घातक तो हैं पर क्या वैध भी हैं ड्रोन हमले?

बीते साल 17 मार्च को पाकिस्तान के उत्तरी वजीरिस्तान में एक कबाइली बैठक 'जिरगा' के दौरान हुए ड्रोन हमले में 42 लोग मारे गए थे.
आए दिन होने वाले इस तरह के हमलों में उस दिन मारे गए लोगों में पाकिस्तानी तालिबान के चार चरमपंथी भी शामिल थे. लेकिन बाकी सभी कबाइली लोग थे जिनका चरमपंथ से कोई संबंध नहीं था.
ऐसी ही एक कबाइली सदस्य दाउद खान के बेटे नूर खान ने पेशावर की अदालत में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ आम नागरिकों के जानमाल की सुरक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है.
नूर खान की तरह अमरीका और इंग्लैंड में भी कई लोगों ने ड्रोन हमलों में मारे गए लोगों का पक्ष लेते हुए मुक़दमा दायर किया है जिनमें अमरीकी ड्रोन नीति की नैतिकता और इसकी कानूनी हैसियत को चुनौती दी गई है.
पाकिस्तान और यमन में जैसे-जैसे ड्रोन हमले बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे इसके कानूनी पक्षों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. और तो और खुद अमरीका में भी ये बहस का मुद्दा है कि ड्रोन हमले कानूनी हैं या नहीं.
'आईएसआई की मदद से'
क्रिस्टीन फेयर वॉशिंगटन में पाकिस्तान मामलों की एक जानीमानी विशेषज्ञ हैं और ड्रोन हमलों की भी समर्थक हैं.
वे कहती हैं, "पाकिस्तान में ड्रोन हमले आईएसआई की सहायता से होते हैं. ये बात और है कि फ़ौज इसकी ज़िम्मेदारी नहीं लेती है और इसकी जवाबदेही सरकार के जिम्मे आ जाती है."
लेकिन क्रिस्टीन फेयर भी ये स्वीकार करती हैं कि अगर ड्रोन हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और समझौतों का उलंघन करते हैं तो इसके बारे में उन्हें अधिक जानकारी नहीं है.
वे कहती हैं, "यहां ये एक बहस का मुद्दा ज़रूर है और इस पर बहस होनी भी चाहिए, लेकिन मुझे इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं है."
कानून
अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, किसी देश की सरकार आम लोगों को मारने के बजाए उन्हें अदालत में पेश करेगी और अदालत में सुनाई गई सजा का पालन करेगी.
लेकिन ड्रोन हमलों में खुफिया रिपोर्ट के आधार पर किसी को निशाना बनाया जाता है.
मगर क्रिस्टीन फेयर का तर्क यह है कि ड्रोन हमले काफी तैयारी के बाद किए जाते हैं और इनमें मरने वाले चरमपंथी ही होते हैं.
वे कहती हैं, "मैं पेशावर गई हूं जहां कई लोगों ने मुझे बताया कि वह ड्रोन हमलों का समर्थन करते हैं. जब हमले होते हैं तो उन्हें डर नहीं लगता क्योंकि उन्हें पता है वो तालिबान नहीं हैं."
पाकिस्तान सरकार ने हमेशा से यह कहा है कि ड्रोन हमलों से फायदा कम नुकसान अधिक होता है. इसमें आम नागरिकों की मौत से अमरीका के खिलाफ नफरत और बढ़ती है.
लेकिन अमरीकी प्रशासन का कहना है कि ड्रोन हमले अमरीकी कानून का उल्लंघन नहीं करते. अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन पर अमरीका खामोश है.
दाउद खान के बेटे नूर खान ने अदालत में कहा है कि उनके पिता की मौत की ज़िम्मेदारी देश की और विदेशी एजेंसियों पर तय करनी चाहिए. लेकिन ऐसे संकेत नहीं मिलते कि अमरीका अपनी ड्रोन पॉलिसी बदलने वाला है.












