'मांसाहारी यानी बेईमान, चोर और यौन अपराधी'

अगर आप मांसाहारी हैं तो आप यौन अपराध करते हैं. आप धोखा देतें हैं, झूठ बोलते हैं, वादे भूल जाते हैं, बेईमान हैं, चोरी करते हैं, झगड़ा करते हैं.
यह कहा गया है छठी कक्षा की एक किताब में, जिसमें इसके अलावा कई और अजीब बातें लिखी गई हैं.
इसमें कहा गया है मांसाहारियों के बारे में लिखी गई यह सारी बातें आम तौर पर सही हैं.
इस किताब में यह भी कहा गया है कि 18 से 25 साल की उम्र में लड़की शादी के लिए तैयार होती है. ''बिना नाम खराब किए शादी करना हर लड़की का सपना होता है.''
डेविड एस पोद्दार की 'न्यू हेल्थवे' नाम की इस किताब को एस चांद एंड कंपनी ने प्रकाशित किया है.
केंद्रीय माध्यामिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई या प्रकाशक एस चांद से इस बारे में संपर्क करने के सारे प्रयास असफल रहे.
'शाकाहारी लोग श्रेष्ठ'
सीबीएसई के चेयरमैन विनीत जोशी के कार्यालय से जवाब मिला कि वो मीटिंग में हैं.
जबकि एस चांद एंड कंपनी का फोन उठाने वाली महिला ने कहा कि इस बारे में जो लोग बात कर सकते हैं वो हैदराबाद में किसी बैठक में गए हैं और उनका कोई नंबर उपलब्ध नहीं है.
इस किताब में कहा गया है कि शाकाहारी लोग मांस खाने वालों से श्रेष्ठ होते हैं.
लेकिन मांस इतना स्वादिष्ट क्यों होता है? किताब में लिखा है जब कोई जानवर मरता है तो पूरीन नाम की शरीर की गंदगी जिसे पेशाब से बाहर निकल जाना चाहिए वो मांस में फंस जाती है.
अरबी लोग जिन्होंने स्वेज नहर बनाने में मदद की वे गेहूँ और खजूर खाते थे और यही काम करने वाले अंग्रेज़ों से श्रेष्ठ थे जो बीफ यानी गोंमांस खाते थे.
किताब के अध्याय 'डू वी नीड फलेश फूड' में आगे लिखा गया है, ''मांस खाना ज़रूरी न होने की सबसे ठोस दलील यह है कि दुनिया की सृजन करने वाले ने आदम और हव्वा के मूल आहार में भी मांस शामिल नहीं किया था. उन्होंने उन्हें फल, मेवे और सब्ज़ी दिए थे.''
अभी यह साफ नहीं है कि यह किताब किस स्कूल में पढ़ाई जा रही है.
एक प्रिंसीपल ने बताया कि वो आम तौर पर एनसीआरटी की किताबें लेने का सुझाव देते हैं लेकिन कई बार एस चांद जैसे निजी प्रकाशक की किताबें भी स्कूलों में पढ़ाई जाती हैं.
उन्होंने कहा कि लेकिन यह हर स्कूल पर निर्भर करता है कि वो किसकी किताबें छात्रों को पढ़ने के लिए कहता है.












