
मधु श्रीवास्तव पर बेस्ट बेकरी कांड की प्रमुख गवाह ज़ाहिरा शेख़ को लाखों रुपए खिलाकर उन्हें तोड़ने के आरोप लगे.
लंबा-तगड़ा बलिष्ठ शरीर, ख़िज़ाब में रंगी काली दाढ़ी और वैसे ही लंबे बालों की चुटिया, कलाई में सोने की भारी ज़ंज़ीर और गले में सोने की कई मालाएँ.
मधु श्रीवास्तव से जब मैं मिलने पहुँचा तो उनके बारे में इतना ही मालूम था कि उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं. पर ये अंदाज़ा नहीं था कि कैसे?
ये उन्होंने मुझे खुद बताया.
अपने घर के बाहर झूले पर बैठकर उन्होंने ऐलानिया अंदाज़ में कहा, ''प्रजा पर अत्याचार करने वाला चाहे कोई अफ़सर हो या म..म..(मैं सोच रहा था कि शायद उनके मुँह से मंत्री या मुख्यमंत्री निकलेगा पर वो सँभाल ले गए.) बड़ा कोई तीसमारखाँ हो, मैं उसे ठीक करूँगा.''
सवाल- आगे भी ऐसा करते रहेंगे?
जवाब- जब तक ज़िंदा रहा तब तक करूँगा.
सवाल- अपने हाथ से?
जवाब- भगवान ने हाथ दिए हैं हाथ जोड़ने के लिए दिए हैं. अगर सामने वाला बहुत बदमाशी करता है उसे तमाचा मारने के लिए भी दिए हैं.
सवाल- तो क़ानून का कोई मतलब नहीं है?
जवाब- क़ानून तो अंधा है. हम न्यायालय को मानते हैं मगर अभी हमारे देश के अंदर अंधा क़ानून है. गुनाह नहीं किया है, मारा नहीं है. फिर भी पुलिस स्टेशन में फ़रियाद की जाए तो एफ़आइआर दर्ज हो जाता है. इसलिए कानून को केंद्रीय स्तर पर सुधारने की ज़रूरत है.
विवादों का घेरा
मधु श्रीवास्तव को नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर से वागोडिया विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी का टिकट दिया है.
उनका नाम सबसे ज़्यादा तब उछला था जब बेस्ट बेकरी कांड की प्रमुख गवाह ज़ाहिरा शेख़ को लाखों रुपए खिलाकर उन्हें तोड़ने के आरोप लगे.
तहलका पत्रिका ने एक टेप प्रकाशित किया जिसमें मधु श्रीवास्तव को ये कहते हुए बताया गया था कि ज़ाहिरा की ख़ामोशी के लिए उन्होंने 18 लाख रुपए दिए थे.
बेस्ट बेकरी बड़ौदा के हनुमान टीकरी मोहल्ले में ज़ाहिरा शेख़ के भाई की बेकरी थी.
पर हिंदुत्ववादियों के हुजूम ने 1 मार्च 2002 को बेकरी के अंदर काम कर रहे 14 लोगों को जलाकर मार डाला था.
मोदी भी गुरू नहीं

जानकार कहते हैं कि नरेन्द्र मोदी गुजरात में अपने राजनीतिक जीवन की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं.
मधु श्रीवास्तव कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले में उन्हें क्लीन चिट दे दी है. साथ ही उनके खिलाफ चल रहे सभी मामले निरस्त हो चुके हैं.
मधु श्रीवास्तव का परिवार मूलत: उत्तर प्रदेश का है. लेकिन तीन पीढ़ी पहले उनके बुजुर्ग गुजरात आकर बस गए थे.
सिर्फ दसवीं कक्षा तक पढ़े मधु श्रीवास्तव कहते हैं कि वो सिर्फ़ अपनी क़िस्मत के चलते राजनीति में आए.
सवाल- क्या आप राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से होकर राजनीति में आए हैं?
जवाब- न मैं संघ की तरफ़ से आया हूँ न कोई मेरा राजकीय गुरू है. मेरी किस्मत में था तो मैं राजनीति में आया हूँ.
सवाल- पर नरेंद्र मोदी के साथ तो हैं आप?
जवाब- वो तो नरेंद्र मोदी जी ने गुजरात के विकास का काम किया है, इसलिए उनके साथ हैं.
सवाल- उनको भी अपना राजनीतिक गुरू नहीं मानते?
जवाब- राजनीति में गुरू किसी को भी नहीं मानता है. जो काम करते हैं उन्हें ही हम अपना गुरू मानते हैं.








