शीला दीक्षित और दिल्ली पुलिस आमने-सामने

दिल्ली में 23 साल की छात्रा के साथ हुए गैंगरेप मामले में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से दिल्ली पुलिस की शिकायत दर्ज कराई है.
इस शिकायत में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने पीड़िता के बयान लेते वक्त दखलांदाजी की है. शीला दीक्षित ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है.
दूसरी ओर दिल्ली पुलिस के कमिश्नर नीरज कुमार ने इन शिकायतों का खारिज किया है. उन्होंने कहा है कि दिल्ली पुलिस ने महिला मजिस्ट्रेट की मांग करते हुए पीड़िता का बयान दर्ज करवाने में हरसंभव मदद की.
उधर केंद्रीय गृहमंत्री शिंदे को लिखे ख़त में दीक्षित ने कहा है कि सब डिविजनल मजिस्ट्रेट उषा चतुर्वेदी जब पीड़िता का बयान दर्ज कर रहीं थीं तब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने दखलांदाजी की.
केंद्रीय गृहमंत्रालय ने मुख्यमंत्री की शिकायत को गंभीरता से लिया है.
शिकायत पर गंभीर गृह मंत्रालय
सूत्रों के मुताबिक इस शिकायत के आधार पर मामले की जांच हो सकती है और इसके लिए एक महिला अधिकारी के नेतृत्व में जांच दल बनाया जा सकता है.
उषा चतुर्वेदी ने अपनी शिकायत डिप्टी कमिश्नर(पूर्व) बीएम मिश्रा को भेजी. मिश्रा ने ये शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंचाई. इस शिकायत को देखने के बाद मुख्यमंत्री ने काफी नाराज़गी में केंद्रीय गृह मंत्री को ख़त भेजने का फ़ैसला लिया.
चतुर्वेदी की शिकायत में कहा है कि उन्हें पीड़िता का बयान दर्ज करते वक्त वीडियो रिकॉर्डिंग से मना किया गया. इसके अलावा पुलिस अधिकारियों ने उषा चतुर्वेदी को पहले से तय प्रश्नावली के आधार पर बयान लेने को कहा.

जब उषा चतुर्वेदी ने इससे इनकार किया तो पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ भी अभद्र व्यवहार किया.
दूसरी ओर दिल्ली पुलिस के कमिश्नर नीरज कुमार ने इन आरोपों को खंडन किया है.
उन्होंने कहा, "उषा चतुर्वेदी को हमारे अधिकारी साथ में लेकर अस्पताल गए. जब उन्होंने मामले के बारे में ब्रीफ करने को कहा तब हमने उन्हें इस मामले की जानकारी दी. जहां तक वीडियो रिकॉर्डिंग की बात है तो पीड़िता की मां नहीं चाहती थी कि बयान की रिकॉर्डिंग की जाए. डॉक्टरों की भी यही राय थी."
आरोपों से इनकार
नीरज कुमार ने ये भी बताया है कि मजिस्ट्रेट को अपनी मर्जी से सवाल पूछने से भी नहीं रोका गया और ना ही उन्हें कोई प्रश्नावली दी गई.
उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, " अगर मजिस्ट्रेट को ऐसा लग रहा था कि उनके साथ सही व्यवहार नहीं हो रहा है तो वे बयान दर्ज करने से इनकार कर सकती थीं लेकिन उन्होंने बयान दर्ज किया."
दिल्ली पुलिस के मुताबिक उषा चतुर्वेदी ने पीड़िता और उनकी मां दोनों के बयान दर्ज किए और उस वक्त कोई शिकायत दर्ज नहीं की.
दिल्ली पुलिस के कमिश्नर ने कहा, "इस शिकायत की जानकारी मीडिया से मिली है, बावजूद इसके यह पूरा प्रकरण ही खेद जनक है."












