करने, सही तरीके से जांच न करने और मुकदमा न चलाने के लिए जवाबदेही हो.
  • तेज़ी से, संवेदनशील और प्रभावशाली तरीके से मुकदमों को पूरा करना जिससे पीड़ितों को कम-से-कम सदमा और प्रताड़ना हो.