एफडीआई पर वोटिंग: सर्वदलीय बैठक भी बेनतीजा

मुलायम सिंह - मायावती
इमेज कैप्शन, सरकार की सारी उम्मीदें समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के सहारे टिकीं हैं

एफडीआई के ऊपर मतदान पर गतिरोध को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक बेनतीजा रही है. वोटिंग पर ना विपक्ष माना ना सरकार ने घुटने टेके.

नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने बैठक के बाद कहा कि विपक्ष एफडीआई पर संसद में बहस के बाद वोटिंग से कम पर नहीं मानेगा. दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि वो इस मसले पर बहस के लिए तैयार है लेकिन मतदान के लिए नहीं.

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने तो वोटिंग करने का निर्णय लोकसभा अध्यक्ष के ऊपर छोड़ने का निर्णय लिया है. लेकिन इन दोनों पार्टियों ने एक तरफ़ सरकार को राहत पहुंचाकर दूसरी तरफ उसकी आफत बढ़ा दी है.

सपा बसपा की मांगें

समाजवादी पार्टी ने संकेत दिए हैं कि अगर सरकार सरकारी नौकरियों में प्रमोशन के दौरान आरक्षण संबंधी विधेयक लाती है तो वो सरकार के खिलाफ मतदान करेगी.

दूसरी तरफ बहुजन समाज पार्टी इस बात पर अड़ी हुई है कि सरकार को सदन में सबसे पहले आरक्षण संबंधी विधेयक लाना चाहिए.

इस सारी रस्साकशी के केन्द्रीय संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने एक बार फिर से सभी पार्टियों से अपने-अपने रुख पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है.

रीटेल के क्षेत्र में विदेशी निवेश को अनुमति पर सरकार मतदान को टालने की पूरी कोशिश कर रही है.

अगर सरकार की मतदान में हार हाती है तो तकनीकी रूप से उसके गिरने की कोई संभावना नहीं है लेकिन मतदान में हारने का अर्थ होगा कि यूपीए नैतिक रूप से सत्ता में रहने का अधिकार खो देगी.

इसके अलावा कांग्रेस नेतृत्व जो कि पूरे जोश से 2014 आम चुनाव में जाने की तैयारियों में लगा है उसके लिए इस हार का दाग मिटा पाना मुश्किल होगा और वह चुनावी गठबंधनों के लिए बहुत अच्छी हालत में नहीं होगा.

समीकरण 1

अगर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी तृणमूल कॉंग्रेस के साथ एफडीआई के खिलाफ मत देने पर उतर आएँ तो सरकार के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी. मगर इसकी संभावना कम है क्योंकि बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों ही संकेत दे चुकी हैं कि वे एफडीआई पर मतदान के पक्ष में नहीं हैं.

इस बात की प्रबल संभावना है कि दोनो वोटिंग की हालत में सदन से बाहर चली जाएँ. सरकार के प्रमुख घटक दल डीएमके के 18 लोकसभा सांसद हैं. उसके भी मतदान की हालत में सदन से अनुपस्थित रहने की संभावना है.

डीएमके द्वारा एफडीआई पर सरकार के खिलाफ वोट करने की हालत में सरकार ना केवल मतदान में हार जाएगी बल्कि उसकी साख को बुरी तरह से धक्का लगेगा. एक ऐसा घटक जो कि सरकार में हमेशा से भागीदार रहा है वो सरकार के खिलाफ मत दे ये कांग्रेस के लिए शर्मिंदगी का कारण बन जाएगा.

सरकार की पहली कोशिश यह है कि डीएमके उनके साथ खड़ा हो वरना बहिष्कार करे. डीएमके द्वारा वोटिंग का बहिष्कार भी सरकार के लिए कोई सुखद बात नहीं है. लेकिन यह सरकार के खिलाफ मतदान से बेहतर है.

समीकरण 2

अगर तृणमूल कॉंग्रेस एफडीआई का विरोध करती हैं और समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजपार्टी सदन का बहिष्कार करती हैं तो सदन की संख्या कम हो जाएगी और सरकार को कोई संकट नहीं होगा. बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों कह चुके हैं कि वो भाजपा के साथ इस मुद्दे पर नहीं खड़े होंगे.

समीकरण 3

अगर सरकार मत विभाजन के लिए राजी नहीं होती है तो विपक्ष किसी भी सूरत में संसद को नहीं चलने देगा. अभी तक इसी की प्रबल संभावना है.